महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा के दौरान हिंसा, यूट्यूबर्स अक्कू और युद्धी की भूमिका से बढ़ सकता था बवाल
हापुड़ के धौलाना में महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा में यूट्यूबर्स अक्कू शर्मा और युद्धी ठाकुर की संभावित उपस्थिति से मामला और गंभीर हो सकता था।
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हिंसा के बाद मौके पर फोर्स तैनात। जागरण
जागरण संवाददाता, हापुड़। हापुड़ के धौलाना क्षेत्र में महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा की आग में यूट्यूबर्स अक्कू शर्मा व युद्धी ठाकुर की उपस्थिति आग में घी डालने का काम कर सकती थी।
गनीमत रही कि दोनों के शोभायात्रा में शामिल होने से पहले उपद्रव हो गया। अगर, वह दोनों इससे पहले पहुंच जाते तो मामला ओर भी गंभीर हो सकता था। क्योंकि, विशेष समुदाय के लोगों ने कुछ दिन पहले दोनों को शोभा यात्रा में शामिल होने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
यूट्यूबर्स अक्कू शर्मा और युद्धी ठाकुर की भूमिका
घटना की पृष्ठभूमि में स्थानीय स्तर पर यूट्यूबर्स अक्कू शर्मा और युद्धी ठाकुर का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ महीने पहले देहरा गांव के कुछ युवकों के साथ इन दोनों यूट्यूबर्स के बीच सोशल मीडिया पर एक विशेष समुदाय के खिलाफ पोस्ट व वीडियो डालने को लेकर विवाद हुआ था।
इन यूट्यूबर्स द्वारा भड़काऊ वीडियो और कमेंट पोस्ट किए, जिसके बाद गांव में तनाव बढ़ गया था। देहरा के कुछ युवकों ने दोनों यूट्यूबर्स को गांव में दिखाई न देने पर धमकी दी थी। महाराणा प्रताप जयंती पर दोनों यूट्यूबर्स शोभायात्रा में शामिल होने की घोषणा कर चुके थे। उधर, दूसरे पक्ष ने ऐसा करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी।
दोनों यूट्यूबर्स पहुंच जाते तो बढ़ता मामला
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दोनों यूट्यूबर्स यात्रा स्थल पर पहुंच जाते तो बवाल और बड़ा रूप ले सकता था। हालांकि, बवाल भड़कने के बाद दोनों यूट्यूबर्स घटना स्थल से लगभग दो किलोमीटर पहले एक गांव में रुक गए और आगे नहीं बढ़े।
इस घटना ने एक बार फिर त्योहारों के दौरान शोभायात्राओं को लेकर उठने वाले संवेदनशील मुद्दों को रेखांकित किया है। अक्कू शर्मा और युद्धी ठाकुर जैसे यूट्यूबर्स के इंटरनेट मीडिया कंटेंट को लेकर पहले से ही विशेष समुदाय के लोगों में नाराजगी थी, जो इस बवाल की एक बड़ी वजह बन सकती थी। ऐसे में स्थानीय प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
लाख टके का एक सवाल, आखिर छतों पर कहां से आए पत्थर
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो रैली में पहले छतों से पत्थर फेंके गए। एक समुदाय की छतों से पत्थर फेंके जाने पर रैली में शामिल युवा आक्रोशित हो गए और देखते-देखते हालात बेकाबू हो गए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर छतों पर पत्थर कहां से पहुंचे? क्या पत्थरों को छतों पर एकत्र करके रखा गया था?
यदि ऐसा था तो पुलिस द्वारा पहले से इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। ड्र्रोन से क्षेत्र की छतों की पड़ताल क्यों नहीं कराई गई। जब दिल्ली सहित कई स्थानों पर हुए दंगों में यह सामने आ चुका है कि छतों पर पहले से पत्थर एकत्र करके रखे जाते हैं, तब इस ओर ध्यान नहीं देना पुलिस की बड़ी चूक को उजागर करता है। हालांकि, अभी पुलिस की जांच जारी है। छतों पर पत्थर एकत्र करने को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। इस मामले में कई परिवारों पर कार्रवाई हो सकती है।
