हापुड़ में लेखपालों ने छोड़ा अतिरिक्त सर्किल का काम, किसानों-ग्रामीणों के प्रमाण पत्र और नाप-जोख का काम बंद
धौलाना तहसील में लेखपालों ने अतिरिक्त सर्किल का काम बंद कर दिया है, जिससे ग्रामीणों और किसानों के प्रमाण पत्र, ...और पढ़ें

लेखपालों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन का असर अब ग्रामीणों के रोजमर्रा के कामकाज पर दिखाई देने लगा है। एआई इमेज
HighLights
लेखपालों ने धौलाना तहसील में अतिरिक्त सर्किल का काम छोड़ा।
किसानों-ग्रामीणों के प्रमाण पत्र, भूमि नाप-जोख के काम रुके।
लेखपाल संघ ने 3 अक्टूबर के समाधान दिवस का बहिष्कार किया।
जागरण संवाददाता, धौलाना (हापुड़)। लेखपालों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन का असर अब ग्रामीणों के रोजमर्रा के कामकाज पर दिखाई देने लगा है। धौलाना तहसील में डबल चार्ज संभाल रहे लेखपालों ने अतिरिक्त सर्किल का काम छोड़ दिया है।
इससे संबंधित गांवों में किसानों और ग्रामीणों के प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी नाप-जोख समेत कई काम प्रभावित हो गए हैं। वहीं, लेखपाल संघ ने तीन अक्टूबर को होने वाले संपूर्ण समाधान दिवस के बहिष्कार की भी घोषणा की है।
लेखपाल अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे
जानकारी के अनुसार, लेखपाल संघ पिछले करीब एक माह से वेतन विसंगति, अतिरिक्त पटल समेत आठ मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। धौलाना तहसील में कई लेखपालों के पास दोहरी सर्किल का चार्ज था।
आंदोलन के तहत लेखपालों ने अब अतिरिक्त सर्किल का कार्य करने से इन्कार कर दिया है। इसका सीधा असर उन गांवों के लोगों पर पड़ रहा है, जहां संबंधित लेखपाल अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
लेखपाल लंबे समय से करे मांग
ग्रामीणों का कहना है कि छोटे-छोटे कामों के लिए भी अब तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। खासकर किसानों को भूमि की नाप, आय-जाति और अन्य प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
समय पर काम नहीं होने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ रही है। लेखपाल संघ के तहसील अध्यक्ष निर्देश पाल ने बताया कि विभिन्न आठ मांगों को लेकर लेखपाल लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं।
कानूनगो की मदद से चलाना पड़ रहा काम
कई बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं होने पर आंदोलन जारी है। उन्होंने बताया कि तीन अक्टूबर को होने वाले संपूर्ण समाधान दिवस का भी पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। तहसीलदार सचिन कुमार ने बताया कि यह समस्या पूरे प्रदेश में है। आपातकालीन स्थिति में कानूनगो आदि से आवश्यक कार्य कराया जा रहा है, ताकि लोगों को तत्काल परेशानी न हो।
