15 साल का हुआ हापुड़, फिर भी अधूरा है विस्तार का सपना; मेरठ-बुलंदशहर के 116 गांवों का इंतजार
हापुड़ जिला अपनी 15वीं वर्षगांठ मना रहा है और विकास के बावजूद अपने विस्तार की मांग कर रहा है। जिला ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
हापुड़ जिला 15 साल का हुआ, विकास के बावजूद विस्तार चाहता है।
मेरठ और बुलंदशहर के गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव शासन में लंबित है।
उच्च शिक्षा, चिकित्सा और पर्यटन सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता है।
ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। मैं हापुड़ बोल रहा हूं... दिल की कुछ सलवटें आपसे खोल रहा हूं। आज मेरा जन्मदिन है। पूरे 15 साल का हो चुका हूं। इस सफर में राजनीति, शिक्षा, पर्यटन और उद्योग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की है।
जन्म के दो साल बाद ही मेरा नाम बदल दिया गया, लेकिन नाम बदलने के बाद भी मैंने अपनी विकास यात्रा जारी रखी। अब बाल्यकाल से निकलकर किशोरावस्था की ओर बढ़ रहा हूं। ऐसे में दिल में एक पुरानी कसक अब भी है।
मुझको चाहिए विस्तार
मेरा जन्म 28 सितंबर 2011 को हुआ था। बचपन में मेरा नाम पंचशीलनगर रखा गया। दो साल बाद नामकरण बदला और मैं हापुड़ बन गया। मेरे भाई गाजियाबाद ने तो अपना हिस्सा मुझे दे दिया, लेकिन मेरठ और बुलंदशहर से मिलने वाला हिस्सा आज भी इंतजार में है।
प्रस्ताव था कि मेरठ के खरखौदा विकासखंड के 27 गांव और बुलंदशहर के 89 गांव मेरे हिस्से में आएंगे। इन गांवों के शामिल होने से मेरा क्षेत्रफल बढ़ेगा और विकास की योजनाओं को भी विस्तार मिलेगा। मगर साल दर साल गुजरते गए और मेरा इंतजार खत्म नहीं हुआ।
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ऐसा नहीं है कि मैंने इन 15 वर्षों में कुछ हासिल नहीं किया। मेरे ब्रजघाट को हरिद्वार की तर्ज पर विकसित करने की दिशा में कदम बढ़े हैं। प्रदेश का सबसे छोटा जिला होने के बावजूद उद्योग और निर्यात के क्षेत्र में मैंने अपनी क्षमता दिखाई है। फिर भी जन्मदिन पर सिर्फ अपनी उपलब्धियां गिनाकर मैं खुश नहीं हो सकता।
मेरी कुछ जरूरतें भी हैं। उच्च शिक्षा के बड़े संस्थान चाहिए, बेहतर चिकित्सा सुविधाएं चाहिए और पर्यटन के लिए ऐसी सुविधाएं चाहिए, जिनसे ब्रजघाट और गढ़मुक्तेश्वर आने वाला श्रद्धालु सिर्फ कुछ घंटे नहीं, बल्कि ठहरकर मेरी खूबसूरती देखे।
