हापुड़ गंगा मेले में पहली बार बसेगी टेंट सिटी, स्विस से महाराजा कॉटेज तक की मिलेगी सुविधा; ऐसे करें बुकिंग
हापुड़ के कार्तिक गंगा मेले में पहली बार टैंट सिटी बसाई जाएगी, जिसमें श्रद्धालुओं को स्विस, लग्जरी और महाराजा कॉटेज ...और पढ़ें

गंगातट पर लगा हुआ स्नान मेला। जागरण आर्काइव
HighLights
पहली बार हापुड़ गंगा मेले में टैंट सिटी का निर्माण।
श्रद्धालुओं को स्विस, लग्जरी और महाराजा कॉटेज में ठहरने की सुविधा।
ऑनलाइन बुकिंग द्वारा आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवास उपलब्ध होंगे।
ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। कार्तिक गंगा मेले में इस बार श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए बेहतर और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। पहली बार मेला स्थल पर टैंट सिटी बसाई जाएगी, जिसमें स्विस, लग्जरी और महाराजा काॅटेज बनाए जाएंगे। यहां ठहरने वाले श्रद्धालुओं को फूड कोर्ट, टीवी, इंटरनेट, मोबाइल चार्जिंग के साथ इंडियन और इंग्लिश टायलेट की सुविधा भी मिलेगी। जिला पंचायत ने टैंट सिटी के लिए अलग-अलग सेक्टर निर्धारित किए हैं।
इसी सप्ताह शुरू हो जाएगी बुकिंग
श्रद्धालु मेला स्थल की साइट पर ‘बुक-ए-टैंट’ के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। प्रशासन एक से चार दिन तक ठहरने के लिए शुल्क निर्धारित करने की तैयारी में है। इसी सप्ताह इनकी बुकिंग आरंभ कर दी जाएगी।
किसी भी हाॅल में मैनुअल बुकिंग की सुविधा इस साल प्रदान नहीं की जाएगी। इससे मेला क्षेत्र में परिवार के साथ आने वालों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह सुविधा कुंभ की तर्ज पर प्रदान की जा रही है।
गंगातट पर बसेगा तंबुओं का शहर
जिला पंचायत के एएमए शिशुपाल शर्मा ने बताया कि गंगा मेले में मुख्य रूप से तीन प्रकार के श्रद्धालु आते हैं। इनकी जरूरतों को देखते हुए ही तट पर वैसी व्यवस्था की जाएगी...
- एक बड़ा वर्ग यहां पर गंगा स्नान की श्रद्धा के साथ ही मस्ती और आनंद के लिए आता है, जो लगभग एक सप्ताह पहले ही आ जाता है और मुख्य स्नान के कई दिन बाद तक रहता है। यह लंबे क्षेत्र में अपने तंबू लगाते हैं। ऐसे में गंगा तट पर तंबुओं का बड़ा शहर बस जाते हैं। यहां पर खाना बनाने से लेकर मनोरंजन तक के सभी साधन उपलब्ध रहते हैं। यह वर्ग जमकर मेले का लुत्फ उठाता है। इसमें ज्यादातर युवा वर्ग होता है।
- दूसरा वर्ग गंगा की श्रद्धा के चलते आता है। यह गंगा स्नान से पहले दिन आ जाते हैं और मुख्य स्नान में भाग लेने के बाद अगले दिन लौट जाते हैं। यह न तो अपने साथ टैंट-तंबू लेकर आते हैं और न ही गंगा तट पर इनके ठहरने की कोई सही व्यवस्था होती है।
- तीसरा वर्ग भी गंगा मेले में आता है। यह देश के कई प्रांतों से आने के साथ ही विदेश से भी आते हैं। इनको अपने दिवंगत स्वजन का दीपदान करना होता है। यह दीपदान से पहले दिन दिन आते हैं और दीपदान करने के बाद गंगा स्नान करने से पहले ही लौट जाते हैं।
शिशुपाल शर्मा ने बताया कि प्रशासन द्वारा टैंट सिटी दूसरे दोनों वर्ग के श्रद्धालुओं को ध्यान में रखकर बसाया जा रहा है। यह अपने साथ परिवार के सदस्यों काे लाते हैं, लेकिन ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं होती है। इनको मेले में पहली बार सुसज्जित व मूलभूत सुविधाओं से पूर्ण टैंट आवास मिलेगा।

मेले में उमड़ेंगे 35 लाख से अधिक श्रद्धालु
| मेले का क्षेत्रफल | 9 वर्ग किमी |
| मेले में श्रद्धालु | 35 लाख से ज्यादा |
| ठहने का समय | 12 दिन |
| आने वाले श्रद्धालु | 5 राज्यों से |
जितना आरामदायक होगा टैंट, उतना लगेगा शुल्क
प्रकार | क्षेत्रफल | 1 दिन का रेट (रु. में) | 5 दिन का रेट (प्रतिदिन रु. में) |
|---|---|---|---|
लग्जरी आवास | 28 वर्ग मीटर | 4,980 | 3,000 |
महाराजा | 40 वर्ग मीटर | 8,980 | 5,000 |
कैसे कर सकेंगे बुकिंग?
इन दोनों प्रकार के टैंट वाले आवासों की बुकिंग 'जीएआरएच जीएएनजीए एमईएलए डाॅट काॅम' पर जाकर की जा सकती है। इस बार बुकिंग पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। मैनुअल बुकिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
"यह हमारा पहला प्रयोग है। केवल 20-20 आवास आरंभ में बना रहे हैं। इसमें खर्च से भी कम धनराशि ली जा रही है। उम्मीद है यह योजना श्रद्धालुओं को पसंद आएगी। उसके बाद अगले साल इनकी संख्या बढ़ा दी जाएगी।"
-कविता मीना, जिलाधिकारी।
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