कोडीन सीरप के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन का बड़ा खेल, कानपुर में 28 दवा फर्मों के लाइसेंस रद
कानपुर में नशीली कोडीन सीरप और नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन के बड़े कारोबार का खुलासा हुआ है, जिसके बाद औषधि विभाग ने 28 दवा फर्मों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
कानपुर में नकली दवा और नशीली सीरप का कारोबार उजागर।
औषधि विभाग ने 28 दवा फर्मों के लाइसेंस किए रद्द।
कई राज्यों से जुड़े इस रैकेट में एफआईआर और गिरफ्तारियां।
जागरण संवाददाता, कानपुर। नशीली कोडीन युक्त सीरप के बाद अब नकली एंटी रेबीज वैक्सीन के खेल में शहर के दवा कारोबार का नाम सामने आने पर औषधि विभाग की ओर से कार्रवाई की जा रही है। देश के कई राज्यों में कोडीन युक्त सीरप की सप्लाई के बाद नकली वैक्सीन के तार शहर की फर्म से जुड़े मिले।
विभाग की नाक के नीचे बड़े स्तर पर कैसे नकली दवा का कारोबार खड़ा हो गया, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकार इसे औषधि विभाग के निगरानी तंत्र की विफलता बता रहे हैं, जबकि औषधि विभाग नशीली कोडीन युक्त सीरप के बाद नकली वैक्सीन का क्रय-विक्रय करने वाली फर्म के लाइसेंस निरस्त कर पुलिस की कार्रवाई पर पीठ थपथपा रहा है।
औषधि निरीक्षक ओमपाल ने बताया कि जिन 28 दवा फर्म के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं, वे पंजीकृत पते पर संचालित नहीं थीं। दो-तीन साल से उन लाइसेंस धारक की ओर से दवा का क्रय-विक्रय भी नहीं किया गया।
इस पर नोटिस देने के बाद लाइसेंस निरस्त किया गया है। प्रदेश स्तर पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। जिन फर्म के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं, उनमें कुछ के नाम नशीली व नकली दवा बेचने वाले मामले में आया था लेकिन जांच में कुछ मिला नहीं था। थोक के 3270 और फुटकर के सात हजार से ज्यादा लाइसेंस की जांच की जा रही है।
नकली व नशीली दवा के खेल में जिसके क्रय-विक्रय मिलेगा। उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। औषधि विभाग के सहायक आयुक्त गोविंद गुप्ता ने कहा कि शासन स्तर पर जांच चल रही है। पूर्व में नशीली और अभी नकली वैक्सीन के मामले में जो भी दवा कारोबारियों के नाम सामने आए हैं। विभाग की ओर से उनके खिलाफ पुलिस में एफआइआर की गई है।
नकली दवा के कारोबार में कई राज्यों से कनेक्शन
नकली दवा के कारोबार में शहर का कनेक्शन कई राज्यों से रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, दिल्ली समेत राज्यों में कोडीनयुक्त सीरप की तस्करी मामले में पुलिस पहले 5000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें कागजों में ई-रिक्शा-लोडर को ट्रक दिखा 21.50 लाख कोडीनयुक्त सीरप की तस्करी की बात सामने आ चुकी है।
11 आरोपितों पर आठ मुकदमे भी दर्ज हैं। औषधि की आड़ में एनडीपीएस श्रेणी से संबंधित कोडीनयुक्त सीरप व नशीली दवाएं खरीदने व बेचने के मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने बीते वर्ष छापेमारी की थी।
जांच के दौरान अग्रवाल ब्रदर्स के मालिक फीलखाना पटकापुर निवासी विनोद अग्रवाल, उसका बेटा शिवम समेत 11 आरोपितों की फर्मों से 26 लाख की कोडीनयुक्त सीरप की खरीद-बिक्री अवैध तरह से मिली थी।
तब औषधि निरीक्षक ने मां दुर्गा मेडिकोज के खिलाफ महाराजपुर, बालाजी मेडिकोज के खिलाफ रायपुरवा, एएस हेल्थ केयर के खिलाफ कल्याणपुर, आरएस हेल्थ केयर के खिलाफ चकेरी, मसाइको फर्म के खिलाफ कलक्टरगंज, मेडिसिन फार्मा के खिलाफ कलक्टरगंज और अग्रवाल ब्रदर्स के खिलाफ कलक्टरगंज व हनुमंत विहार थाने में थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
इनकी हो चुकी गिरफ्तारी
एसआइटी गिरोह के सरगना विनोद अग्रवाल, बेटे शिवम अग्रवाल, प्रभात खरे, विशाल सिंह सिसोदिया, रोहन पचौरी, रायपुरवा के सुमित केसरवानी को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच में एसआइटी को 32 ऐसी फर्में मिली थी, जिसमें गिरोह ने दो साल में 1.12 करोड़ की कोडीनयुक्त सीरप की सप्लाई की थी।
