हेलो डॉक्टर: 'हर दूसरी महिला व किशोरी में एनीमिया का खतरा, अनदेखी पड़ सकती है भारी', डॉ उरूज जहां ने दिए सेहत से जुड़े टिप्स
दैनिक जागरण के 'हेलो डॉक्टर' कार्यक्रम में डॉ. उरूज जहां ने बताया कि हर दूसरी गर्भवती व किशोरी में एनीमिया ...और पढ़ें
-1791052160551_m.webp)
HighLights
एनीमिया गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा।
पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और जांच से स्वास्थ्य बेहतर रखें।
गर्भावस्था में बीपी, प्लेटलेट्स व फाइब्रॉइड की अनदेखी न करें।
जागरण संवाददाता, कानपुर। एनीमिया (शरीर में खून की कमी) गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इन अवस्था में शरीर को अधिक पोषण और आयरन की आवश्यकता होती है, और इसकी कमी होने पर गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। जच्चा और बच्चा की सेहत के लिए एनीमिया जिम्मेदार है।
अक्सर गर्भवती व किशोरी इसकी अनदेखी करती हैं, जो कुछ समय के बाद शारीरिक कमजोरी व बीमारियों का कारण बनता है। ये बातें दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में एसोसिएट प्रोफेसर डा. उरूज जहां ने पाठकों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि हर दूसरी गर्भवती व किशोरी में खून की कमी मिल रही है। जो बच्चे के विकास को बाधित करता है। पढ़ें पाठकों से बातचीत के मुख्य अंश।
मेरी बेटी को खून की कमी लगती है, कैसे पता करें कि बेटी में खून की कमी हो रही है?
एनीमिया में लगातार थकावट रहना, चिड़चिड़ापन, काम में मन न लगना मुख्य लक्षण हैं। हाथ व आंख में सफेदी भी मुख्य लक्षण हैं। बचाव के लिए डाइट में आयरन बढ़ाएं। गुड़-चना, हरी सब्जियों का सेवन करें। दूध-दही के साथ अंडे का प्रयोग करें।
गर्भपात की दवा के क्या नुकसान हो सकते हैं, इससे बच्चेदानी को नुकसान हो सकता है क्या?
ओवर द काउंटर गर्भपात की दवा खाने से बच्चेदानी में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। ओवर द काउंटर दवा सबसे ज्यादा नुकसान गर्भवतियों में मिल रहा है। संक्रमण के ज्यादातर मामले में बच्चेदानी के कमजोर होने की समस्या भी मिल रही है।
गर्भावस्था में मेरा बीपी अक्सर बढ़ रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए क्या करना चाहिए?
गर्भावस्था में बीपी का उतार-चढ़ाव जच्चा और बच्चा के लिए खतरनाक है। जो प्रीक्लेम्पसिया का खतरा पैदा करता है। इसमें झटके आने की समस्या हो सकती है। जो मां और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए जानलेवा हो सकता है। गर्भावस्था में बीपी की मानीटरिंग जरूरी है। यह बच्चे के विकास में भी बाधक हो सकती है।
17 साल की हूं, मोटापा बढ़ रहा है। खान-पान सीमित है फिर भी वजन कैसे बढ़ रहा है?
मोटापा थायराइड और हार्मोन की गड़बड़ी के कारण होता है। वजन बढ़ रहा है तो आप नियमित एक्सरसाइज करें। घर में खाना अगर आप खा रहे हैं, तो राजमा, पनीर, दालें ले सकते हैं। गट हेल्थ का ख्याल रखें। मोटापे का कारण गट हेल्थ की गड़बड़ी भी सकती है। इसलिए इसकी अनदेखी ठीक नहीं है।
हीमोग्लोबिन कम रहता है। ऐसा क्यों हो रहा है और इसको बेहतर करने के लिए क्या करें।
मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव की समस्या के कारण ऐसा हो सकता है। आप खान-पान को बेहतर करें। खाने में मोटे अनाज के साथ दूध, दलिया, दाल शामिल करें। एक बार आप जच्चा-बच्चा अस्पताल में आकर दिखा लें। कुछ जांच के बाद आपकी समस्या का निदान किया जा सकेगा। हीमोग्लोबिन की जांच कराकर आयरन की मात्रा बढ़ाए। फोलिक एसिड व विटामिन की दवा डाक्टर की सलाह पर खा सकती हैं।
एनीमिया और बीपी की दिक्कत रहती है। कैसे इससे बचाव करें?
एनीमिया शरीर में खून की कमी के कारण होता है। इस कारण ही बीपी की समस्या बढ़ने लगती है। गर्भावस्था में एनीमिया और बीपी गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी खतरनाक हो सकता है। इसलिए प्रसूति रोग विशेषज्ञ को दिखाएं और मोटापे को नियंत्रित रखें। मोटापे से ग्रसित लोगों में बीपी व एनीमिया का खतरा जानलेवा तक हो सकता है। इसलिए बाहर के खाने से बचें। घर में बना भोजन करें। खाने में अतिरिक्त नमक लेने से बचें और नियमित योग व प्राणायाम करें।
49 साल की हूं, हीमोग्लोबिन आठ से ऊपर नहीं जा रहा है। क्या यह नुकसानदायक हो सकता है?
जी, हां हीमोग्लोबिन की मात्रा आठ से कम होने नुकसानदायक है। आप डाइट को बेहतर करें, सब्जी, राजमा, छोले व प्रोटीन व कैल्शियम युक्त डाइट लें। दिनचर्या को सुधारे, पानी की मात्रा अधिक लें। बाहर बिकने वाले खाद्य पदार्थ को लेने से बचें। एनीमिया के कई कारण हो सकते हैं। जिसे प्राथमिक जांच कर पता किया जा सकता है।
प्लेटलेट्स काउंट गर्भवतियों के लिए कितना खतरनाक है। क्या यह जानलेवा हो सकता है?
वायरल बुखार व डेंगू-मलेरिया के कारण प्लेटलेट्स काउंट कम हो सकता है। गर्भावस्था में 50 से 80 हजार तक प्लेटलेट्स तक ठीक है। हालांकि, यह आंकड़ा डेढ़ लाख तक होना चाहिए। अक्सर गर्भावस्था में प्लेटलेट्स की कमी के साथ पहुंच रही, ज्यादातर महिलाओं में संक्रमण का खतरा भी मिल रहा है। प्लेटलेट्स काउंट की कमी जानलेवा हो सकती है। इसलिए इसकी अनदेखी न करें।
छह माह की गर्भावस्था में हूं, ट्यूब में गांठ की समस्या है। क्या करें?
आप परेशान न हो। गर्भावस्था की सर्जरी के दौरान आसानी से सर्जरी कर निकाला जा सकता है। इससे घबराएं नहीं। दो सेंटीमीटर का फायब्राएड आसानी से निकल सकता है। सात से आठ सेंटीमीटर का फायब्राएड निकालने के लिए सर्जरी की जरूर पड़ती है।
फायब्राएड की पहचान कैसे करें, इसके क्या नुकसान हो सकते हैं?
फायब्राएड में दर्द व खून अधिक बहने की समस्या रहती है। यह 30 से 40 साल के बाद होता है लेकिन अब फैट व डाइट के बदलने के कारण अब यह 20 से 25 साल की युवतियों में मिल रहा है। जो बच्चेदानी का खतरा पैदा कर रहा है। अभी तक हुई स्टडी में बाजार में बिकने वाला खाना व असंतुलित दिनचर्या फायब्राएड का कारण बन रही है।
स्वाति बाजपेई, श्याम नगर। रीता जैन, कल्याण। पूजा अग्रवाल, बिरहाना रोड। अंजलि शर्मा, गुमटी। राधिका कुमारी, फजलगंज। पुष्पा कुशवाहा, दबौली। शिवानी बाजपेई, पांडुनगर। अर्चना, किदवई नगर। माया रावत, नानकारी। सीमा जैन, तात्या टोपे नगर। आकांक्षा गुप्ता, बारासिरोही। कोमल, रावतपुर गांव।
इन बातों का रखें ख्याल
- गर्भवती पौष्टिक आहार लें।
- हरी सब्जियों के साथ गुड़-चना का सेवन करें।
- भीड़भाड़ वाले स्थान में जाने से बचें। यह वायरल से बचाएगा।
- हल्का व्यायाम करें। यह सामान्य डिलीवरी में मदद करता है।
- गर्भावस्था में नियमित डाक्टर की सलाह पर इलाज कराएं।
- बीपी व खून की कमी की जांच कराते रहें।
- स्तनपान जच्चा और बच्चा के लिए जरूरी है।
- गर्भावस्था में मोबाइल फोन का कम से कम प्रयोग करें।
- आउटडोर गतिविधियों की आदत डालें।
