कानपुर नकली सीमेंट का काला कारोबार: नेटवर्क का मुख्य आरोपित 13 दिन बाद भी फरार, यूपी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
कानपुर में नकली सीमेंट के काले कारोबार के मुख्य आरोपित 13 दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। ...और पढ़ें

नकली सीमेंट। जागरण अर्काइव
HighLights
17 फर्मों को सप्लाई, पांच करोड़ का टर्नओवर, फिर भी पुलिस के पास ठोस साक्ष्य नहीं
अदाणी ग्रुप ने सोमवार को पनकी पुलिस को जांच के लिए 50 किलो की सीमेंट की बोरी सौंपी
जागरण संवाददाता, कानपुर। नकली सीमेंट को नई बोरियों में भरकर बाजार में बेचने के मामले में 13 दिन बीतने के बाद भी पुलिस मुख्य आरोपितों तक नहीं पहुंच सकी है। अब पुलिस सीमेंट के नमूने जांच के लिए भेजने की तैयारी कर रही है। अदाणी ग्रुप की विजिलेंस टीम ने सोमवार को 50 किलो की खाली और भरी सीमेंट के बोरी पनकी थाना टीम को सौंप दी है। इसकी मदद से गोदाम में मिली सीमेंट और कंपनी की असली सीमेंट का अलग-अलग मिलान कराया जाएगा। साथ ही बोरियों की प्रिंटिंग कहां हो रही थी, इसकी भी जांच की जाएगी।
14 अक्टूबर को पनकी पुलिस की छापेमारी के बाद मगौती इंटरप्राइजेज, महादेव बिल्डर्स, अराना डिस्ट्रीब्यूटर्स और त्रिदेव इंटरप्राइजेज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मामले में अब तक नकली सीमेंट के गोदाम संचालक के मुंशी राहुल की गिरफ्तारी हुई है, जबकि त्रिदेव इंटरप्राइजेज के मालिक निशांत मित्तल को जमानत मिल चुकी है। लालबंगला निवासी मुख्य आरोपित धीरज और नीरज गुप्ता अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। 13 दिनों की जांच के बाद भी पुलिस के पास आरोपितों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य नहीं जुट सके हैं।
प्लाट मालिकों के नाम तक नहीं पता
मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने के बावजूद प्लाट मालिकों के नाम सामने नहीं आए हैं। पुलिस केडीए से प्लाट मालिकों की जानकारी मांगी थी, हालांकि पुलिस का दावा है कि उन्हें प्लाट मालिक का नाम पता चल चुका है, लेकिन अभी नाम नहीं बताए जा सकते हैं। वहीं, नकली सीमेंट की आपूर्ति के नेटवर्क की पूरी तस्वीर भी अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। त्रिदेव इंटरप्राइजेज के जरिये 17 से अधिक फर्मों को सीमेंट की आपूर्ति किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन संबंधित फर्मों के नाम, पते और उनके कारोबार वाले जिलों का ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
पांच करोड़ से अधिक का कारोबार
जीएसटी विभाग के आनलाइन डाटा के अनुसार, त्रिदेव इंटरप्राइजेज ने वर्ष 2017 में पंजीकरण कराकर सीमेंट का कारोबार शुरू किया था। सरकारी रिकार्ड में सात वर्षों के दौरान फर्म का पांच करोड़ रुपये से अधिक का टर्नओवर दर्ज है। वर्ष 2019 से इस्पात नगर में गोदाम संचालित होने और यहां से हर महीने करीब 30 हजार बोरियों की आपूर्ति हो रही थी।
नेताओं के सामने आए नाम तो पीछे खीचे कदम
मामले में सफेदपोश नेता और प्रभावशाली संगठन के पदाधिकारी का नाम सामने आने की चर्चा के बीच पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस इस मामले में कार्रवाई तेजी से करने की जगह धीरे-धीरे खुद जांच को आगे बढ़ा रही है। वहीं पुलिस की कार्यप्रणाली से इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि एफआइआर में प्लाट मालिक का नाम नहीं खोलना और पकड़े गए आरोपित की कुछ घंटों में जमानत हो जाना। अब जांच की असली कसौटी सीमेंट के नमूनों की रिपोर्ट, बोरियों की प्रिंटिंग के स्रोत और वर्ष 2017 से अब तक के कारोबार की कड़ियों को जोड़ना भी पुलिस के सामने चुनौती है।
बोले जांच अधिकारी....
सीमेंट के सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। केडीए से प्लाट मालिकों की रिपोर्ट मिल चुकी है, लेकिन अभी जांच की जा रही है, इसलिए नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सकते। इस मामले में अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।
अंकुर चौधरी, प्रभारी, पनकी इंडस्ट्रियल चौकी
बोले कारोबारी...
ग्राहक अपनी समझदारी से नकली और एक्सपायरी सीमेंट खरीदने से बच सकते। असली सीमेंट के लिए ग्राहकों को पेपर पैकिंग सीमेंट खरीदनी चाहिए,इसमें मिलावट की गुंजाइश नहीं होती। अब सभी बड़ी कंपनियां पेपर पैकिंग करने लगी है। इस मामले की जांच करके कार्रवाई होनी चाहिए।
निखिल यादव, श्री बालाजी ट्रेडर्स
सीमेंट बैग में तीन महीने की मैन्युफैक्चरिंग डेट देख कर ही खरीदनी चाहिए। इसके अलावा वजन ठीक 50 किलोग्राम होना चाहिए। असली सीमेंट चुटकी में लेकर उंगलियों के बीच रगड़ने पर बिल्कुल चिकनी महसूस होनी चाहिए अगर खुरदरी महसूस हो तो नकली या एक्सपायरी सीमेन्ट है।
अन्नू पंडित, अध्यक्ष, भौती मौरंग गिट्टी व्यापार मंडल
अब सब जगह डुप्लीकेसी होने लगी है, अपना घर बनाते समय ऐसे में ग्राहक को बहुत समझदारी से काम लेना पड़ेगा, असली और नकली की पहचान करना जरूरी है। जिससे आपके सपनो का आशियाना मजबूत बनकर तैयार हो। अच्छी सीमेंट पानी में कुछ देर ऊपर टिकती है,जबकि नकली तुरंत डूब जाती है।
अमित त्रिवेदी, केके कंस्ट्रक्शन, नौबस्ता
सीमेंट को सीधा कंपनी से लेनी चाहिए, जिससे नकली सीमेंट की गुंजाइश नहीं होती है। व्यापार में कभी कभार किसी राजमिस्त्री द्वारा बताई गई समस्या सामने आती है, तो तत्काल इसकी सूचना कंपनी को दी जाती है । जहां से कंपनी प्रतिनिधि साइड की विजिट कर सीमेंट की जांच करने के लिए आते हैं।
- दुर्गेश बाजपेई, उमा ट्रेडिंग कंपनी
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