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IIT Kanpur का सबसे बड़ा अभियान: डीप-टेक, एआई और क्वांटम रिसर्च को मिलेगी रफ्तार, लैब से निकलेंगे भविष्य के उद्यमी

Published: Thu, 15 Oct 2026 06:09 AM (IST)

आईआईटी कानपुर ने भारत मंडपम में 'ग्रेटर दैन अस' अभियान शुरू किया, जिसका लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब डॉलर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. आईआईटी कानपुर ने भारत मंडपम में 1 बिलियन डॉलर अभियान शुरू किया।

  2. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर तकनीक विकास पर जोर दिया।

  3. नोएडा में जी-साइन डीप-टेक उद्यमियों को तैयार करेगा।

जागरण संवाददाता, कानपुर। आईआईटी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में अपने इतिहास का सबसे बड़ा धन-संग्रह अभियान शुरू किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान का शुभारंभ किया। संस्थान ने मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डालर जुटाने का लक्ष्य रखा है।

दावा है कि किसी भी आईआईटी द्वारा शुरू किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा अभियान है। इसके कुल लक्ष्य का लगभग आधा हिस्सा, यानी 4,155 करोड़ रुपये पूर्व छात्रों, दानदाताओं, कारपोरेट भागीदारों और सरकार की ओर से दिए जाने की प्रतिबद्धता पहले ही जताई जा चुकी है।


अभियान के शुभारंभ पर रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अपने भविष्य को परिभाषित करने वाली प्रौद्योगिकियों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता। हमें इन तकनीकों का विकास स्वयं करना होगा। भविष्य की डीप-टेक कंपनियां केवल गैरेज में नहीं, बल्कि प्रयोगशालाओं में भी जन्म लेंगी। इस दिशा में जी-साइन ऐसे उद्यमियों को तैयार करेगा, जो इन कंपनियों और नवाचारों का नेतृत्व करेंगे।

समारोह में कानपुर स्थित आईआईटी के पूर्व छात्र राहुल गौतम ने एमओयू किया। उन्होंने संस्थान के नोएडा परिसर में गौतम स्कूल आफ इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (जी-साइन) की स्थापना के लिए 180 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई है। जी-साइन का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य, जैव प्रौद्योगिकी, ड्रोन और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों के लिए तकनीक आधारित उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करना है।

इसमें पूर्णकालिक संकाय और डिग्री कार्यक्रम होंगे। शुरुआत जुलाई 2027 में प्रौद्योगिकी एवं उद्यमिता में एमबीए के प्रमुख कार्यक्रम से प्रस्तावित है। नोएडा में प्रस्तावित डीप टेक हब के साथ मिलकर जी-साइन विद्यार्थियों को अत्याधुनिक सुविधाएं देगा, जिससे शोध व्यावहारिक उत्पादों में बदलेगा। इसे स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआइआइसी) का सहयोग मिलेगा, जिसके तहत अब तक 571 स्टार्टअप्स इनक्यूबेट हो चुके हैं।

फ्रंटियर स्तंभ का उद्देश्य बुनियादी अनुसंधान को वास्तविक उपयोग से जोड़ना है। इसके प्रमुख क्षेत्र एआइ, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, मेडिकल टेक्नालाजी और सस्टैनबिलिटी हैं। इसके लिए 1000 करोड़ का लक्ष्य था, जिसे पार करते हुए 1556 करोड़ की प्रतिबद्धता मिल चुकी है।

प्रत्येक पात्र विद्यार्थियों को मिलेगी छात्रवृत्ति व डाक्टरेट फेलोशिप 

इस पहल के तहत छात्रवृत्तियों और अधिक डाक्टरेट फेलोशिप के माध्यम से सहायता दी जाएगी। उद्देश्य प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को वित्तीय सहायता देना है। फैकल्टी चेयर्स, युवा संकाय फेलोशिप और ग्लोबल विजिटिंग फैकल्टी कार्यक्रम से उत्कृष्ट शिक्षकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। संस्थान ने गंगवाल स्कूल में मार्केट लिंक्ड फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया अपनाई है, जिसमें 150 पदों पर भर्ती की योजना है। हैकाथान और ओलंपियाड के माध्यम से छात्रों को प्रवेश के नए अवसर भी दिए गए हैं। छात्र उद्यमिता कार्यक्रम के तहत रक्षा एवं एयरोस्पेस, मेडटेक, क्लीनटेक और एग्रीटेक में युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।


आईआईटी जिस भविष्य के निर्माण का संकल्प ले रहा है, वह हममें से किसी भी एक व्यक्ति से कहीं बड़ा है। यह उन युवा भारतीयों में निवेश है, जो देश का भविष्य गढ़ेंगे। हमारे लक्ष्य की लगभग आधी राशि की प्रतिबद्धता अभियान की औपचारिक घोषणा से पहले ही प्राप्त हो गई थी। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे दानदाताओं को संस्थान की कार्यप्रणाली और उज्ज्वल भविष्य पर विश्वास है।
प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, निदेशक, आईआईटी।

 

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