कानपुर (जेएनएन)। कानपुर महानगर के ग्रामीण इलाके के पतारा क़स्बे में गणेश प्रतिमा विसर्जन दौरान बम फोड़े जाने से भगदड़ मच गई। यह बम हमीरपुर जिले के भरुआ सुमेरपुर से वैन में लाद कर कानपुर लाए जा रहे थे। पतारा बस्के के निकट प्रतिमा विसर्जन यात्रा देखकर वैन सवार युवकों ने भीड़ के बीच बम फोड़े। इससे वहां भगदड़ मच गई।

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एक के बाद एक हो रहे बम के धमाकों के बाद भीड़ में शामिल लोगों ने वैन को रोक लिया और उसमें तोड़फोड़ की। इस दौरान वैन सवार दो लोगों को दबोच लिया गया। बताया गया है भीड़ ने उनकी पिटाई भी की। पकड़े गए शाहरुख़ पुत्र मक़सूद और मोहित पुत्र गुरु प्रसाद हमीरपुर जिले के सुमेरपुर के निवासी हैं। वैन से 10 बोरियो में करीब 10 हज़ार बम बरामद किए गए। पुलिस मौके पर पहुंचकर आगे की कार्वाई कर रही है।

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साइबर क्राइम और कानपुर कानपुर में साइबर अपराध की ऐसी छह घटनाओं की जांच के दौरान एसटीएफ के हाथ चौंकाने वाले तथ्य लगे हैं। जब ठगों ने किसी व्यक्ति का वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) अथवा पिन कोड पूछे बिना ही उसके खाते से लाखों रुपये उड़ा लिए। इस ठगी में एक राष्ट्रीय निजी बैंक की महिला कर्मचारी की अहम भूमिका रही, जिसने अपने पुरुष मित्र के साथ मिलकर धांधली की। एसटीएफ के एएसपी त्रिवेणी सिंह के मुताबिक यह अपनी तरह का पहला मामला है। जांच में कानपुर निवासी आरोपी युवक व महिला बैंककर्मी को चिन्हित कर लिया गया है। उनके कुछ अन्य साथी भी हैं, जिनके बारे में पड़ताल की जा रही है। एएसपी के अनुसार कानपुर निवासी युवक की मित्रता पूर्व में निजी बैंक की कानपुर शाखा में कार्यरत थी। बाद में युवती का तबादला दिल्ली स्थित कार्यालय में हो गया था। युवती बैंक के कंप्यूटर से कानपुर निवासी ग्राहकों का पूरा ब्योरा निकालकर उसकी जानकारी युवक को देती थी। इसके बाद युवक संबंधित ग्राहक बनकर बैंक के टोल फ्री (कस्टमर केयर) नंबर पर कॉल कर कहता था कि उसका डेबिट कार्ड खो गया है। पूछे जाने पर पहले से मौजूद संबंधित ग्राहक का ब्योरा भी बता देता था। नया कार्ड जारी होने में अमूमन तीन से चार दिन लगते हैं। इस बीच आरोपी युवक दो दिन बाद फिर बैंक के टोल फ्री नंबर पर लगातार संपर्क कर अपने डेबिट कार्ड का ब्योरा मांगता था। एएसपी ने बताया कि बैंककर्मी कॉल करने वाले शख्स को असली ग्राहक मानकर उसे यह जानकारी दे देते थे कि किस कूरियर कंपनी से कार्ड को भेजा गया है। इस पर युवक संबंधित कूरियर कंपनी के एजेंट से संपर्क कर डेबिट कार्ड हासिल कर लेता था। साथ ही उसे एक्टिवेट करने के दौरान वह एसएमएस सेवा के लिए संबंधित ग्राहक का नंबर भी बदल देता था। ताकि उसे रुपये निकाले जाने पर उसका मैसेज न हासिल हो सके। इस प्रकार गिरोह बेहद संगठित तरीके से लोगों के डेबिट कार्ड से लाखों रुपये उड़ा लेता था। पीडि़त ग्राहक को बैंक जाने पर उसके खाते से रकम निकालने की जानकारी होती थी। कानपुर के बर्रा, सिविल लाइन व अन्य थानों में दर्ज धोखाधड़ी के छह मुकदमों में इसी गिरोह की भूमिका सामने आई है। इनमें ग्राहकों के खाते से 16 लाख से अधिक रुपये हड़पे गए हैं। आशंका है कि गिरोह ने अन्य शहर के ग्राहकों को भी इसी प्रकार ठगी का शिकार बनाया होगा। ऐसे पकड़ा गया गोरखधंधा

एसटीएफ ने एक ही शहर के छह लोगों के साथ हुई ठगी की घटना की पड़ताल के दौरान संबंधित निजी बैंक जाकर भी पड़ताल की। बताया गया कि ऐसे कर्मचारियों को चिन्हित किया गया, जिन्होंने कंप्यूटर के जरिए ग्राहकों की डिटेल देखी थी। इसके बाद आरोपी महिला कर्मचारी को चिन्हित किया जा सका। महिला कर्मचारी की कॉल डिटेल के जरिए उसका दोस्त जांच के दायरे में आया। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बैंक अधिकारियों से भी हो रही वार्ता

एएसपी के अनुसार संबंधित निजी बैंक के अधिकारियों से भी वार्ता की जा रही है। पूरे मामले में अब तक बैंक के सिस्टम में भी कई खामियां सामने आ रही हैं। इस बाबत भी जांच की जा रही है। क्योंकि ग्राहक के शिकायत करने पर बैंक अधिकारी यही दावा करते थे कि उन्होंने ओटीपी अथवा पिन कोड जरूर किसी से साझा किया होगा।

Posted By: Nawal Mishra

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