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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 03, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

श्रमजीवी विस्फोट कांड: दोनों आतंकियों को हुई मृत्युदंड की सजा, 18 साल बाद मिला इंसाफ; 14 लोगों की हुई थी मौत

By Jagran News Edited By: Mukul Kumar
Published: Wed, 03 Jan 2024 05:09 PM (IST)

श्रमजीवी एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में कोर्ट की तरफ से फैसला आया है। इस कांड के आतंकियों को मृत्युदंड की सजा ...और पढ़ें

श्रमजीवी विस्फोट कांड के आतंकियों को हुई मृत्युदंड की सजा
श्रमजीवी विस्फोट कांड के आतंकियों को हुई मृत्युदंड की सजा

HighLights

  1. अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राजेश कुमार राय ने बुधवार को 4.15 बजे सुनाया फैसला
  2. बहस में संसद पर हमले की दी गई थी नजीर, अधिवक्ता ने मृत्युदंड की रखी थी मांग

जागरण संवाददाता, जौनपुर। उत्तर प्रदेश के सिंगरामऊ के हरपालगंज रेलवे स्टेशन के समीप हरिहरपुर क्रासिंग के पास श्रमजीवी एक्सप्रेस (Shramjeevi Express Blast) ट्रेन में 28 जुलाई 2005 को हुए बम विस्फोट (2005 Jaunpur train bombing) के मामले के बुधवार को दोपहर बाद 4.15 बजे अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राजेश कुमार राय ने दोनों दोषी आतंकी बांग्लादेश निवासी हिलालुद्दीन उर्फ हिलाल व बंगाल निवासी नफीकुल विश्वास को मृत्युदंड की सजा सुनाया।

इसके साथ ही अलग-अलग धाराओं में जुर्माना भी लगाया। इस दौरान न्यायालय परिसर में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था रही। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी दोषियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में जिला जेल ले जाया गया। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में मंगलवार को सजा के बिंदु पर बहस हुई थी।

22 दिसंबर को दोनों हुए थे दोषी करार

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने सजा सुनाने के लिए बुधवार की तिथि नियत की थी। दोनों आतंकियों को 22 दिसंबर को दोषी करार दिया गया था।

बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन में बम विस्फोट के मामले में सजा सुनाए जाने के लिए दोषी करार दिए गए आतंकी बांग्लादेश निवासी हिलालुद्दीन उर्फ हिलाल व बंगाल निवासी नफीकुल विश्वास को कड़ी सुरक्षा में दोपहर बाद तीन बजकर 15 मिनट पर पेश किया गया।

दोनों पक्ष के अधिवक्ता रहे मौजूद

इसके बाद सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। 4 बजकर 15 मिनट पर न्यायाधीश ने दोनों को मृत्युदंड व जुर्माना का फैसला सुनाया। इस दौरान कोर्ट में दोषियों के अधिवक्ता न्याय मित्र ताजुल हसन तथा अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी वीरेंद्र मौर्य मौजूद रहे।

इसके पूर्व मंगलवार को सजा के बिंदु पर हुई बहस में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी वीरेंद्र मौर्य ने अपना पक्ष रखते हुए विस्फोट की घटना को विरल से विरलतम बताया था। उन्होंने दिल्ली राज्य बनाम नवजोत संधू 2005 सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला दिया।

14 लोगों की गई थी जान

उन्होंने कहा था कि इसमें संसद भवन पर आतंकियों द्वारा किए गए हमले में नौ लोग आतंकियों की गोली से मारे गए थे और 16 व्यक्ति घायल हुए थे, जबकि श्रमजीवी विस्फोट कांड में हुए बम विस्फोट में 14 लोग मारे गए व 62 लोग घायल हुए।

हिलाल ने बांग्लादेशी आतंकी रोनी के साथ श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन में बम रखा था। रोनी को मृत्युदंड की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके साथ ही आतंकी ओबैदुर्रहमान का विचारण इन दोनों दोषियों के साथ चला था।

उसे भी मृत्युदंड की सजा सुनाई जा चुकी है। ऐसे में इन दोनों को भी मृत्युदंड की सजा होनी चाहिए। फांसी के अलावा अन्य कोई सजा ऐसे दोषियों के लिए कम है।

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