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जालौन में गैर-पंजीकृत अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत, संचालक फरार

Published: Sun, 14 Jun 2026 11:51 PM (IST)

कुठौंद के गैर-पंजीकृत राधे-राधे अस्पताल में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया, ...और पढ़ें

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HighLights

  1. घटना के बाद अस्पताल संचालक दोनों को ले गए औरैया जिला अस्पताल

  2. रात में अस्पताल का सामान हुआ गायब, थाने में पहुंचे स्वजन और ग्रामीण

संवाद सूत्र, कुठौंद(उरई)। कस्बे के एक निजी अस्पताल में शनिवार की रात प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ गई। रात में ही अस्पताल संचालक निजी गाड़ी से जच्चा-बच्चा को लेकर औरैया जनपद के अस्पताल पहुंचे। वहां पर जच्चा-बच्ची की मौत हो गई। दोनों की मौत की सूचना जब स्वजन को मिली तो उनके साथ ही कई ग्रामीण अस्पताल पहुंचे। वहां जाकर देखा तो अस्पताल का अधिकांश सामान गायब मिला तो लोग थाने पहुंचे।

अस्पताल का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण भी नहीं है। मृतका के पति ने लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद सीएमओ डा. हरिनंदन प्रसाद मौके पर पहुंचे। स्वजन ने अस्पताल के विरुद्ध तहरीर दी है। जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। जच्चा बच्चा का शव आने के बाद ग्रामीणों ने जाम लगाने का प्रयास किया, उनकी मांग है कि संचालक को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।


क्षेत्र के ग्राम नौरजेपुर निवासी जितेंद्र की 32 वर्षीय पत्नी रश्मि को शनिवार शाम करीब पांच बजे प्रसव पीड़ा होने पर कस्बे के राधे-राधे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पति ने बताया कि रात करीब आठ बजे प्रसव हुआ, लेकिन जन्म के बाद नवजात की हालत गंभीर हो गई। कुछ ही देर बाद जच्चा की भी तबीयत बिगड़ने लगी।

अस्पताल के चिकित्सक ने दोनों को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल औरैया के लिए अपनी गाड़ी में भेजा। जहां औरैया जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद जच्चा और नवजात दोनों को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही मृतका के घर में चीख पुकार मच गई।

मृतका के पति जितेंद्र ने आरोप लगाया कि प्रसव के बाद ही दोनों की हालत गंभीर हो गई थी। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने समय रहते समुचित उपचार नहीं दिया। मृतका रश्मि का दो साल का बच्चा भी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद सीएमओ डा. हरिनंदन प्रसाद मौके पर पहुंचे। उन्होंने थानाध्यक्ष जगदंबा प्रसाद दुबे के साथ लोगों को समझाया।

ग्रामीणों की मांग थी कि अस्पताल संचालक को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने जच्चा बच्चा का शव आने पर जाम लगाने का प्रयास किया लेकिन जिम्मेदारों की सजगता व मुकदमा दर्ज कराने का आश्वासन दिया जिससे जाम नहीं लग सका। थानाध्यक्ष ने कहा कि पति की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।

घटना के बाद रातोंरात अस्पताल खाली करने का आरोप

जच्चा-बच्चा की मौत की सूचना क्षेत्र में फैलते ही नया विवाद खड़ा हो गया। स्वजन और स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल संचालक डा. बृजेश तिवारी रातोंरात अस्पताल परिसर खाली करके चले गए। आरोप है कि अस्पताल में रखे बेड, मेज, कुर्सियां और अन्य सामान भी वहां से हटा लिया गया। रविवार सुबह जब ग्रामीण और स्वजन अस्पताल पहुंचे तो परिसर लगभग खाली मिला। इससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया। इसके बाद लोग थाने पहुंच गए। थानाध्यक्ष जगदंबा प्रसाद दुबे ने बताया कि अभी मामले में शिकायती पत्र मिला है। मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। जिससे कि आगे की कार्रवाई की जा सके।


एएसएमओ ने दो दिन पहले किया था निरीक्षण

कस्बे के राधे-राधे अस्पताल में हुई यह घटना इसलिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है कि महज दो दिन पहले ही एसीएमओ ने कस्बे के अस्पतालों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद भी इस तरह की गंभीर घटना सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विभागीय उदासीनता और निगरानी तंत्र की कमजोरी को उजागर करता है। लगभग छह महीने पहले भी एक निजी अस्पताल में महिला की मौत हो चुकी है।


क्या कहते जिम्मेदार

कुठौंद का राधे-राधे अस्पताल का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण नहीं है। मिली शिकायत के आधार पर अस्पताल संचालक के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी कार्रवाई की जाएगी।
डा. अरविंद भूषण, एसीएमओ-नोडल अधिकारी

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