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कानपुर में टनल के अंदर आमने-सामने आ गईं मेट्रो ट्रेनें, ब्रेक लगाने वाला कोई नहीं था, 20 मीटर पहले जो हुआ उसने रचा इतिहास

By Alok TiwariEdited By: Anurag Shukla
Published: Tue, 26 May 2026 10:37 PM (IST)

कानपुर मेट्रो के भूमिगत सेक्शन में मेट्रो ट्रेनें 80 किमी/घंटा की रफ्तार से आमने-सामने दौड़ीं। 20 मीटर पहले स्वतः रुक गईं।

बारादेवी स्टेशन में खड़ी मेट्रो। मेट्रो

बारादेवी स्टेशन में खड़ी मेट्रो। मेट्रो

HighLights

  1. कानपुर मेट्रो के भूमिगत सेक्शन में हुआ हाईटेक कॉलिजन टेस्ट

  2. दो ट्रेनें 80 किमी/घंटा पर आमने-सामने दौड़ीं, स्वतः रुकीं

  3. सीबीटीसी सिग्नलिंग और एटीओ मोड की सुरक्षा जाँची गई

जागरण संवाददाता, कानपुर। Kanpur Metro Update: कानपुर सेंट्रल से ट्रांसपोर्ट नगर मेट्रो स्टेशन की तरफ आमने सामने मेट्रो। 80 किमी की रफ्तार से चली आ रही मेट्रो ने वहां मौजूद हर किसी की सांसें रोक दी थी। बिना ड्राइवर के चल रही ट्रेनें जैसे ही टकराने वाली थीं तभी 20 मीटर पहले ही खुद ब खुद पहिये थम गए।

सेंट्रल स्टेशन से मेट्रो ट्रेन टनल के भीतर फर्राटा भरते हुए 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रांसपोर्ट नगर मेट्रो स्टेशन की ओर बढ़ी। तभी उसी ट्रैक पर 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रांसपोर्ट नगर की ओर एक मेट्रो ट्रेन ठीक सामने आ गई। आमने-सामने आते ही करीब 20 मीटर पहले पहिए दोनों मेट्रो ट्रेनों रुक गईं। ये नजारे मंगलवार को कारिडोर-1 के नवनिर्मित सेक्शन सेंट्रल स्टेशन से नौबस्ता पर किए हाईटेक कालिजन टेस्ट के दौरान रहे।

कालिजन टेस्ट सक्सेस

मेट्रो की अत्याधुनिक सीबीटीसी (कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल) सिग्नलिंग प्रणाली और आटोमेटिक ट्रेन आपरेशन (एटीओ) मोड की विश्वसनीयता जांचने के लिए यह कालिजन टेस्ट किया गया। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन (यूपीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने बताया कि परीक्षण के दौरान टक्कर जैसी स्थिति बनाई गई, ताकि यह परखा जा सके कि किसी आपात स्थिति में ट्रेन का आटोमेटिक सुरक्षा तंत्र कितनी तेजी और सटीकता से काम करता है। निर्धारित दूरी पर पहुंचते ही दोनों ट्रेनों का ब्रेकिंग सिस्टम स्वत: सक्रिय हो गया और ट्रेनें रुक गईं।

सुरक्षा मानकों को संतोषजनक पाया गया

इससे पहले आटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) मोड पर भी सफल परीक्षण किए जा चुके हैं। दोनों ट्रैकों पर 80 किमी प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार पर हाई स्पीड टेस्ट और स्पीड ब्रेक टेस्ट भी पूरे किए गए हैं। इसके अलावा एक विदेशी एजेंसी द्वारा स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन भी कराया गया, जिसमें सिग्नलिंग और सुरक्षा मानकों को संतोषजनक पाया गया। उन्होंने कहा कि यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार की टेस्टिंग बेहद महत्वपूर्ण होती है। कारिडोर-1 के शेष हिस्से के साथ-साथ कारिडोर-2 (सीएसए से बर्रा-8) का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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