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कानपुर में डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार का प्रकोप, मेडिकल कालेज की डॉक्टर प्रो. रिचा गिरि की सलाह से करें बचाव

Published: Sat, 19 Sep 2026 06:41 PM (IST)

कानपुर के सरकारी अस्पतालों में डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ...और पढ़ें

दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देतीं जीएसवीएम मेडिकल कालेज की उप प्राचार्य प्रो.रिचा गिरि । जागरण

दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देतीं जीएसवीएम मेडिकल कालेज की उप प्राचार्य प्रो.रिचा गिरि । जागरण

HighLights

  1. सरकारी अस्पतालों में डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार के मरीज बढ़े

  2. प्रो. रिचा गिरि ने लक्षणों पर सतर्कता, डॉक्टरी सलाह पर जोर दिया

  3. मच्छर जनित रोगों से बचाव हेतु स्वच्छता व सावधानी बरतें

जागरण संवाददाता, कानपुर। डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार के मरीजों से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी भरी है। हर दिन मच्छर जनित रोग, गैस्ट्रोएंटेराइटिस (उल्टी-दस्त), सर्दी-जुकाम, फ्लू और वायरल बुखार के 200 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। बच्चे, बुजुर्ग व हर आयुवर्ग के मरीजों गंभीर लक्षणों के साथ डाक्टर के पास पहुंच रहे हैं। यह बातें दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज की उप प्राचार्य व मेडिसिन विभाग की प्रो. रिचा गिरि ने पाठकों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कही। उन्होंने डेंगू-मलेरिया व वायरल फ्लू के लक्षण दिखने पर सतर्कता बरतने व डाक्टर की सलाह पर ही दवा लेने के लिए जागरूक किया। पेश है पाठकों से बातचीत के मुख्य अंश...

 

  • वायरल बुखार आया था एक सप्ताह पहले, अब कमजोरी व शरीर में दर्द अधिक है? - उमेश गुप्ता, यशोदा नगर।
  • वायरल बुखार के बाद कमजोरी, पैरों में दर्द, थकान की समस्या आम है। खाने में स्वाद भी नहीं आएगा। वायरल बुखार शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है। गट हेल्थ के साथ लिवर की समस्या भी करता है। इसलिए आप एक बार एलएलआर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में दिखा लें। शरीर में तरल पदार्थ की कमी न होने दें।

 

  • डेंगू के क्या लक्षण होते हैं। कैसे पहचाने डेंगू हुआ है? - अलका द्विवेदी, पी रोड। रतन कुमार गुप्ता, मंगला विहार।
  • डेंगू वायरल संक्रमण है, इसमें जुकाम, बुखार के साथ शरीर में चकत्ते पड़ सकते हैं। कई मामलों में डायरिया, उल्टी दस्त के साथ भी सामने आता है। इस प्रकार के लक्षण दिखने पर डाक्टर की सलाह पर दवा जरूर लें। डेंगू की अनदेखी से प्लेटलेट्स कम होने का खतरा बना रहता है। जो अस्पताल तक पहुंचा सकता है। बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें, मच्छरदानी लगाए। लार्वा पैदा होने वाले जलभराव वाले स्थान से दूर रहें। घर के गमले, कूलर में पानी न एकत्र न होने दें। डेंगू का मच्छर दिन में ही काटता है। अगर बीपी के मरीज हैं, तो सिर दर्द व भारीपन की समस्या हो सकती है। इसलिए अपने डाक्टर को दिखाकर एक बार आंख की जांच भी करा लें।

 

  • बुजुर्ग में उल्टी, दस्त का खतरा इस मौसम में बढ़ रहा है। कैसे बचाए? - अफसार अहमद, विजय नगर।
  • उल्टी, दस्त व गट हेल्थ के लिए बासी खाना व बाजार में बिकने वाला खाना व पेय जिम्मेदार है। इसलिए बुजुर्ग व बच्चों को घर पर ही बना खाना दें। खुले में बिकने वाले जूस देने से बचें। उल्टी दस्त आने पर ओआरएस घोल पिए। ताकि शरीर में पानी की कमी न हो सके और किडनी सुरक्षित रहें।

 

  • बच्चों को डेंगू, मलेरिया व स्वाइन फ्लू से कैसे बचाए? - इति, पांडुनगर। दीप्ति द्विवेदी, पनकी। माया रावत, नानकारी।
  • बच्चों को बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनाएं। घर की छत पर पानी एकत्र होने वाले समान को हटा दें। जलभराव वाले स्थान पर जाने से बचाएं। डेंगू का मच्छर दिन में काटता है। बच्चों में उल्टी, दस्त व डायरिया के लक्षण दिखने पर डाक्टरी सलाह लें। आंखों के पीछे दर्द को अनदेखा नहीं करना चाहिए। यह डेंगू का गंभीर लक्षण है। बच्चों में अगर बुखार 100 से ज्यादा रात के समय जा रहा है तो अलर्ट हो जाए और डाक्टर को जरूर दिखाएं।

 

  • बाढ़ ग्रसित क्षेत्रों में जलभराव के बाद होने वाली बीमारियों से कैसे बचाए? - जय प्रकाश साहू, आजाद नगर।
  • ऐसे क्षेत्रों में दूषित पानी पीने से बीमारी का खतरा हो सकता है। वायरल व बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। बचाव के लिए पानी को उबाल कर ही प्रयोग करें। शुद्ध खाना खाएं और बासी व बाजार में बिकने वाले भोजन से परहेज करें। यह बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं।

 

  • सात साल की बेटी को सर्दी हो गई है, घरेलू इलाज कर सकते हैं क्या? - विवेक जायसवाल, फूलबाग।
  • बिल्कुल नहीं, बच्चों में खांसी, बुखार व जुकाम होने पर घरेलू इलाज से बचें। बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाए।घरेलू इलाज से बच्चों में गंभीरता बढ़ जाती है। वायरल व स्वाइन फ्लू शरीर के अन्य अंगों पर भी दुष्प्रभाव डालता है। जो जानलेवा हो सकता है।

 

  • मलेरिया होने पर क्या करना चाहिए। इसकी पहचान कैसे करें?- धर्मेंद्र सिंह, भाऊपुर। निर्मल सिंह, अन्ना चौराहा।
  • मलेरिया का बुखार तेज होता है। मलेरिया, लिवर व गुर्दा की बीमारी का कारण बनता है। दिमाग तक पहुंच सकता है। इसलिए इस बुखार की अनदेखी नहीं करें। तेज बुखार होने पर मलेरिया की जांच जरूर कराएं। डाक्टरी सलाह पर ही दवा लें। कमजोरी होने पर तरल पदार्थ अधिक लें, नारियल पानी का सेवन करें। घर में बना जूस, सूप का सेवन करें।

 

  • डेंगू व फ्लू के लक्षण क्या एक जैसे होते हैं? - शिल्पी सिंह, बर्रा।
  • फ्लू में बुखार, जुकाम व आंखों के पीछे सिर दर्द होता है। डेंगू के लक्षण भी ऐसे ही होते हैं, अगर शरीर में चकत्ते दिख रहे हैं तो यह डेंगू हो सकता है। फ्लू व डेंगू से बचाव के लिए जांच जरूर कराए। स्वाइन फ्लू फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। डेंगू, लिवर, गुर्दा व दिमाग को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए लक्षण दिखने पर डाक्टर को जरूर दिखाए। लक्षणों की अनदेखी व खुद से इलाज करने से बचें।


इन्होंने किए प्रश्न

शिवगोपाल बाजपेई, रावतपुर गांव। जय प्रकाश तिवारी, बर्रा एक। राम प्रकाश। भुवन जोशी, बर्रा विश्व बैंक। डा. रफीक अहमद, बेकनगंज। अर्चना बाजपेयी, पशुपति नगर।

ऐसे करें बचाव

  • भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने पर मास्क लगाए।
  • बुखार व सांस लेने में दिक्कत पर डाक्टर को दिखाए।
  • मच्छर से बचाव के लिए मच्छरदानी लगाए।
  • घर के कूलर, गमले व छतों पर जलभराव नहीं होने दें।
  • लार्वा पनपने वाले पानी को हटा दें।
  • डेंगू का मच्छर दिन में काटता है, इसलिए पूरी बांह के कपड़े पहनें।
  • खाना ताजा खाए, पानी को उबाल कर ही पिएं।

 

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