कानपुर में रेंट एग्रीमेंट पर छूट का दायरा फिर बढ़ा, किरायेदारी की लिखा-पढ़ी पर फिर लीजिए छूट, जानिए रजिस्ट्री शुल्क
कानपुर में किरायेदारी की लिखा-पढ़ी पर एक बार फिर छूट दी जा रही है, जिससे लोगों को काफी राहत मिलेगी। ...और पढ़ें

HighLights
कानपुर में रेंट एग्रीमेंट पंजीकरण पर फिर छूट
शुल्क में मामूली वृद्धि के बावजूद लोगों को राहत
किरायेदारी के कानूनी विवादों में कमी आने की उम्मीद
आशुतोष मिश्र, कानपुर। किरायेदारी की लिखा-पढ़ी कराने पर फिर छूट मिलने लगी है। नवंबर 2025 से 19 मई 2026 तक छूट दी गई थी। इसके बाद लोगों को औसतन किराये का चार प्रतिशत और एक प्रतिशत रजिस्ट्री देना पड़ रहा था। अब दी जा रही छूट में पिछली बार की अपेक्षा थोड़ा शुल्क बढ़ाया है। फिर भी लोगों को काफी राहत है।
अधिवक्ताओं और लोगों का मानना है कि इससे किरायेदारों को कानूनी लिखापढ़ी में में छूट का फायदा तो होगा ही न्यायालयों पर किरायेदारी के मुकदमों का बोझ भी कम होगा। सिर्फ हलफनामा पर लिखापढ़ी न्यायालय में नहीं ठहरती है। इसलिए विवाद की स्थिति में मुकदमे बढ़ते हैं।
अब किरायेदारी की लिखापढ़ी में शुल्क
वर्तमान शुल्क दरें
| औसत वार्षिक किराया | किरायेदारी की अवधि | शुल्क (रुपये) |
|---|---|---|
| दो लाख रुपये तक | एक वर्ष | 1,000 रुपये |
| दो लाख रुपये तक | एक वर्ष से अधिक व पांच वर्ष तक | 2,000 रुपये |
| दो लाख रुपये तक | पांच वर्ष से अधिक 10 वर्ष तक | 4,000 रुपये |
| दो लाख से अधिक और छह लाख तक | एक वर्ष | 3,000 रुपये |
| दो लाख से अधिक और छह लाख तक | एक वर्ष से अधिक व पांच वर्ष तक | 6,000 रुपये |
| दो लाख से अधिक और छह लाख तक | पांच वर्ष से अधिक 10 वर्ष तक | 8,000 रुपये |
| छह लाख से अधिक और 10 लाख तक | एक वर्ष | 4,500 रुपये |
| छह लाख से अधिक और 10 लाख तक | एक वर्ष से अधिक व पांच वर्ष तक | 10,000 रुपये |
| छह लाख से अधिक और 10 लाख तक | पांच वर्ष से अधिक 10 वर्ष तक | 13,000 रुपये |
नवंबर 2025 से 19 मई 2026 तक मिली छूट
| औसत वार्षिक किराया | किरायेदारी की अवधि | शुल्क (रुपये) |
|---|---|---|
| दो लाख रुपये तक | एक वर्ष | 500 रुपये |
| दो लाख रुपये तक | एक वर्ष से अधिक व पांच वर्ष तक | 1,500 रुपये |
| दो लाख रुपये तक | पांच वर्ष से अधिक 10 वर्ष तक | 2,000 रुपये |
| दो लाख से ज्यादा छह लाख तक | एक वर्ष | 1,500 रुपये |
| दो लाख से ज्यादा छह लाख तक | एक वर्ष से अधिक व पांच वर्ष तक | 4,500 रुपये |
| दो लाख से ज्यादा छह लाख तक | पांच वर्ष से अधिक 10 वर्ष तक | 7,500 रुपये |
| छह लाख से अधिक 10 लाख तक | एक वर्ष | 2,500 रुपये |
| छह लाख से अधिक 10 लाख तक | एक वर्ष से अधिक व पांच वर्ष तक | 6,000 रुपये |
| छह लाख से अधिक 10 लाख तक | पांच वर्ष से अधिक 10 वर्ष तक | 10,000 रुपये |
शासनादेश के मुताबिक किरायेदारी के विलेख में 12 नवंबर से छूट दी जा रही है। इससे लोगों को राहत मिलेगी। छूट मिलने के कारण किरायेदारी के विलेखों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
-अलका सिंह, एआईजी स्टांप
किरायेदारी की रजिस्ट्री होने से उसमें लिखीं शर्तें कानूनी रूप से दोनों पक्षों को मान्य होती है। इसलिए विवाद की स्थिति नहीं बनती है। कुछ लोग 10 या 100 रुपये के हलफनामा पर नोटरी के यहां लिखापढ़ी कर लेते हैं। इसे कानूनी मान्यता नहीं होती है। इसलिए किरायेदारी के विवाद बढ़ते और मुकदमे दाखिल होते हैं। इस समय लगभग 50 हजार किरायेदारी के विवाद के मुकदमे विचाराधीन हैं।
-राकेश तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता
