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सौर ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, IIT Kanpur बनाएगा देश का पहला सन सिम्युलेटर

Published: Wed, 30 Sep 2026 11:15 PM (IST)

आईआईटी कानपुर बेंगलुरु की नेक्स्पीवी एनर्जी सिस्टम्स के साथ मिलकर भारत का पहला सन सिम्युलेटर बनाएगा। यह सिम्युलेटर केंद्रित फोटोवोल्टिक ...और पढ़ें

सन सिम्युलेटर बनाने के प्रोजेक्ट के लिए बेंगलुरु की कंपनी नेक्स्पीवी एनर्जी सिस्टम्स निदेशक चिदानंद मूर्ति आर (दाएं) एमओयू को दिखाते हुए। साथ में मौजूद आइआइटी के विज्ञानी व अन्य विशेषज्ञ (बाएं)। संस्थान

सन सिम्युलेटर बनाने के प्रोजेक्ट के लिए बेंगलुरु की कंपनी नेक्स्पीवी एनर्जी सिस्टम्स निदेशक चिदानंद मूर्ति आर (दाएं) एमओयू को दिखाते हुए। साथ में मौजूद आइआइटी के विज्ञानी व अन्य विशेषज्ञ (बाएं)। संस्थान 

HighLights

  1. संस्थान ने नेक्स्पीवी एनर्जी सिस्टम्स के साथ किया एमओयू, सोलर सेल का उत्पादन बढ़ाने पर जोर

  2. वर्ष 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने के लिए सौर ऊर्जा को बड़े पैमाने पर अपनाना होगा

जागरण संवाददाता, कानपुर। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत जल्द ही सन सिम्युलेटर बनाने वाला देश बनेगा। इसके लिए आइआइटी ने बेंगलुरु की कंपनी नेक्स्पीवी एनर्जी सिस्टम्स के साथ एमओयू किया है। संस्थान में स्थित रिसर्च एंड टेक्नोलाजी पार्क फाउंडेशन (टेक्नोपार्क) की सदस्य कंपनी इंवैरिएंस आटोमेशन ने सहयोग किया।

सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. आशीष गर्ग व उनकी टीम परियोजना का नेतृत्व कर रही है। सन सिम्युलेटर का उपयोग केंद्रित फोटोवोल्टिक (सीपीवी) सिस्टम की जांच के लिए होगा। इसके माध्यम से देश में ही सीपीवी माड्यूल की अंतिम चरण में टेस्टिंग के साथ क्षमता का आकलन हो सकेगा और विदेश पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी।

नेक्सपीवी एनर्जी सिस्टम्स के निदेशक चिदानंद मूर्ति आर ने बताया कि देश में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 168 गीगावाट को पार कर गई है, लेकिन सोलर सेल का उत्पादन अभी तक माड्यूल की तुलना में बहुत कम है। प्रो. आशीष गर्ग ने कहा कि सीपीवी माड्यूल केवल सीधी व समानांतर रोशनी में काम करते हैं।

आइआइटी कानपुर की टीम ऐसा सिम्युलेटर तैयार करेगी, जो इन परिस्थितियों को सटीक रूप से बनाएगा। आगे इंवैरिएंस आटोमेशन इस प्रोटोटाइप से प्रोडक्शन स्तर तक ले जाएगी।

सीपीवी सिस्टम में लेंस की मदद से सूर्य की रोशनी को छोटे और अधिक क्षमता वाले सेलों पर केंद्रित किया जाता है। इन सेलों में अर्धचालक की कई परतें एक के ऊपर एक होती हैं। हर परत सूर्य के प्रकाश के अलग-अलग हिस्से को ग्रहण करती है। ये सेल पैनल के केवल 0.1 प्रतिशत हिस्से में होते हैं, जिससे सामान्य सौर पैनलों की तुलना में 99 प्रतिशत कम जगह की जरूरत पड़ती है।

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