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हापुड़: DIG का प्लान फेल, महाराणा प्रताप जयंती पर भड़की हिंसा; दहशत से घरों में कैद हुए लोग

Published: Sun, 10 May 2026 04:08 PM (IST)

हापुड़ में महाराणा प्रताप जयंती शोभा यात्रा के दौरान संवेदनशील क्षेत्र में पथराव और हिंसा भड़क गई, जिससे कई लोग घायल हुए और बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ हुई।

हिंसा के दौरान मची भगदड़। जागरण

हिंसा के दौरान मची भगदड़। जागरण

HighLights

  1. हापुड़ में महाराणा प्रताप जयंती शोभा यात्रा पर पथराव।

  2. डीआईजी का सुरक्षा प्लान विफल, पुलिस बल अपर्याप्त।

  3. देहरा क्षेत्र में हिंसा, दो दर्जन से अधिक लोग घायल।

केशव त्यागी, हापुड़। महाराणा प्रताप जयंती का पावन अवसर। वीर शिरोमणि की जयंती मनाने के लिए हजारों श्रद्धालु उत्साह से भरे सड़कों पर निकले। भव्य शोभा यात्रा में करीब छह हजार लोग शामिल थे।

नारों से गूंज रही सड़कें, शौर्य की गाथाएं गाती भीड़, सब कुछ सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक था। लेकिन जैसे ही यात्रा संवेदनशील साठा चौरासी क्षेत्र के देहरा इलाके से गुजरी, तभी कुछ युवकों के बीच मामूली कहासुनी ने पूरे माहौल को उपद्रव की आग में झोंक दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उपद्रवियों ने सड़क निर्माण के लिए डाले गए पत्थरों को हथियार बना लिया। आधे घंटे तक लगातार पथराव चला। वाहनों से लेकर दुकानों के शीशे चकनाचूर हो गए, प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ हुई, कई दुकानदारों ने लूटपाट के आरोप लगाए।

उधर, सड़क पर बिखरे पत्थर, चप्पलें, जूते और खून से लथपथ लोग भागते नजर आए। तीन किलोमीटर तक भगदड़ मचती रही। हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों में कैद हो गए। खिड़कियों से झांकते हुए वह इस मंजर देखते रहे। दिलों में दहशत बैठ गई। अगर हिंसा भड़क जाती तो कई निर्दोष जानें चली जातीं।

नाकामी... सुरक्षा में थे 20 से 25 पुलिसकर्मी

यह घटना महज एक दुर्घटना नहीं है बल्कि, नाकामी और संवेदनशील इलाकों में शोभा यात्राओं की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही उदासीनता का जीता-जागता प्रमाण है। डीआइजी कलानिधि नैथानी द्वारा तैयार किया गया सुरक्षा प्लान कागजी साबित हुआ। इतनी बड़ी यात्रा के लिए महज 20 से 25 पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। छह हजार श्रद्धालुओं की सुरक्षा का जिम्मा मुट्ठी भर जवानों पर छोड़ना प्रशासन की समझदारी है या जानबूझकर की गई लापरवाही?

नाकामी की लकीर पीटते दिखे जिम्मेदार

घटना के करीब आधे एसपी आधे घंटे बाद एसपी कुंवर ज्ञानंंजय सिंह मौके पर पहुंचे। वहीं डीएम कविता मीना 45 मिनट बाद सुध ले पाईं। इससे पहले लाठीचार्ज कर पुलिस ने किसी तरह हालात पर काबू पा लिया था।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उपद्रवियों में पुलिस का कोई खौफ नहीं दिखा। वह पुलिस के सामने बेखौफ पथराव करते रहे। सड़क निर्माण के डाले गए पत्थर आसानी से उपलब्ध थे, जैसे उपद्रव के लिए पहले से इंतजाम कर रखा गया हो। उपद्रव के दौरान दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

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स्थानीय लोगों ने बताया कि सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं था। तोड़फोड़ में हुई हानि की भरपाई कैसे होगी। डीआईजी का प्लान फेल होने का मतलब साफ है। या तो सुरक्षा आकलन गलत था या फिर इंतजाम जानबूझकर कमजोर रखे गए। दोनों ही स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों जवाबदेह हैं। इतनी बड़ी भीड़ वाली यात्रा के लिए न्यूनतम कितनी फोर्स होनी चाहिए, यह बुनियादी बात समझ लेनी चाहिए थी।