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कानपुर में बिगड़ी हवा की सेहत, नेहरू नगर में AQI 230 पहुंचा

Published: Wed, 04 Nov 2026 10:05 PM (IST)

कानपुर में मौसम बदलने के साथ ही हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है, नेहरू नगर में एक्यूआइ 230 तक पहुंच ...और पढ़ें

ग्रीन पार्क स्टेडियम में छाई स्मॉग। जागरण

ग्रीन पार्क स्टेडियम में छाई स्मॉग। जागरण

HighLights

  1. नेहरू नगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 230 दर्ज।

  2. कानपुर का औसत AQI 185, मध्यम श्रेणी में।

  3. अस्थमा, हृदय रोगियों के लिए बढ़ा स्वास्थ्य जोखिम।

जागरण संवाददाता, कानपुर। मौसम में बदलाव के साथ शहर की हवा की सेहत भी बिगड़ने लगी है। सुबह और शाम के वक्त लोगों को हवा में घुटन महसूस होने लगी है। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही और वातावरण में बढ़ते प्रदूषण के बीच सांस लेना मुश्किल हो रहा है। सुबह की सैर पर निकलने वाले लोगों को भी अब स्वच्छ हवा के बजाय प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। शाम ढलते ही कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता और खराब महसूस होने लगती है। अस्थमा, सांस और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति अधिक परेशानी बढ़ाने वाली है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण के तीन प्रदूषण मापक स्टेशनों में दो दिनों का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) चार नवंबर को रात आठ बजकर पांच मिनट पर जिले का औसत एक्यूआई 185 दर्ज था, यह मध्यम श्रेणी में है, लेकिन शहर के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग तस्वीर रही। नेहरू नगर में एक्यूआई 230 पहुंच गया, जो खराब श्रेणी में आता है। वहीं एफटीआइ किदवई नगर में 179 और एनएसआइ कल्याणपुर में 147 दर्ज किया गया। इससे साफ है कि शहर के कुछ हिस्सों में प्रदूषण का स्तर औसत से काफी अधिक है।

तीन दिनों में हवा की गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव

एयर क्वालिटी इंडेक्स में एक नवंबर को कार्बन मोनोआक्साइड (सीओ) का स्तर 47 दर्ज किया गया था। दो नवंबर को पीएम 2.5 का स्तर 108 रहा, जबकि तीन नवंबर को इसमें तेजी से वृद्धि हुई और यह 246 तक पहुंच गया। चार नवंबर को पीएम 10 का स्तर 189 दर्ज किया गया। लगातार बदलते इन आंकड़ों ने हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि तीन नवंबर को पीएम 2.5 का स्तर 246 तक पहुंचने से वातावरण में महीन कणों की मौजूदगी अधिक रही।

फेफड़ों और हृदय रोगियों को अधिक खतरा

वायु गुणवत्ता सूचकांक की मध्यम श्रेणी में भी संवेदनशील लोगों को परेशानी हो सकती है। वहीं नेहरू नगर जैसे इलाकों में एक्यूआइ 230 होने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाता है। मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय के वरिष्ठ चेस्ट रोग विशेषज्ञ डा.संजय ने बताया कि प्रदूषित हवा में मौजूद महीन कण सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। इससे अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी और सीने में जकड़न की समस्या हो सकती है।

हृदय रोगियों और बुजुर्गों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। बच्चों पर भी प्रदूषण का असर पड़ सकता है। सुबह और शाम के समय बाहर व्यायाम करने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। विशेषकर सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को प्रदूषण अधिक होने पर खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

मौसम में बदलाव के साथ ही यह परिवर्तन होता है। धूल नियंत्रण के लिए नगर निगम के द्वारा पानी का छिड़काव किया जा रहा है, इसके साथ ही सभी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की निगरानी बढ़ाई गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों को नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी।
अजीत कुमार सुमन,क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

 

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