विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हापुड़ में हाईवे पर फर्राटा भरती रफ्तार बन रही काल, 209 मौतों के बाद भी कागजों में सिमटी रोड सेफ्टी

Published: Sat, 26 Sep 2026 04:09 PM (IST)

हापुड़ में सड़क हादसों का सिलसिला जारी है, इस साल 341 बड़े हादसों में 209 लोगों की मौत हुई, जो ...और पढ़ें

एक्सीडेंट में क्षतिग्रस्त वाहन। जागरण आर्काइव

एक्सीडेंट में क्षतिग्रस्त वाहन। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हापुड़ में इस साल 209 लोगों की सड़क हादसों में मौत।

  2. पिछले साल की तुलना में मौतों में 18.6% की वृद्धि दर्ज।

  3. तेज रफ्तार, गलत दिशा हादसों के प्रमुख कारण बने।

ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। सड़क पर मौत का सिलसिला जारी है और जिम्मेदार महकमे कागजी सुरक्षा में उलझे हैं। हाईवे पर तेज रफ्तार, गलत दिशा, खतरनाक ओवरटेक और सड़क किनारे खड़े वाहनों से हादसे लगातार हो रहे हैं, लेकिन एनएचएआइ, यूपीडा, परिवहन विभाग, पीडब्ल्यूडी और पुलिस इन जोखिमों पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं।

इस साल अब तक 341 बड़े सड़क हादसों में 209 लोगों की मौत और 853 लोग घायल हो चुके हैं। इनमें 400 से अधिक घायलों की हालत गंभीर रही। मौतों का आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि से 18.6 प्रतिशत अधिक होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हादसे दर हादसे के बावजूद यदि जोखिम वाले स्थानों की पहचान, खतरनाक कटों पर नियंत्रण, सड़क किनारे खड़े वाहनों पर कार्रवाई और रफ्तार पर प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी उतना ही बड़ा है। आखिर 209 मौतों के बाद भी विभागों की जिम्मेदारी रोड सेफ्टी की बैठकों से बाहर नहीं निकल पा रही है।

लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर जानलेवा सफर

दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर सफर सुहाना नहीं है। यहां पर सफर जानलेवा हो रहा है। हाईवे पर सड़कों की स्थिति सुधरने के साथ ही हादसों की संख्या बढ़ गई है। दो साल में उनउच पर हापुड़ के सीमाक्षेत्र में ही 67 लोगों की माैत का कारण हाईसपीड आया है।

आइ-रेड के आंकड़ों के अनुसार हाईवे पर हादसों का मुख्य कारण हाईस्पीड है। यहां पर वाहनों की गति 120-130 किमी सामने आ रही है। ऐसे में एकाएक सामने दूसरा वाहन आने पर नियंत्रण नहीं हो पाता है। जिससे हादसा हो जाता है। स्थिति यह है कि 61 प्रतिशत एक्सीडेंट ओवर-स्पीड के कारण हो रहे हैं।

जिले में पांच साल के सड़क हादसों पर नजर डालें तो इनमें कमी होने की बजाय बढ़ोतरी ही हुई है। पांच साल में सड़कों की हालत में सुधार हुआ है और बाईपास भी बनें हैं। हादसे होने के कारणों का सर्वे करने वाली संस्था आईरेड के अनुसार हादसों का स्थान भी बदला है।

यह भी पढ़ें- पिता की मौत के बाद उठा मां का साया, 11 साल की मासूम बेसहारा; सड़क हादसे में गई इशू की जान

यह भी पढ़ें- जमशेदपुर में सड़क हादसे में मंत्री दीपिका पांडेय की बेटी के निधन के बाद गोड्डा में शोक

दरअसल पहले जहां ब्लैक स्पाट पर ज्यादा हादसे होते थे, वहीं ब्लैक स्पाट बनने का कारण भी होता था। ब्लैक स्पाट को रांग इंजीनियरिंग, दृश्यता, शार्प कट, अवैध कट और बोटलनेक के आधार पर निर्धारित किया जाता था। इन कारणों को दूर करके ब्लैक स्पाट को रिमूव कर दिया जाता था। उसके बाद संबंधित क्षेत्र में हादसों की संख्या भी नियंत्रित हो जाती थी।

सड़क हादसों की चिंताजनक स्थिति

  • इस साल 341 बड़े सड़क हादसे हुए, जिनमें 209 लोगों की हुई मौत।
  • मौतों का यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 18.6 प्रतिशत ज्यादा है।
  • इनके अलावा 843 लोग घायल हुए, जिनमें 400 से ज्यादा की हालत गंभीर रही।
  • तेज रफ्तार, गलत दिशा, अचानक ओवरटेक और सड़क किनारे खड़े वाहन बन रहे हादसों के मुख्य कारण।
  • एनएचएआई, यूपीडीए, परिवहन विभाग, पीडब्ल्यूडी और पुलिस नहीं करा पा रहे सुरक्षा नियमों का पालन।

वर्ष 2019 से अब तक सड़क दुर्घटनाओं का विवरण

वर्ष दुर्घटनाएं घायल मौत
2019 364 303 252
2020 307 235 183
2021 304 244 186
2022 333 250 210
2023 360 215 264
2024 377 312 268
2025 421 342 298

2026 में हादसों के मुख्य कारण

ओवरस्पीड 56%
ओवरलोड 12%
नशा 17%
ब्लैक-डार्क स्पाट 15%

सबसे चिंताजनक तस्वीर दिल्ली-लखनऊ हाईवे की है। हाईवे पर होने वाले हादसों में 61 प्रतिशत का प्रमुख कारण ओवरस्पीड है। हाईवे पर निर्धारित गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन सर्वे में कई स्थानों पर वाहनों की गति 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक सामने आई है। हमको हर हाल में वाहनों की स्पीड नियंत्रित करनी होगी।

-

रमेश कुमार चौबे- एआरटीओ- प्रवर्तन