उरई ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़, गुलाब जल के गत्तों में पैक होती थी एमडी ड्रग्स
उरई में सिंथेटिक ड्रग्स मेफेड्रोन (एमडी) बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है, जहाँ गुलाब जल के गत्तों में ड्रग्स ...और पढ़ें

ऐरी रमपुरा में सील एमडी ड्रग्स का प्लांट। जागरण
HighLights
उरई में सिंथेटिक ड्रग्स मेफेड्रोन फैक्ट्री का खुलासा
गुलाब जल के गत्तों में पैक होती थी एमडी ड्रग्स
दो आरोपित गिरफ्तार, मुख्य सरगना शैलेंद्र फरार
जागरण संवाददाता, उरई। डकोर थाने के ऐरी रमपुरा में राजस्व खुफिया महानिदेशालय (डीआरआइ) व आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की टीम द्वारा 29 अक्टूबर को सिंथेटिक ड्रग्स मेफेड्रोन (एमडी) तैयार करने के पकड़े गए कारखाने के मामले में जांच के दौरान टीम को पता चला है कि अंदर गुलाब जल लिखे गत्तों में ही ड्रग्स पैक कर मुंबई सप्लाई हो रही थी।
जांच में पता चला कि गुलाब मंगाया जरूर जाता था लेकिन गुलाब जल कहीं भी तैयार नहीं होता था। टीम ने छापेमारी कर संतोष गावड़े और हेमेंद्र को गिरफ्तार कर काफी मात्रा में ड्रग्स व प्रयोग होने वाली सामग्री बरामद कर आरोपितों को विशेष न्यायालय एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज) में पेश करने के बाद शुक्रवार को ही जिला जेल भेज दिया गया था। सीओ सिटी राजीव शर्मा ने बताया कि आरोपित शैलेंद्र पाल अभी भी गिरफ्त में नहीं आ सका है।
टीमों की छापेमारी के दौरान ऐरी रमपुरा के कुछ ग्रामीण भी बाहर मौजूद थे। जो भी सामान बाहर निकाला गया उसमें गुलाब जल लिखे खाली गत्ता तो दिखे लेकिन उनमें एमडी ड्रग्स व रसायन आदि पैक था। ऐरी रमपुरा के एक ग्रामीण ने बताया कि जब जून में शैलेंद्र पाल ने गुलाब जल तैयार करने की फैक्ट्री खोली तो कह रहा था कि यह काम बहुत अच्छा है। इसे और बढ़ाया जाएगा। इसमें काफी कमाई होगी।
पूरे प्लांट परिसर को टिन चादर से घेर रखा था। टिन चादर का ही गेट भी लगा था। ऐरी गांव की आबादी चार सौ के करीब ही है। लोग उस प्लांट की ओर कभी कभार ही जाते थे। वहां लाइटें काफी लगी थीं और प्लांट के पास सौ मीटर दूर गोशाला की सड़क को जोड़ते हुए डामर की सड़क भी बना रखी थी। उसका साथी हमीरपुर के गोहांड का हेमेंद्र और महाराष्ट्र के सांगली का संतोष गावड़े भी गांव वालों को कम ही दिखता था।
टीम को कारखाने में ड्रग्स बनाने की प्रयोगशाला व 184 किलो ग्राम अर्धनिर्मित ड्रग्स, 582.2 किलोग्राम रसायन व उपकरण के साथ 15.44 किलोग्राम मेफेड्रोन, 152.94 किलोग्राम रसायन और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीन मिली थी। आरोपित के घर में परिसर से 168.3 किलोग्राम रसायन मिले थे। इस तरह कुल ड्रग्स व उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायन की बरामदी 1102.88 किलोग्राम थी। प्लांट से पचास से अधिक गत्ते थे, जिनमें गुलाब जल लिखा था।
तलाशी में कहीं एक भी शीशी गुलाब जल की न मिलना इस बात का सुबूत है कि वहां गुलाब लिखे गत्तों में ही ड्रग्स पैक होती थी। लोगों को भ्रमित करने को प्लांट के बाहर बोर्ड लगा कर उसमें गुलाब जल तैयार होने का विवरण व जीएसटी नंबर भी लिख रखा था।
ऐसे मिला था संतोष से शैलेंद्र पाल
हेमेंद्र मुंबई में पुताई का काम करता था। काम का पैसा न देने पर जब उसने ठेकेदार की हत्या की तो वह मुंबई जेल भेजा गया। वहां पहले से बंद संतोष गावड़े से उसकी मुलाकात हुई। जेल में ही दोनों ने ड्रग्स प्लांट तैयार करने का प्लान बनाया। जेल से छूटने के बाद संतोष उरई हेमेंद्र के साथ आया और यहां हेमेंद्र के माध्यम से ऐरी रमपुरा के शैलेंद्र पाल से मुलाकात हुई।
शैलेंद्र ने जमीन उपलब्ध कराई। 22 लाख की एक एकड़ जमीन बेची और अपनी ही जमीन पर कारखाना लगाया। सीओ सिटी राजीव शर्मा ने बताया कि छापेमारी में गुलाब जल नहीं मिला था, गत्ते जरूर थे और अन्य ड्रग्स आदि बरामद कर टीम साथ ले गई थी। आरोपित शैलेंद्र अभी फरार है।
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