हरदोई में 'जल सखियां' बनीं शुद्ध पेयजल की पहरेदार, शुद्ध पेयजल और सोकपिट निर्माण के लिए कर रहीं जागरूक
हरदोई में जल सखियां ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही हैं। वे ...और पढ़ें
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HighLights
जल सखियां घर-घर जाकर पानी की गुणवत्ता जांचती हैं।
दूषित पानी पर सुरक्षित पेयजल उपयोग की सलाह देती हैं।
सोकपिट निर्माण से जल संरक्षण को बढ़ावा दे रही हैं।
जागरण संवाददाता, हरदोई। हाथों में पानी की जांच किट और मन में ग्रामीणों को बीमारियों से बचाने का संकल्प। गांवों में जल सखियां अब शुद्ध पेयजल की पहरेदार बनकर उभरी हैं। सुबह घर का कामकाज निपटाकर निकलने वाली ये महिलाएं घर-घर पहुंचकर पानी की गुणवत्ता जांच रही हैं। पानी दूषित मिलने पर परिवार को सतर्क करने के साथ सुरक्षित पेयजल के इस्तेमाल की सलाह देती हैं।
इससे जहां ग्रामीणों को शुद्ध पानी के प्रति जागरूक किया जा रहा है, वहीं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को गांव में ही काम करने का अवसर भी मिला है। जिले के 1,902 राजस्व ग्रामों में करीब 9,500 महिलाएं जल गुणवत्ता परीक्षण से जुड़ी हैं। भरावन ब्लॉक की 65 ग्राम पंचायतों में 65 जल सखियां सक्रिय हैं।
क्षेत्र में पांच हजार से अधिक इंडिया मार्का हैंडपंप हैं। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत स्थापित पानी की टंकियों से भी पेयजल आपूर्ति की जा रही है। जल सखियां जांच किट से पानी की गुणवत्ता परखकर ग्रामीणों को परिणाम बताती हैं।
रुदौली नेवादा की चांदनी, हयातगंज की संजू, पीपरगांव की रेखा, बकवा की सोमवती, कोइली की संगीता, गोंडवा खेम की लक्ष्मी, हीरुपुर की पुष्पा, बंगालपुर की कुसुमा और औना देवकली की सुशीला समेत अन्य महिलाएं इस कार्य में जुटी हैं।
सुबह निकलतीं जांच किट लेकर, घर-घर देतीं सलाह
सांडा दखिलौल की जल सखी सुमन देवी बताती हैं कि सुबह से ही गांव में पानी की जांच शुरू कर देती हैं। घरों में इस्तेमाल होने वाले पानी का परीक्षण कर उसकी गुणवत्ता की जानकारी देती हैं। दूषित पानी मिलने पर सुरक्षित स्रोत अपनाने की सलाह देती हैं। छतिहा रामपुर की रेखा बताती हैं कि स्वच्छ पानी स्वस्थ जीवन का आधार है। पानी की गुणवत्ता खराब मिलने पर ग्रामीणों को सतर्क करने के साथ हैंडपंप की मरम्मत कराने के लिए प्रेरित करती हैं।
पानी की जांच के साथ जल संरक्षण की भी जगा रहीं अलख
जल सखियां केवल पानी की शुद्धता जांचने तक सीमित नहीं हैं। वह ग्रामीणों को जल संरक्षण का महत्व भी समझा रही हैं। इंडिया मार्का हैंडपंप के आसपास जलभराव रोकने के लिए सोकपिट बनवाने की सलाह देती हैं। इससे हैंडपंप से निकलने वाला अतिरिक्त पानी जमीन में समा जाता है। आसपास गंदगी और जलभराव की समस्या कम होने के साथ भूजल पुनर्भरण में भी मदद मिलती है।
जल है तभी कल है , शुद्ध पेयजल हेतु भरावन की 65 पंचायतों में जलसखी कार्य कर रही हैं | पानी की गुणवत्ता परखकर ग्रामीणों के साथ साथ कार्यालय में जानकारी देती हैं जिसके बाद यह जानकारी संबन्धित सचिव को दी जाती है |- हरिओम मिश्रा , ब्लॉक मिशन प्रबन्धक
जल सखियां घर-घर जाकर पानी की गुणवत्ता की जांच कर रही हैं। पानी दूषित मिलने पर ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ सुरक्षित पेयजल के इस्तेमाल और हैंडपंप की मरम्मत कराने की सलाह दी जाती है। साथ ही सोकपिट बनवाकर पानी का संरक्षण करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के साथ भूजल स्तर सुधारने में भी मदद मिल सके। - मनीष गंगवार, अधिशाषी अभियंता, जलनिगम ग्रामीण
