कलमा से स्वस्तिवाचन और जम-जम से गंगाजल: धर्म की दीवारें तोड़ रफीक बने राजकुमार और पत्नी अफसारी बनीं अनीता
पश्चिम बंगाल में रफीक बनकर मुस्लिम युवती अफसारी खातून से निकाह करने वाले राजकुमार ने झांसी में अपने परिवार के साथ सनातन धर्म में घर वापसी की है।

HighLights
राजकुमार ने पश्चिम बंगाल में रफीक बनकर मुस्लिम धर्म अपनाया था।
अपनी पत्नी अफसारी खातून और बच्चों संग झांसी लौटे।
सिद्धेश्वर मंदिर में वैदिक रीति से सनातन धर्म में घर वापसी की।
जागरण संवाददाता, झांसी। बचपन में राजकुमार और काम के सिलसिले में पश्चिम बंगाल के मालदा गए तो जान बचाने के लिये रफीक बन गए। शनिवार को सिद्धेश्वर मन्दिर में जम-जम के बाद गंगाजल और कलमा के बाद स्वस्तिवाचन तक का सफर पूरा करते हुए एक बार फिर अपने घर की वापसी कर ली।
हवन के समय पति के दायें अंग बैठी पत्नी अफसारी खातून भी पूरी तरह से भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। हवन के पहले उनका ग्रन्थीबन्धन किया, हाथों में कलावा बांधा गया और सिन्दूर से मांग भरी गई। स्वस्तिवाचन के साथ राजकुमार की घर वापसी और अफसारी का सनातन धर्म में प्रवेश कराया गया।
रक्सा थाना क्षेत्र के ग्राम राजापुर निवासी महादेव पटैरिया के दूसरे नम्बर के पुत्र राजकुमार ने कक्षा पांच पास की और बस स्टैण्ड पर कार्य करने लगा। एक ठेकेदार के साथ वर्ष 2003 में काम के सिलसिले में पश्चिम बंगाल चला गया। 5 लोगों के साथ पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के थाना कालियाचक के अन्तर्गत विशनपुरा पहुंचा। यहां कुछ दिन तक को ठीक रहा, लेकिन बाद में उसे दिक्कत आने लगी।
ऐसे पड़ा 'रफीक' नाम
हिन्दू होने के कारण सरकारी प्रपत्र भी तैयार नहीं हो रहे थे। राजकुमार का कहना था कि साथी व वहां पर रहने वाले लोग भी उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगे। नतीजतन सजीमुद्दीन जिनके यहां वह रहता था उन्हें अपना दत्तक पिता बने और मुस्लिम धर्म कबूल कराकर उसका नाम रफीक कर दिया गया।
इस दौरान उसे इस्लाम का मूल आधार कलमा (ईमान की गवाही) (ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह) पढ़ाया गया। ईद अथवा अन्य मौकों पर वह कलमा पढ़ते थे। धर्म परिवर्तन के बाद आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज में भी यही नाम दर्ज हो गया।
शादी के बाद 3 बच्चों का पिता बना
धर्म परिवर्तन के बाद राजकुमार उर्फ रफीक ने मुस्लिम युवती अफासारी खातून से निकाह कर लिया। दम्पती के 4 बच्चे भी हुए। लम्बे समय तक पश्चिम बंगाल में रहने के बाद अब वह पत्नी और बच्चों के साथ अपने पैतृक गांव राजापुर वापस आया है।
यहां पर परिवार व गांव के लोग उसे अपने सनातन धर्म में वापसी आने की बात कहने लगे और महाकवि सूरदास की पंक्ति "मेरो मन अनत कहां सुख पावै, जैसे उड़ि जहाज कौ पंछी, पुनि जहाज पै आवै" जैसी स्थिति राजकुमार की भी हो गई।
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उसने धर्म परिवर्तन की जानकारी करनी शुरू की। इसी के साथ पत्नी अफासारी खातून से भी बात की। वह सहज की तैयार हो गई। दोनों ने मिलकर अलग-अलग शपथ पत्र तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपे।
विधि के विधान को फिर स्वीकारा
सनातन धर्म में विधि विधान के अनुसार वापसी के लिये राजकुमार, उसकी पत्नी अफासारी खातून और बेटा राजा विश्व हिन्दू परिषद के विनोद अवस्थी, हिन्दू जागरण मंच के जयदीप खरे, पीयूष रावत, पुरुषोत्तम स्वामी, रामकुमार मिश्र, अतुल मिश्रा के साथ सिद्धेश्वर मन्दिर पहुंचा। यहाँ पर पण्डित आचार्य राजीव पाठक के नेतृत्व में विद्वानों ने वैदिक रीति से उसकी घर वापसी कराई। सनातन धर्म के अनुसार हवन वेदी पर पहले दोनों ने पूजन व हवन किया, इसके बाद सिद्धेश्वर भगवान के दर्शन, पूजन व आरती की।
घर वापसी के बाद राजकुमार का कहना था कि परिस्थितियों के कारण उसे इस्लाम कबूल करना पड़ा था, लेकिन अब सनातन में आकर वह व उसका पूरा परिवार खुश है। अफासारी खातून से अनीता बनी इसकी पत्नी का भी कहना था कि उसके घर वालों को पहले से पता था कि हिन्दू लड़के से निकाह हुआ है। वह बालिग है और अपनी मर्जी से अपने शौहर की बेगम से पत्नी बनी है।
