गोबर से बदली किस्मत, 20 साल की राधा ने खड़ा किया जालौन में 'काऊ मार्ट', 65 महिलाओं को दिया रोजगार
जालौन की 20 वर्षीय राधा पांडेय ने गाय के गोबर से 'काऊ मार्ट' व्यवसाय शुरू कर 65 महिलाओं को रोजगार ...और पढ़ें
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HighLights
राधा पांडेय ने 14 साल की उम्र में गोबर से काम शुरू किया।
‘काऊ मार्ट’ से 65 महिलाओं को मिला स्थायी रोजगार।
गोबर के उत्पाद नोएडा एक्सपो सेंटर तक पहुंचे।
अजय दीक्षित, उरई। अपनी सहेली को जन्मदिन पर गिफ्ट देना था, बाजार से चीनी मिट्टी का खिलौना मां ने लाने से मना किया तो 14 साल की राधा के मन में आया कि क्यों न स्वयं गाय के गोबर-माटी और कुछ खुशबू वाला केमिकल मिला कर एक सुंदर प्रतिमा बना लें। उसने ऐसा ही किया और एक दिन में ही गणेश जी की सुंदर मूर्ति बना ली। दो दिन बाद उसे पैकिंग कर अपनी सहेली को दिया तो उसके घर के लोगों को बहुत पसंद आई। कुछ लोगों ने तो उसे प्रोत्साहित किया और इस तरह से और सामग्री तैयार करने को कहा। फिर क्या था गणेश भगवान के उस गोबर के विग्रह ने राधा को एक नई राह दे दी।
आज रास्ते की सारी बाधा को दूर कर राधा पांडेय गोबर से अपनी किस्मत को गढ़ रही हैं। 20 साल की इस युवती की ओर से पांच साल पहले प्रारंभ किए गए कारोबार की चमक दो बार नोएडा के एक्सपो सेंटर तक के मंच पर चमक बिखेर चुका है। उनके इस कारोबार में करीब 65 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। कालपी तहसील के गांव चमारी की 20 वर्षीय राधा पांडेय पांच साल से गाय के गोबर से तरह-तरह की सामग्री तैयार करने का काऊ मार्ट नाम से अपना व्यवसाय संचालित कर रखा है।
उन्हें यह काम करने की सीख उनकी मां विनीता पांडेय से मिली जो कि गांव की गोशाला की संरक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। राधा बीकाम कर चुकी हैं। वह अपने व्यवसाय को और आगे ले जाने के प्रयास में जुटी हैं। इसी प्रयास का परिणाम है कि वह 2025 और 26 में ग्रेटर नोएडा के एक्सपो सेंटर में अपना स्टाल लगा चुकी हैं।
इसका परिणाम है कि उनके गाय के गोबर से बने उत्पाद दिल्ली, मुंबई, लखनऊ सहित कई बड़े शहर तक में आर्डर से पहुंच रहे हैं। उनके पिता भूधर कुमार पांडेय भी जरूरत पर देखरेख करते हैं। उनका एक छोटा भाई है जो बाहर रह कर पढ़ाई कर रहा है।
इस तरह तैयार होते हैं उत्पाद
गाय का गोबर अच्छी तरह सुखाकर बारीक पाउडर बनाया जाता है। ग्वार गम या प्राकृतिक गोंद यह मिश्रण को आपस में बांधकर रखता है और खिलौने को मजबूती देता है। मुल्तानी मिट्टी या चिकनी मिट्टी को भी मिलाते हैं, यह गोबर के साथ मिलकर चिकनापन और सही आकार देने में मदद करती है। इमली के बीज का पेस्ट पारंपरिक कारीगर कई बार इसे बाइंडिंग एजेंट (जोड़ने वाले पदार्थ) के रूप में इस्तेमाल करते हैं। खिलौनों या अन्य सामग्री को सुंदर बनाने के लिए उन पर वाटर कलर या अन्य इको-फ्रेंडली रंगों से पेंटिंग की जाती है।
तैयार होने वाले उत्पाद
राधा कहती हैं कि 2021 से उन्होंने गाय के गोबर से उत्पाद तैयार करने का काम प्रारंभ किया था। पहले मात्र 25 उत्पाद तैयार हो पाते थे अब इनकी संख्या 201 हो चुकी है। उत्पाद में गणेश-लक्ष्मी, अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां हैं, दीपक, शुभ-लाभ की मूर्ति, बैठने का आसन, चटाई, माला, दीपक अन्य कई तरह के खिलौना तैयार करती हैं। इनकी कीमत 10 रुपये से लेकर 50 रुपये तक है।
इस काम में आसपास कई गांव से करीब 40 महिलाएं घर पर रहते हुए रोजगार से जुड़ी हैं। उनके पास 25 महिलाएं काम करती हैं। उन्हें ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक्सपो सेंटर में स्टाल लगाने का दो बार आमंत्रण मिल चुका है। स्टाल के दौरान सरकार की ओर से सारी सुविधाएं दी गईं। उन्हें सरकार से काफी प्रोत्साहन मिला है। राधा की ओर से गाय के गोबर से कई तरह की सुंदर मूर्तियां व अन्य सामग्री तैयार की जा रही हैं, यह दूसरे युवाओं के लिए बहुत ही प्रेरित करने वाला कार्य है। धर्मेंद्र भाष्कर, उपायुक्त उद्योग।
