कन्नौज में फालिस मारने से चाचा और बुखार से भतीजे की मौत, एक साथ उठी अर्थी; गांव में बढ़ती जा रही परेशानी
कन्नौज के वीरमपुर गांव में बुखार और फालिस से चाचा-भतीजे की मौत हो गई, जिनकी अर्थी एक साथ उठी।

HighLights
वीरमपुर गांव में चाचा-भतीजे की एक साथ मौत।
बुखार और फालिस से हुई मौतें, झोलाछाप इलाज जिम्मेदार।
कन्नौज में स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
जागरण संवाददाता, कन्नौज। ठठिया क्षेत्र के वीरमपुर गांव में बुखार के कारण पहले चाचा की मौत हुई और फिर कुछ देर बाद बूखार से पीड़ित भतीजे ने भी दम तोड़ दिया। अलग-अलग अस्पतालों में हुई दोनों घटनाओं से स्वजन में कोहराम मच गया। बुधवार को दोनों की अर्थी एक साथ उठी, उनका अंतिम संस्कार कन्नौज स्थित मेहंदी घाट पर एक साथ किया गया है।
थाना क्षेत्र के वीरमपुर गांव निवासी 54 वर्षीय पातीराम को चार दिन पूर्व बुखार आया था। मेडिकल स्टोर पर झोलाछाप से इलाज कराया, तो मंगलवार को फालिस मार गई थी। स्वजन ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान मंगलवार देरशाम उनकी माैत हो गई।
वहीं पातीराम के पड़ोस में रहने वाला उसका 30 वर्षीय भतीजा प्रदीप पुत्र जगदीश भी बुखार की चपेट में था। उसने भी गांव के ही झोलाछाप से इलाज कराया, हालत बिगड़ने पर स्वजन उसे कानपुर ले गए। जहां इलाज के दौरान प्रदीप ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया।
प्रदीप की पत्नी प्रीती देवी के साथ 10 वर्षीय पुत्री अंशिका व छह वर्षीय पुत्री सृष्टि है। बुधवार दोपहर दोनों के शव घर पहुंचे। जहां से चाचा पातीराम और भतीजे प्रदीप की एक साथ अर्थी उठाई गई। पातीराम का बड़ा पुत्र नीरज उड़ीसा में मजदूरी करता है। इससे पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो। 15 वर्षीय छोटा बेटा धीरज ने अंतिम संस्कार कराया।
भुन्ना स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. अमृत कटियार ने बताया कि झोलाछाप डेंगू की अफवाह फैलाकर कमाई करते हैं। जनेरी गांव में आठ अक्टूबर और 15 अक्टूबर को दो महिलाओं की मौत हुई थी। उस प्रकरण की जांच हुई तो उसमें लिवर संक्रमण और सुगर से मौते होने की पुष्टि हुई थी। वीरमपुर गांव में कैंप लगाया जाएगा और मरीजों को दवाएं वितरण कराई जाएंगी।
