हापुड़: पिलखुवा टोल पर चेकिंग के दौरान ‘वसूली’ करते दिखा वर्दीधारी, सोशल मीडिया पर Video वायरल
पिलखुवा टोल के पास वाहन चेकिंग के नाम पर कथित वसूली का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा ...और पढ़ें

हापुड़ में चेकिंग की आड़ में वसूली। (वीडियो ग्रैब)
HighLights
पिलखुवा टोल के पास वसूली का वीडियो प्रसारित हुआ।
वर्दीधारी व्यक्ति पर रुपये लेने का आरोप लगा।
पुलिस महकमे में खलबली, जांच के आदेश दिए गए।
जागरण संवाददाता, हापुड़। पिलखुवा टोल के पास वाहन चेकिंग के नाम पर कथित वसूली का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई है। करीब कुछ सेकेंड के वीडियो में वर्दी पहने एक व्यक्ति किसी व्यक्ति से रुपये लेता दिखाई दे रहा है।
इंटरनेट मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि वीडियो में दिखाई दे रहा वर्दीधारी पिलखुवा थाने में तैनात पुलिसकर्मी है। हालांकि, दैनिक जागरण वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
रिश्वत लेते वर्दीधारी का बनाया वीडियो
प्रसारित वीडियो के साथ किए जा रहे दावे के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने चेकिंग के दौरान 15 साल पुराने वाहन को रोक लिया था। वाहन को छोड़ने के एवज में रुपये लिए जाने का आरोप है। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने कथित रूप से रुपये लेते हुए वर्दीधारी का वीडियो बना लिया।
बाद में यह वीडियो इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर प्रसारित कर दिया गया। वीडियो सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वाहन नियमों के उल्लंघन के कारण रोका गया था तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
वहीं, यदि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति पुलिसकर्मी है तो उससे रुपये लेने की स्थिति क्यों बनी? हालांकि, इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
टोल के आसपास चेकिंग पर भी सवाल
पिलखुवा टोल क्षेत्र में वाहनों की चेकिंग और कार्रवाई को लेकर पहले भी पुलिस की भूमिका चर्चा में रही है। ऐसे में वर्दीधारी के रुपये लेते दिखाई देने वाले वीडियो ने चेकिंग की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खासकर पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर होने वाली चेकिंग में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब पुलिस अधिकारियों के सामने वीडियो की सत्यता जांचने के साथ ही यह पता लगाने की चुनौती है कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति कौन है और घटना कब की है।
जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय मानी जा सकती है।
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