हरदोई में चार घंटे ओटी के अंदर लेटा रहा मरीज, ऑपरेशन से पहले थम गईं सांसें
हरदोई मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑपरेशन के इंतजार में एक मरीज की जान चली गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही ...और पढ़ें
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HighLights
हरदोई में ऑपरेशन से पहले मरीज ने तोड़ा दम।
चार घंटे तक ओटी में इंतजार करते रहे मरीज।
डॉक्टरों पर लापरवाही का गंभीर आरोप परिजनों ने लगाया।
जागरण संवाददाता, हरदोई। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आर्थो विभाग के डॉक्टरों को लापरवाही से एक मरीज को जान चली गई। पैर के आपरेशन के लिए शनिवार की चार घंटे तक मरीज को ओटी के अंदर लिटाए रहे। आपरेशन का इंतजार करते-करते मरीज की सांसें थम गईं। इसके बाद इमरजेंसी कक्ष भेजा,वहां पर मौत के बाद एक घंटे तक आक्सीजन देते रहे, चार बजे मृत बता दिया। स्वजन ने डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
देहात कोतवाली के ग्राम बर्रैयापुरवा के सत्येंद्र का गिरने से पैर टूट गया था। भतीजे राहुल के अनुसार शुक्रवार को शाम मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आर्थो वार्ड में भर्ती कराया था। जहां पर डॉ. अविक राय और विनीश वर्मा को देखरेख में उपचार किया जा रहा था। डॉक्टर ने पैर का ऑपरेशन कराने को सलाह दी थी। वह लोग ऑपरेशन के लिए राजी हो गए थे। शनिवार की सुबह ऑपरेशन के लिए आर्थो विभाग को ओटी में बुलाया गया था। डॉक्टर के बताए समय के अनुसार वह चाचा को स्ट्रेचर पर लिटाकर करीब 11 बजे ओटी के अंदर पहुंच गया था।
डॉक्टर ने बीपी बढ़ा होने को बात कहकर थोड़ी देर रुकने के लिए कहा-ओटी कक्ष के अंदर वह चाचा को करीब चार घंटे स्ट्रेचर पर लिटाए रहा। करीब साढ़े तीन बजे हालात बिगड़ने पर जूनियर डॉक्टर ने देखा और उपचार करने से हाथ खड़े कर लिए। हालात गंभीर बताकर इमरजेंसी भेज दिया। यहां पर करीब एक घंटे आक्सीजन देते रहे, साढ़े चार बजे मृत बता दिया। मृतक के भतीजे का आरोप है कि मौत के बाद भी चाचा को आक्सीजन देते रहे। अगर बीपी को समस्या थी पहले उपचार करना था। डाक्टरों को लापरवाही से चाचा को जान चली गई। अस्पताल प्रशासन ने शव को शव गृह में रखवा दिया है।
ऑपरेशन के जमा कराए 22 हजार रुपये: स्वजन ने बताया कि पैर का आपरेशन होना था। इसके लिए डॉक्टर ने ऑपरेशन से पहले 22 हजार रुपये जमा करा लिए थे। फिलहाल रुपये अभी तक वापस नहीं किए गए हैं।
तो ओटी के अंदर हुई मौत, डॉक्टर निकल गए: स्वजन का कहना है कि जूनियर डाक्टर ने देखते ही बता दिया था कि मौत हो गई है। इसके बावजूद दोनों जिम्मेदार डाक्टरों ने मरीज का हाल नहीं जाना, कर्मचारी से कहकर मरीज को इमरजेंसी भेजा। बवाल न हो जाए,इसके डर से कार स्टार्ट को और दोनों डॉक्टर निकल गए। फिलहाल में डाक्टरों को लापरवाही से सत्येंद्र का परिवार पत्नी, बच्चे बेसहारा हो गए।
प्रारंभिक जांच में मरीज के हार्ट में समस्या थी। सांस रोग से भी ग्रसित था। आपरेशन से पहले ही एनेस्थिया विशेषज्ञ ने मना कर दिया था। मरीज को रेफर किया जा रहा था,इससे पहले मौत होने की बात सामने आई है।- डॉ. शिवम यादव, मीडिया प्रभारी, मेडिकल कॉलेज, हरदोई
