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IIT Kanpur का कमाल, धमनियों में कोलेस्ट्राल का कितना है जमाव, प्रारंभिक स्तर पर बता देगा बायोसेंसर

Published: Sun, 09 Aug 2026 09:57 PM (IST)

आईआईटी कानपुर के शोधार्थी तमोजित सांतरा ने हृदय रोगियों के लिए दो महत्वपूर्ण अनुसंधान किए हैं। उन्होंने एथेरोस्क्लेरोसिस की शुरुआती ...और पढ़ें

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HighLights

  1. आईआईटी कानपुर के शोधार्थी ने दो हृदय अनुसंधान किए।

  2. एथेरोस्क्लेरोसिस की शुरुआती पहचान को बायोसेंसर बनाया।

  3. प्राकृतिक पदार्थों से बायोडिग्रेडेबल स्टेंट विकसित कर रहे हैं।

जागरण संवाददाता, कानपुर। आईआईटी के मेहता फैमिली सेंटर फार इंजीनियरिंग इन मेडिसिन के पीएचडी शोधार्थी तमोजित सांतरा ने हृदय रोगियों के उपचार की दिशा में दो उपयोगी अनुसंधान किए हैं। एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में कोलेस्ट्राल का जमाव) की पहचान करने के लिए उन्होंने बायोसेंसर तैयार किया है जो प्रारंभिक अवस्था में ही समस्या की पहचान कर लेगा। इसी तरह प्राकृतिक पदार्थों से बना बायोडिग्रेडेबल स्टेंट विकसित कर रहे हैं जो शरीर में अपने आप घुल जाएगा। उनके बायोसेंसर को भारत सरकार का पेटेंट भी मिल चुका है।


हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों में से एक एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में कोलेस्ट्राल का जमाव) के बारे में चिकित्सकों का कहना है कि यह लंबे समय तक बिना लक्षण के बढ़ती रहती है। जब बीमारी के लक्षण सामने आते हैं तब काफी देर हो चुकी होती है। आईआईटी के बायोसाइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संतोष के. मिश्रा के मार्गदर्शन में काम कर रहे तमोजित सांतरा ने इसी समस्या का समाधान तलाशा है।

उन्होंने एक ऐसा पालीमेरिक बायोसेंसर विकसित किया है जो रक्त की कुछ बूंद से ही कोलेस्ट्राल जमाव की शुरुआती अवस्था को पहचान लेने में सक्षम है। अभी तक जो तकनीक या सेंसर उपलब्ध हैं वह केवल बीमारी के अंतिम चरण, जैसे हार्ट अटैक या रक्त के थक्के बनने के बाद की अवस्था की जांच करते हें। बायोसेंसर को पेटेंट मिल गया है और इसकी लागत कम रखने के साथ ही अब बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए कंपनियों से चर्चा की जा रही है।

ह्दय में पड़ा स्टंट स्वयं घुल जाएगा

बायोसेंसर के साथ ही तमोजित अब एक बायोडिग्रेडेबल (जैव-विघटित होने वाला) 3डी-प्रिंटेड स्टेंट के विकास पर काम कर रहे हें। आईआईटी से मिली जानकारी के अनुसार यह स्टेंट बाजार में उपलब्ध धातु के स्टेंट का विकल्प होगा। ऐसे स्टेंट शरीर में स्थाई रूप से बने रहते हैं। जब यह काम नहीं करते हैं तब भी शरीर में रहकर नई समस्या उत्पन्न करते हैं। प्राकृतिक पदार्थों से बना आईआईटी का बायोडिग्रेडेबल स्टेंट शरीर में धीरे-धीरे घुल जाएगा। इस स्टेंट को रोगियों की आवश्यकता के अनुसार डिजाइन और आकार (कस्टमाइज्ड) दिया जा सकेगा। इसका परीक्षण भी आईआईटी में पशु माडल पर किया जा रहा है। इस शोध कार्य में संस्थान के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग और अन्य शोध केंद्रों का सहयोग शामिल है।

यूनिवर्सिटी टापर व गोल्ड मेडलिस्ट हैं तमोजित

कोलकाता में पले-बढ़े तमोजित के पिता शिक्षक थे। जीवविज्ञान के प्रति रूझान उन्हें अपने परिवार से ही मिला। एसआरएम इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी, चेन्नई के बायोटेक्नोलाजी - बीटेक यूनिवर्सिटी टापर और गोल्ड मेडलिस्ट रहे तमोजित ने जादवपुर विश्वविद्यालय से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में एमई किया। यह दोनों अनुसंधान कार्य वह प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप के तहत कर रहे हैं। चार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं और तीन पुरस्कार भी मिले हैं। जिनमें प्रतिष्ठित थर्मो फिशर साइंटिफिक अवार्ड शामिल है।

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