बच्चों के बुखार को सामान्य समझकर अनदेखा नहीं करें, डॉक्टर की सलाह पर ही दवा दें : डाॅ. शैलेंद्र गौतम
बदलते मौसम में बच्चों में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, चिकनपॉक्स और डेंगू जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों ...और पढ़ें

पाठकों के सवालों का जवाब देते जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डा. शैलेंद्र गौतम । जागरण
HighLights
बच्चों में मौसमी बीमारियों का खतरा, डॉक्टर की सलाह जरूरी
बुखार में स्व-दवा से बचें, विशेषज्ञ से इलाज कराएं
चिकनपॉक्स, डेंगू, मलेरिया के लक्षणों को पहचानें, स्वच्छता रखें
जागरण संवाददाता, कानपुर। बदलते मौसम में दिन की गर्मी और रात की ठंडक के कारण बच्चों में मौसमी बीमारी का खतरा बढ़ रहा है। वायरल फीवर, सर्दी, खांसी, जुकाम, फ्लू व संक्रमण के मामले हर दिन ओपीडी में सामने आ रहे हैं। चिकनपाक्स, वायरल हेपेटाइटिस, डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए लक्षण को पहचान समय पर विशेषज्ञ की देखरेख में इलाज कराएं। अक्सर लोग चिकनपाक्स व बुखार की समस्या पर घर पर ही खुद से इलाज शुरू कर देते हैं। यह बच्चों के जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है।
वायरल बुखार व डेंगू-चिकनगुनिया के बुखार में डाक्टरी सलाह पर ही दवा दें। मेडिकल स्टोर से पैरासिटामाल व एंटीबायोटिक्स दवा देने से बचें। पैरासिटामाल की डोज बुखार से ग्रसित बच्चे के वजन पर निर्भर करती है। जबकि एंटीबायोटिक्स की डोज डाक्टर निर्धारित करते हैं। यह बातें दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र गौतम ने पाठकों के सवालों का उत्तर देते हुए कही। पढ़ें पाठकों को दिए सुझाव के अंश...
- वायरल बुखार व अन्य बुखार में क्या अंतर है। इसकी पहचान कैसे करें? - शिवानी बाजपेई, लाजपत नगर।
- वायरल बुखार में छींक, बुखार, नाक बहना, गले में खरास के लक्षण दिखते हैं, इसमें दवा देने पर बुखार उतर जाता है। वहीं, अन्य कारणों से होने वाले बुखार में सर्दी लगकर बुखार, शरीर में तेज दर्द, सुस्ती, खेलकूद में मन नहीं लगता है और दवा देने पर भी बुखार नहीं उतरता है। ऐसी स्थिति में बच्चे का घर पर इलाज नहीं करें। विशेषज्ञ की सलाह पर बच्चे का इलाज कराएं।
- 12 साल के बच्चों को अक्सर बुखार की समस्या रहती है। क्या करें? - वेद प्रकाश गुप्ता, बारासिरोही।
- मौसम में बदलाव के कारण ऐसा हो सकता है। अगर बुखार के साथ खांसी, जुकाम व गले में खरास है। तो बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएं। अगर बुखार के साथ सुस्ती आ रही है तो बच्चे को घर में बना भोजन व तरल पदार्थ अधिक दें। बुखार आने पर ही पैरासिटामाल दवा लें। बिना डाक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स बच्चों को देने से बचें। वायरल बुखार को सही होने में चार से पांच दिन का समय लगता है। इसमें जल्दबाजी व खुद से इलाज करने से बचें। पैरासिटामाल की डोज बच्चे के वजन के आधार पर तय होती है।
- बच्चे का वैक्सीनेशन छूट गया था, क्या उसी वैक्सीन को फिर से लगाया जा सकता है? - आशुतोष शर्मा, बर्रा, विश्व बैंक।
- इसमें चिंता की बात नहीं है। छूटा हुआ वैक्सीन एक से दो साल के अंतराल पर लग सकता है। आप अपने स्वास्थ्य केंद्र में जाकर वहां पर डाक्टर की सलाह पर फिर से वैक्सीनेशन करा सकते हैं। एक बार आप वैक्सीनेशन केंद्र पर जाकर बच्चे को लगने वाले सभी टीकाकरण की जानकारी भी हासिल कर लें।
- बच्चे को खांसी, जुकाम की समस्या रहती है? - कोमल चतुर्वेदी, गुजैनी। तुलसी राम कुशवाहा, यशोदा नगर।
- पांच साल से छोटे बच्चों में साल भर में पांच से 10 बार वायरल बुखार हो सकता है। इससे घबराए नहीं, बच्चे को बेहतर खान-पान व मौसमी फल दें। भीड़-भाड़ वाले स्थान पर ले जाने से बचें। अगर बुखार व जुकाम चार से पांच दिन से ज्यादा रहता है तो यह सामान्य है। इसमें परेशान न हो। अगर बच्चा मिट्टी खाता है तो बच्चे के शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। आप बाल रोग विभाग में दिखा लें। जहां पर जांच के बाद बच्चे की समस्या का निदान किया जाता है। अगर खांसी दो हफ्ते से ज्यादा हो रही है तो यह टीबी का लक्षण हो सकता है। इसकी जांच जरूरी है।
- मेरे नाती को खांसी, बुखार व जुकाम की समस्या थोड़ी की ठंडक में होने लगती है। क्या करें? - शिव गोपाल बाजपेई, रावतपुर गांव। जय प्रकाश तिवारी, बर्रा एक।
- बदलते मौसम में ऐसा हो सकता है, आप एक बार बाल रोग विभाग की ओपीडी में दिखा लें। बार-बार खांसी होने की समस्या एलर्जिक अस्थमा हो सकती है। इसमें जांच कराए और संपूर्ण इलाज की व्यवस्था है।अस्थमा के इलाज की बेहतर दवा हैं, जिसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। इसमें डाक्टर की सलाह पर इलाज कराएं। सर्दी, जुकाम व बुखार से बचाव के लिए सुबह-शाम की ठंड से बचें। आइसक्रीम व ठंडी कोल्डड्रिंक का सेवन करने से बचें।
- चिकनपाक्स से बचाव के लिए क्या करें। इस रोग की पहचान कैसे की जाती है? - पूजा अग्रवाल, जरौली।
- चिकनपाक्स में बुखार के साथ पेट के भाग से छोटे-छोटे लाल पानी वाले दाने होने लगते हैं। जो पूरे शरीर में फैलते हैं। इसमें बुखार के साथ थकान की समस्या रहती है। बचाव के लिए स्वच्छता का ख्याल रखें, जिस बच्चे को चिकनपाक्स हुआ है, उसे घर में आइसोलेट करें। खाने में हल्का व सुपाच्य भोजन देना चाहिए। अक्सर लोग इसे बड़ी माता व छोटी माता मानकर इलाज नहीं करते हैं यह खतरनाक हो सकता है।
- बच्चों को स्क्रीन टाइम से दूर रखने के लिए क्या करें। क्या यह बच्चों में बीमारी का कारण बन सकता है? - अर्चना देवी, नेहरू नगर।
- बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास में बाधक हो सकता है। नेत्र रोग और मनोरोग विभाग में पहुंच रहे बच्चों की हिस्ट्री में स्क्रीन टाइम मुख्य कारण बन रहा है। बचाव के लिए बच्चों को घर के बाद बने खेल मैदान तक खुद लेकर जाएं। उनसे संवाद करें और उनके साथ खेले। जब बच्चा मां और परिवार के अन्य सदस्यों को मोबाइल में मशगूल देखेगा तो खुद भी मोबाइल थमा लेगा। इसलिए बच्चों की लत छुड़ाने के लिए खुद प्रयास करें।
- डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए क्या करें, बच्चों में इसका खतरा ज्यादा रहता है क्या? - पुष्पा शुक्ला, लालबंगला।
- बच्चों व बुजुर्ग में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से डेंगू-मलेरिया का खतरा ज्यादा रहता है। बचाव के लिए बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाएं, मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें। रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर करने के लिए खान-पान, शारीरिक गतिविधि को बेहतर करें।
- ठंड के मौसम में गले में खरास की समस्या हो जाती है। इससे कैसे बचाव करें? - रोहित प्रजापति, सनिगवां।
- मौसम में बदलाव के कारण वातावरण में प्रदूषण भी बढ़ने लगता है। धूल के कण व अन्य कारणों से गले में खरास की समस्या के मामले इन दिनों बढ़ जाते हैं। आप एक बार ओपीडी में दिखा लें। खरास के साथ अगर खांसी और बलगम की समस्या है तो इसका खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बदलते मौसम में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर डाक्टर को जरूर दिखाएं।
बच्चों की सेहत के लिए इन बातों का रखें ख्याल
- मौसमी फल का सेवन करें।
- पर्याप्त नींद लें।
- सर्दी-जुकाम व भीड़भाड़ वाले स्थान पर बच्चों को लेकर जाने से बचें।
- चिकनपाक्स के लक्षण वाले बच्चे को घर में आइसोलेट करें।
इन्होंने किए प्रश्न
शिवम, मंधना। अलका द्विवेदी, पी रोड। मंजुला त्रिपाठी। सुषमा शुक्ला, अफीम कोठी। श्याम देवी, सर्वोदय नगर। आरती शुक्ला, पांडुनगर। पुष्पा द्विवेदी, बिठूर।
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