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हाथरस की पूर्व प्रधान प्रियंका तिवारी ने केबीसी के टॉप कैंडिडेट्स में बनाई जगह, किया जिले का नाम रोशन

Published: Fri, 23 Oct 2026 11:50 AM (IST)

हाथरस के राजपुर गांव की पूर्व प्रधान प्रियंका तिवारी ने कौन बनेगा करोड़पति शो के टॉप कैंडिडेट्स में जगह बनाकर जिले का नाम रोशन किया है।

अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ हाथरस के राजपुर पंचायत की प्रशासक प्रियंका तिवारी और उनके पति अलंकार अग्निहोत्री।

अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ हाथरस के राजपुर पंचायत की प्रशासक प्रियंका तिवारी और उनके पति अलंकार अग्निहोत्री।

HighLights

  1. प्रियंका तिवारी ने केबीसी के टॉप कैंडिडेट्स में जगह बनाई।

  2. राजपुर गांव की पूर्व प्रधान ने हाथरस का नाम रोशन किया।

  3. केबीसी मंच से राजपुर के विकास मॉडल का प्रदर्शन हुआ।

जागरण संवाददाता, हाथरस। प्रधानी के कार्यकाल में अपने गांव राजपुर का कायाकल्प करने वाली पंचायत प्रशासक व पूर्व प्रधान प्रियंका तिवारी ने कौन बनेगा करोड़पति शो के मंच तक पहुंचकर हाथरस का नाम रोशन किया है।

हाथरस ब्लाक के गांव राजपुर की कायाकल्प कर समूचे देश में नाम रोशन करने के साथ कई महत्वपूर्ण अवार्ड से सम्मानित हो चुकीं राजपुर की पूर्व प्रधान प्रियंका तिवारी ने इस बार अपनी योग्यता के बल पर प्रसिद्ध अभिनेता अभिताभ बच्चन के सोनी टीवी के कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति तक पहुंचने का सफर तय किया है। वह टॉप कैंडिडेट में शामिल रहीं।

परिजनों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल

पूर्व प्रधान के कौन बनेगा करोड़पति शो तक पहुंचने पर परिजनों और ग्रामीणों में काफी खुशी का माहौल है। शुभचिंतकों द्वारा उनके परिजनों को फोन के माध्यम से बधाई दी जा रही है। हालांकि, वह हॉट सीट पर बैठकर अमिताभ बच्चन के सामने खेल नहीं सकीं। फिर भी, प्रियंका लगातार चार दिनों तक केबीसी के मंच से जुड़ी रहीं।

उनका कहना है कि उनका प्रयास अभी खत्म नहीं हुआ है। आगे भी कोशिश जारी रहेगी। उनके इस सफर से जुड़े एपिसोड्स का प्रसारण सोमवार, मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को किया जाएगा। शो में चयन के बाद मुंबई से एक टीम राजपुर गांव पहुंची थी।

टीम ने प्रियंका के नेतृत्व में हो रहे विकास कार्यों की एक डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई। इसमें स्वच्छता अभियान और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन जैसी पहल शामिल थी। प्रियंका तिवारी का मानना है कि केबीसी का यह सफर केवल एक टीवी शो नहीं है, यह राजपुर के विकास मॉडल को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने का माध्यम भी बना है।

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