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लखनऊ-हरदोई सीमा पर 1,947 करोड़ की लागत से तैयार होगा मेगा टेक्सटाइल पार्क, कारोबार को लगेंगे पंख

Published: Sat, 31 Oct 2026 08:38 AM (IST)

हरदोई-लखनऊ सीमा पर 1,947 करोड़ रुपये के संत कबीर पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

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HighLights

  1. 1,947 करोड़ रुपये का मेगा टेक्सटाइल पार्क स्वीकृत।

  2. हरदोई-लखनऊ सीमा पर एक हजार एकड़ में बनेगा।

  3. एक लाख से अधिक युवाओं को मिलेगा रोजगार।

जागरण संवाददाता, हरदोई। लखनऊ-हरदोई सीमा पर प्रस्तावित मेगा टेक्सटाइल पार्क से जिले के औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 1,947 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई। करीब एक हजार एकड़ में विकसित होने वाला संत कबीर पीएम मित्र टेक्सटाइल एंड अपैरल पार्क कपड़ा और परिधान उद्योग का बड़ा केंद्र बन सकता है।

इससे संडीला औद्योगिक क्षेत्र समेत आसपास के कारोबारियों, छोटे उद्यमियों और युवाओं को लाभ मिलने की संभावना है। परियोजना से एक लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई है। केंद्र सरकार की पीएम मित्र योजना के तहत लखनऊ की मलिहाबाद तहसील के अटारी गांव में पार्क प्रस्तावित है। रामकी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को इसका मास्टर डेवलपर चुना गया है। योजना का उद्देश्य कपड़ा उद्योग की विभिन्न गतिविधियों को एक परिसर में लाकर उत्पादन से तैयार परिधानों की आपूर्ति तक की प्रक्रिया व्यवस्थित करना है।

पार्क में औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने पर कच्चे माल, मशीनरी, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन की मांग बढ़ सकती है। संडीला के उद्यमियों, स्थानीय व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, गोदाम संचालकों और औद्योगिक उपकरणों से जुड़े कारोबारियों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है। छोटे और मध्यम उद्यम बड़ी कंपनियों की सप्लाई चेन से जुड़कर कारोबार बढ़ा सकते हैं। मशीन संचालन, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, परिवहन, प्रबंधन, रखरखाव और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में रोजगार बन सकते हैं।

हालांकि, रोजगार की संख्या इकाइयों की स्थापना, निवेश और उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगी। स्थानीय युवाओं को लाभ दिलाने के लिए उद्योगों की जरूरत के अनुसार कौशल प्रशिक्षण जरूरी होगा। औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से खानपान, किराये के आवास, दुकानों और व्यावसायिक परिसरों की मांग भी बढ़ सकती है। इस नये पार्क को लेकर युवाओं का मानना है कि इसके स्थापित होने पर नौकरी के लिए दूसरे शहरों का रुख करने की जरूरत कम हो सकती है। शिवांश सिंह ने कहा कि पार्क से स्थानीय युवाओं को अपने परिवार के करीब रहकर काम करने का अवसर मिल सकता है।

रमन के अनुसार, तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार बढ़ेंगे, लेकिन युवाओं को प्रशिक्षण और प्राथमिकता देना जरूरी है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के युवा जिला अध्यक्ष अवनीश त्रिवेदी ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों से पैकेजिंग सामग्री, परिवहन और मशीनरी की मांग बढ़ेगी। स्थानीय उद्यमियों को इकाइयों से जोड़ने की पहल होनी चाहिए। युवा जिला उपाध्यक्ष अश्वनी कुमार ने कहा कि पार्क से ट्रांसपोर्ट, गोदाम, खानपान और छोटे कारोबारों को भी काम मिल सकता है। उन्होंने सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की उम्मीद जताई।

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