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सर्दियों में दिल का कैसे रखें खास ख्याल, कानपुर के डॉ. सिन्हा ने दिए जरूरी टिप्स

Published: Sat, 31 Oct 2026 04:04 PM (IST)Updated: Sat, 31 Oct 2026 04:13 PM (IST)

बदलते मौसम, खासकर सर्दी में हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बीपी और शुगर के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

हृदय रोग संस्थान के डॉ. एस.के. सिन्हा ने दैनिक जागरण के 'हेलो डॉक्टर' कार्यक्रम में बचाव के उपाय बताए।

हृदय रोग संस्थान के डॉ. एस.के. सिन्हा ने दैनिक जागरण के 'हेलो डॉक्टर' कार्यक्रम में बचाव के उपाय बताए।

HighLights

  1. सर्दी में हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है, रहें सतर्क।

  2. बीपी-शुगर मरीज डॉक्टर की सलाह पर दवाएं संशोधित कराएं।

  3. स्वस्थ दिनचर्या, संतुलित आहार और तनाव मुक्त जीवन अपनाएं।

जागरण संवाददाता, कानपुर। बदलते मौसम में हृदय की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। सीने में दर्द, भारीपन या दबाव महसूस होना, सांस फूलना, सांस लेने में तकलीफ होना, जबड़े, गर्दन, पीठ या बाएं हाथ में अचानक दर्द होना, अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना या जी मिचलाना जैसी समस्याओं के साथ ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। सर्दी की दस्तक में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है।

खासतौर पर बीपी व शुगर के मरीजों हार्ट अटैक व ब्लॉकेज की समस्याएं मिल रही है। इससे बचाव के लिए दैनिक जागरण के हेलो डॉक्टर में हृदय रोग संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसके सिन्हा ने पाठकों के प्रश्नों का उत्तर देकर रोग से बचाव के लिए जागरूक किया। डॉ. सिन्हा ने दिनचर्या को सुधारने, खान-पान को बेहतर करने, तनाव मुक्त रहने की सलाह दी।

पेश है पाठकों से बातचीत के मुख्य अंश...


सवाल- एक हाथ में तेज दर्द व भारीपन की समस्या हो रही है। क्या यह हृदय से जुड़ी बीमारी का संकेत है? - हां जी मो. इकबाल, परेड।

जवाब- 62 साल की उम्र में अगर यह समस्या हो रही है तो एक बार आप हार्ट की जांच कराएं। डायबिटीक के मरीजों में हार्ट की बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। बीपी व शुगर के मरीजों में हृदय की बीमारियों का खतरा कई गुणा बना रहता है। इसलिए लक्षण दिखने पर डॉक्टर को दिखाकर ही इलाज कराएं। बदलते मौसम में हृदय की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। सीने में दर्द, भारीपन या दबाव महसूस होना, सांस फूलना, सांस लेने में तकलीफ होना, जबड़े, गर्दन, पीठ या बाएं हाथ में अचानक दर्द होना, अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना या जी मिचलाना बदलते मौसम में हृदय की बीमारी के संकेत हैं।

सवाल- सर्दी में दिल का ख्याल कैसे रखें। क्या करें और क्या न करें?- तुलसी राम कुशवाहा, यशोदा नगर।

जवाब- खान-पान, वजन को नियंत्रित रखें। अगर बीपी व शुगर की दवा चल रही है। उसको संशोधित करा लें। पर्याप्त नींद लें, हल्का टहलें, तनाव मुक्त रखें। सर्दी से बचें और अगर संभव है तो ब्लैक काफी व ब्लैक चाय पीने की आदत डालें। उसमें कुछ पत्ते तुलसी के डाल लें। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करती है।

सवाल- जी मिचलाना और सीने में भारीपन की समस्या रहती है। क्या यह हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है? - आरबी सैनी, विनायकपुर।

जवाब- जी नहीं, जी मिचलाना और सीने में भारीपन हृदय की बीमारी का संकेत हो सकता है। चलने में सांस फूलना व भारीपन में सीटी एंजियो व टीएमटी जांच से हृदय की कार्यक्षमता को देखा जा सकता है। एक बार आप हृदय रोग संस्थान की ओपीडी में दिखा लें। जांच के बाद आपके दिल की स्थिति को देखकर दवाएं शुरू की जाएगी।

सवाल- बीपी की दवा समय पर लेता हूं। फिर भी कभी-कभी बीपी बढ़ जाता है। क्या करें? - वेद प्रकाश गुप्ता, बारासिरोही।

मौसम में बदलाव के कारण अक्सर बीपी के स्तर में बदलाव हो सकता है। इसके साथ ही असंतुलित दिनचर्या और अधूरी नींद भी बीपी के स्तर को असंतुलित कर सकती है। एक बार आप अपने डॉक्टर को दिखाकर बीपी की दवा संशोधित कराएं। लंबे समय तक बीपी व शुगर की दवा खाने वाले मरीजों को चिकित्सक की सलाह पर जांच कराकर दवा की डोज परिवर्तित करानी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के बीपी की दवा लेने से बचें।

सवाल- सीढ़ियों को चढ़ने पर सांस फूलने लगती है। क्या यह दिल की बीमारी हो सकती है? - शिव गोपाल बाजपेई, रावतपुर गांव। माया रावत, नानकारी। रामकुमार गुप्ता, किदवई नगर।

जवाब- जी हां, सांस का फूलना दिल व चेस्ट की मुरारी का संकेत है। अगर किसी को सीढ़ियां चढ़ने में सांस फूल रही है। वो हृदय की बीमारी का लक्षण है। इसलिए घबराएं इको और ईसीजी जांच कराए और डॉक्टर की सलाह पर ही दवाएं लें। आप एक बार कार्डियोलाजी और मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय में दिखा लें।

सवाल- मेरे पति हाई बीपी व शुगर के मरीज हैं, अब सीने में दर्द व जकड़न है? - अलका द्विवेदी, पी रोड।

इस स्थिति में देरी न करें। तुरंत कार्डियोलाजी में जाकर दिखाएं। यह हृदय रोग का लक्षण हो सकता है। जहां पर प्राथमिक जांच और संपूर्ण इलाज की व्यवस्था है। इमरजेंसी में पहुंचने पर इको, ईसीजी, ट्राप आई जांच करके हृदय की बीमारी को देखकर तुरंत इलाज की व्यवस्था है। हृदय रोग संस्थान गंभीर हृदय रोगियों के लिए संपूर्ण इलाज का केंद्र बन गया है।

सवाल- कैसे पहचाने की शरीर में बैड कोलेस्ट्राल बढ़ रहा है। इसकी पहचान और इसके खतरे बताएं। - अंजलि जैन, श्याम नगर।

जवाब- जैसे आंख के पास कोलेस्ट्राल का जमा होना। शरीर के जोड़ वाले भाग में दर्द ट्यूमर जैसे जैन्थोमा दिखना शरीर में बैड कोलेस्ट्राल बढ़ने का संकेत है। ऐसे मरीजों की धमनियों में कोलेस्ट्राल बढ़ने का खतरा बना रहता है। जो हार्ट ब्लाकेज का कारण बन सकता है। 40 उम्र पार कर चुके लोगों को बैड कोलेस्ट्राल की जांच जरूरी है।

सवाल- खेलते, काम करते समय हार्ट अटैक का कारण क्या हो सकता है? - राकेश शुक्ला, स्वरूप नगर।

जवाब- कई कारण हो सकते हैं, धमनियों में कोई ब्लाकेज कोरोनरी हार्ट डिसीज, धड़कन का अनियंत्रित होना हो सकता है। इसलिए ही जिम करते, डांस करते और खेलते समय हार्ट की समस्या हो सकती है। जो शडन डेथ का कारण बनता है। इसलिए अधिक शोर वाले स्थान पर जाने से बचें, भारी जिम व कसरत से बचें।

सवाल- चलते-चलते चक्कर व पसीना आता है, क्या यह हार्ट की बीमारी का संकेत है? - कमल तिवारी, रायपुरवा। आशीष अरोड़ा, पांडुनगर।

जवाब- जी हां हो सकता है। एक बार आप इको व ईसीजी की जांच कराकर डॉक्टर को दिखा लें। चलते समय पसीना व चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं। इसकी अनदेखी भविष्य में हार्ट की बीमारी का संकेत देती है। इसलिए देरी से बचें, समय पर इलाज और दवा लेकर खुद का बचाव करें।

सर्दी में बढ़ जाता हृदय रोग का खतरा

- हार्ट अटैक।

- हार्ट फेल्योर।

- एंजाइना।

- हार्ट में ब्लॉकेज होना।

- धड़कन का कम होना।

बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान

- बीपी-शुगर की दवाएं समय पर लें।

- पर्याप्त नींद लें।

- सर्दी से बचें।

- नमक और चीनी परहेज करें।

- नमक की मात्रा प्रतिदिन पांच ग्राम से ज्यादा न हो।

- शक्कर की मात्रा प्रतिदिन 25 ग्राम से कम लें।

- फाइबर की मात्रा के लिए मौसमी फल का सेवन करें।

- खाने में देशी आहार यानी, सलाह, मिश्रित आटा की रोटी, दाल, सब्जी लें।

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