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करोड़ों की ठगी करने वाला इनामी डॉक्टर और उसकी पत्नी चंडीगढ़ से गिरफ्तार, पुलिस ने कसा शिकंजा

By Irshad KhanEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Sat, 26 Sep 2026 08:05 PM (IST)

करोड़ों रुपये की ठगी के आरोप में इनामी डॉक्टर वीरेंद्र सिंगरया और उसकी पत्नी पूजा शर्मा को चंडीगढ़ से गिरफ्तार ...और पढ़ें

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HighLights

  1. करोड़ों की ठगी के आरोप में डॉक्टर-पत्नी गिरफ्तार।

  2. नौकरी, अस्पताल, जमीन व बालू घाट में निवेश का झांसा।

  3. झांसी और उरई में कई मुकदमे दर्ज हैं।

जागरण संवाददाता, झांसी जमीन के नाम पर निवेश, हॉस्पिटल खोलने और मुनाफे में साझेदारी, नौकरी लगवाने, अस्पताल में एक्स-रे मशीन लगाने और पथॉलजि शुरू कराने से लेकर बालू घाट में पार्टनरशिप तक का झाँसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये ठगने वाले डॉक्टर को नवाबाद पुलिस ने चण्डीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया। ठगी के इस पूरे खेल में डॉक्टर का साथ निभाती रही उसकी पत्नी भी पुलिस के हत्थे चढ़ गई है।

आरोपियों पर झांसी के अलग-अलग थानों के साथ उरई में भी मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस की जाँच में रुपये लेने और फर्जीबाड़े के आरोपों की पुष्टि के बाद कुछ मामलों में आरोप-पत्र भी दाखिल किया जा चुका है। फरार डॉक्टर पर पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।

गुरसराय के ग्राम पुरैनिया निवासी सुरेन्द्र सिंह ने पुलिस को बताया कि वह शिवाजी नगर निवासी द्वारिका नाथ सिंगरया के यहाँ आता-जाता था। यहाँ उनके पुत्र डॉ. वीरेन्द्र सिंगरया व उसकी पत्नी पूजा शर्मा से भी मुलाकात होती थी। सुरेन्द्र ने बताया कि इसी दौरान उन्होंने अपने बेटे के बी-टेक करने की बात डॉ. वीरेन्द्र सिंगरया और उसकी पत्नी पूजा शर्मा को बताई।

क्या बनाई थी योजना?

आरोप है कि दम्पति ने असिस्टेण्ट एंजिनियर के पद पर नौकरी लगवाने का भरोसा दिया और इसके एवज में 3.50 लाख रुपये ले लिए। न तो नौकरी लगी और न ही रकम वापस की गई। भगवन्तपुरा निवासी भरत यादव का आरोप है कि डॉक्टर ने अस्पताल खोलने और उससे होने वाले लाभ में बराबर की हिस्सेदारी देने का झांसा देकर रकम ली।

इसी तरह तरीचरकलाँ (निवाड़ी, मध्य प्रदेश) के कई लोगों से भी अस्पताल और निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये लेने का आरोप है। दिनेश कुमार ने बताया कि डॉक्टर ने अस्पताल के लिए जमीन दिखाई और दो माह में रकम वापस करने की बात कहते हुए उससे 35 लाख रुपये ले लिए। उसके भाई से भी 10 लाख रुपये लिए गए। राजकुमार सोनकर ने आरोप लगाया कि डॉ. वीरेन्द्र सिंगरया ने बालू घाट में साझेदारी कराने के नाम पर उससे 9.23 लाख रुपये लिए, लेकिन न तो साझेदारी मिली और न ही रकम लौटाई गई। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने आरोपियों को रकम चेक और ऑनलाइन माध्यम से दी थी।

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इसके बाद डॉक्टर पूरे परिवार के साथ अचानक गायब हो गया। पिछले दिनों पुलिस को सूचना मिली कि डॉक्टर दम्पत्ति चण्डीगढ़ में रह रहे हैं, जिस पर नवाबाद पुलिस के साथ स्वॉट टीम चण्डीगढ़ पहुँची और वहाँ से आरोपी डॉक्टर और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर झांसी ले आयी।

पुलिस ने बताया कि डॉक्टर दम्पति के खिलाफ गुरसराय थाने में सुरेन्द्र सिंह, नवाबाद में जगदीश प्रसाद, गौरव सिंह, ओमप्रकाश वर्मा और विवेक श्रीवास्तव, कोतवाली में हरिराम वर्मा तथा कोतवाली उरई में रोहित प्रजापति ने मुकदमे दर्ज कराए हैं।

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पीड़ितों का आरोप है कि डॉक्टर ने भरोसे का नेटवर्क बनाकर अलग-अलग लोगों को अलग-अलग योजनाओं का सपना दिखाया और उनसे रकम हड़प ली। पुलिस ने दर्ज मामलों में साक्ष्य जुटाए और कुछ प्रकरणों में आरोप-पत्र भी दाखिल कर दिए। नवाबाद प्रभारी निरीक्षक रवि श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. वीरेन्द्र सिंगरया और उसकी पत्नी पूजा शर्मा को चण्डीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले में आगे की जाँच कर रही है।

बड़ा अस्पताल बनाने के सपने ने बनाया अपराधी

डॉक्टर बनने तक पढ़ाई में अव्वल रहने वाला व्यक्ति जब अपनी हैसियत से अधिक बड़ा अस्पताल खड़ा करने और कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की दौड़ में शामिल हुआ तो हालात बदलते चले गए। पुलिस की जाँच में सामने आया कि अस्पताल के लिए पहले करीबी लोगों से रकम जुटाई गई। अस्पताल उम्मीद के मुताबिक नहीं चला और कर्ज बढ़ता गया। इसके बाद कर्ज देने वाले लोग अपनी रकम वापस माँगने लगे। आरोप है कि कुछ लोगों ने 15 से 20 प्रतिशत तक ब्याज पर रकम दी थी।

कर्ज और ब्याज का दबाव बढ़ने के बाद डॉक्टर ने एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरे लोगों से रकम जुटाने का रास्ता अपनाया। इसके लिए किसी को नौकरी का भरोसा दिया गया तो किसी को अस्पताल में हिस्सेदारी, किसी को जमीन और किसी को बालू घाट में साझेदारी का सपना दिखाया गया। देखते ही देखते यह सिलसिला बढ़ता गया और कई लोग अपनी रकम गवाँ बैठे। ठगी के इस खेल ने डॉक्टर को अपराधी बना दिया।