बैंक, शेयर, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी... हर बड़े लेन-देन की खबर आयकर को, Income Tax AI से खुल रहा आपका वित्तीय राज
आयकर विभाग का एआइ टूल अब आपके हर बड़े लेन-देन पर नजर रख रहा है, जिससे वित्तीय जानकारी छिपाना मुश्किल ...और पढ़ें

यह एक प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
आयकर की नजर से नहीं बचेंगे बड़े खर्च और निवेश, जांच के मामले 272 प्रतिशत बढ़े
वित्त वर्ष 2025-26 में 1.66 लाख मामले जांच के लिए चुने गए, पिछले साल 44,655 थे
बैंक, शेयर, म्यूचुअल फंड और प्रापर्टी से तैयार हो रहा करदाताओं का डिजिटल वित्तीय प्रोफाइल
अखिलेश तिवारी, कानपुर। आपने सालभर में कितना कमाया, कहां खर्च किया। आयकर विभाग का एआई टूल (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट इनसाइड व डाटा एनालिटिक्स ) इसकी चुगली कर रहा है। आपके हर बड़े लेन -देन की आयकर विभाग को हर रोज जानकारी मिल रही है। ऐसे में अब आय संबंधित सूचना को छुपाना भारी पड़ सकता है। आयकर विभाग की ओर से हर महीने सैकड़ों की तादाद में नोटिस भेजे जा रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले अब तक 271 प्रतिशत अधिक नोटिस भेजी जा चुकी हैं।
अब आयकर रिटर्न में क्या दिखाया गया है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह हो गया है कि करदाता ने वास्तव में सालभर में कितना खर्च और निवेश किया। आयकर विभाग के डिजिटल सिस्टम में बैंक, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, संपत्ति और अन्य बड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी पहुंच रही है। इसी डेटा का आयकर रिटर्न में घोषित आय से मिलान कर संदिग्ध मामलों को जांच के लिए चुना जा रहा है। इसका असर जांच के बढ़ते दायरे से भी साफ दिखाई दे रहा है।
बड़े लेनदेन पर नजर
आयकर विभाग की निगाह अब करदाताओं के हर बड़े लेनदेन पर नजर है। आयकर विभाग अपने प्रोजेक्ट इनसाइट, एआईएस, एसएफटी और डाटा एनालिटिक्स के माध्यम से लेन - देन संबंधी सूचनाओं का विश्लेषण कर करदाताओं की महत्वपूर्ण वित्तीय गतिविधियों की पहचान कर रहा है।
क्रेडिट कार्ड भुगतान की भी नहीं मिल रही खबर
निर्धारित नियमों के अनुसार 30 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री की सूचना आयकर विभाग को रिपोर्ट किए जाने की व्यवस्था है लेकिन एक वित्तीय वर्ष में एक लाख रुपये या अधिक के नकद या क्रेडिट कार्ड भुगतान की खबर भी आयकर विभाग तक पहुंच रही है। 10 लाख रुपये या अधिक के भुगतान की सूचना भी मिल रही है।
मामलों में 271.7 प्रतिशत की छलांग
सरकार की ओर से 24 मार्च 2026 को संसद में दिए गए जवाब के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में सीएएसएस (कंप्यूटर असिस्टेड स्क्रूटिनी सिलेक्शन) के तहत 1,65,974 मामले जांच के लिए चुने गए। वित्त वर्ष 2024-25 में ऐसे मामलों की संख्या 44,655 थी। यानी एक साल में जांच के लिए चुने गए मामलों में 271.7 प्रतिशत की छलांग लगी है। इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में 68,207 और 2022-23 में 20,172 मामले सीएएसएस के तहत चुने गए थे।
कानपुर की कार्रवाइयों ने भी दिखाई निगरानी की तस्वीर
कानपुर में पिछले वर्ष हुई आयकर विभाग की कार्रवाइयां भी बताती हैं कि बड़े कारोबार, संपत्ति और वित्तीय लेनदेन पर विभाग की निगरानी कितनी व्यापक हो चुकी है। पान मसाला कारोबार से जुड़े एक समूह के कानपुर समेत कई शहरों में ठिकानों पर फरवरी 2025 में आयकर विभाग ने तलाशी अभियान चलाया था। इसके बाद रजिस्ट्री कार्यालय से जुड़े मामलों की जांच में भी संपत्ति के लेनदेन को लेकर विभाग की सक्रियता सामने आई। बांदा में खनन मामलों में भी कार्रवाई हो चुकी है।
क्या है प्रोजेक्ट इनसाइट
आयकर विभाग का डाटा वेयरहाउसिंग एवं बिजनेस इंटेलीजेंस प्लेटफार्म है। इसके माध्यम से विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं को एकीकृत कर विश्लेषण और रिस्क आकलन में इस्तेमाल किया जाता है। विभाग ने इसके अगले चरण इनसाइट 2.0 भी शुरू किया है। जिसमें एडवांस्ड एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। करदाताओं के कई वित्तीय लेनदेन की जानकारी एन्यूल इंफार्मेशन सिस्टम (एआईएस), स्टेटमेंट आफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस (एसएफटी) और अन्य थर्ड पार्टी इंफार्मेशन माध्यम से जुटाई जा रही है। इनमें बैंकों तथा अन्य संस्थाओं की रिपोर्ट शामिल है।
इन कंपनियों पर भी कार्रवाई
बांदा में खनन से जुड़े लोगों पर आयकर विभाग की कार्रवाई का आधार भी एआई टूल से मिला डाटा ही था। जिससे कार्रवाई से पहले ही लेन -देन के प्रमाण जुटाए जा सके थे। कानपुर देहात और आगरा में मिल्क प्रोडक्ट व देशी घी उत्पादक कंपनी पर भी कार्रवाई की गई थी। आयकर विभाग की टीमों ने कानपुर और कानपुर देहात में रजिस्ट्री से जुड़े हजारों मामले पकड़े हैं जिनकी जांच जारी है। पान मसाला कंपनी पर भी बड़ी कार्रवाई हो चुकी है।
अब आयकर अनुपालन केवल पुस्तकों और बैंक स्टेटमेंट तक सीमित नहीं रह गया है। करदाता के पास भी अपने लेन-देन की पूरी जानकारी है और इसे आइटीआर दाखिल करते समय ही चेक कर लेना चाहिए।
- अखिलेश तिवारी पूर्व अध्यक्ष, कानपुर चार्टर्ड अकाउंटेंट सोसायटी
बड़ा खर्च या निवेश करना अपने आप में गलत नहीं है। समस्या तब पैदा होती है जब खर्च और निवेश की रकम का स्रोत घोषित आय से मेल नहीं खाता या उसके समर्थन में दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते।
- एडवोकेट संतोष कुमार गुप्ता
यह भी पढ़ें- यूपी में भाजपा ने साधे कई समीकरण, मोदी के साथ गदर फिल्म देखने वाले कानपुर के गोपी कृष्णा पांडेय को राज्यसभा का टिकट
