विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

CBI-ED अधिकारी बनकर डॉक्टर को किया डिजिटल अरेस्ट, ठगे 48 लाख, कानपुर पुलिस ने बिहार से आरोपित को दबोचा

Published: Sun, 01 Nov 2026 04:40 PM (IST)

कानपुर के एक डॉक्टर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 48 लाख रुपये ठगने के मामले में बिहार से एक ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. कानपुर डॉक्टर से डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख ठगे

  2. बिहार से आरोपी राजीव रंजन गिरफ्तार, तीन मोबाइल बरामद

  3. फर्जी फर्म से देशभर में 1.42 करोड़ की साइबर ठगी

जागरण संवाददाता, कानपुर। स्वरूप नगर के वरिष्ठ चिकित्सक को डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया। ईडी और सीबीआई अधिकारी बनकर डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट करके ठगी को अंजाम दिया गया। मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने आरोपित को बिहार के सहरसा से गिरफ्तार किया है।

आरोपित की पहचान बिहार के सहरसा सलखुआ निवासी राजीव रंजन के रूप में हुई है। पुलिस की जांच में सामने आया कि डाक्टर से ठगी गई करीब 48 लाख रुपये की रकम आरोपित के बैंक खाते में पहुंची थी। पुलिस ने उसके पास से तीन एंड्रायड मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।

स्वरूप नगर निवासी डा.योगेश चंद्र मिश्रा को साइबर ठगों ने फोन किया था। आरोपितों ने पहले खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का वरिष्ठ अधिकारी बताया। इसके बाद काल दूसरे साथी को ट्रांसफर कर दिया, जिसने खुद को सीबीआइ अधिकारी बताया। ठगों ने डाक्टर को गंभीर आपराधिक और वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच के दायरे में होने की बात कहकर डराया।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें लगातार मानसिक दबाव में रखा। साथ ही किसी से संपर्क न करने और पुलिस को जानकारी नहीं देने की हिदायत दी। इस तरह डिजिटल अरेस्ट के नाम पर उनसे करीब 48 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए थे। मामले में पुलिस तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेज चुकी है।

पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों की जांच के आधार पर इससे पहले नवाबगंज निवासी वासु,रायबरेली के आतिश कुमार और कैंट के कंचन प्रजापति निवासी को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि आरोपितों ने आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत अन्य दस्तावेजों में कूटरचना कर खुद को प्रतापगढ़ का निवासी दर्शाया था।

इसके बाद बाउकोयो कांक्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्जी फर्म तैयार कर उसके नाम पर बैंक खाता खुलवाया गया। इस खाते में 15 ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 25.98 लाख रुपये आए, जिन्हें आगे 611 ट्रांजेक्शन के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में भेजा गया।

चार राज्यों की शिकायतों में सामने आए 1.42 करोड़

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों के मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच में पता चला कि इन खातों का इस्तेमाल केवल शहर की घटना में ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों में भी साइबर ठगी के लिए किया गया। एनसीआरपी पोर्टल पर जांच के दौरान उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत विभिन्न स्थानों से जुड़ी चार साइबर अपराध शिकायतें सामने आईं। इनमें करीब 1.42 करोड़ 68 हजार रुपये की ठगी से संबंधित धनराशि का विवरण मिला है। पुलिस की जांच में कानपुर के मुकुल चौबे को भी वांछित किया गया है उसकी तलाश की जा रही है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।