जोड़ों के दर्द को न समझें केवल उम्र का असर, यह हो सकता है गठिया; समय पर इलाज कराना क्यों जरूरी?
जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न को बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। विश्व गठिया ...और पढ़ें
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प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
जोड़ों का दर्द, सूजन गठिया के लक्षण हो सकते हैं।
समय पर जांच और उपचार से स्थायी नुकसान से बचाव।
हापुड़ में चिकित्सक ने दी नियमित व्यायाम और संतुलित आहार की सलाह।
संवाद सहयोगी, हापुड़। जोड़ों में दर्द, सूजन और सुबह उठते ही हाथ-पैरों में अकड़न की समस्या को अक्सर लोग बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकती है।
गठिया के कुछ प्रकारों में समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने से जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
विश्व गठिया रोग दिवस
आज विश्व गठिया रोग दिवस है। इस अवसर पर लोगों को बीमारी के लक्षण पहचानने और समय पर उपचार कराने के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
आज के समय में गठिया केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। कम उम्र के लोग भी इसके विभिन्न प्रकारों से प्रभावित हो सकते हैं।
क्या होता है रूमेटाइड आर्थराइटिस?
गठिया जिसे आस्टियोआर्थराइटिस भी कहा जाता है। इसमें जोड़ों के कार्टिलेज में बदलाव के कारण दर्द और गतिविधियों में परेशानी हो सकती है, वहीं रूमेटाइड आर्थराइटिस प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी बीमारी है।
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रूमेटाइड आर्थराइटिस में जोड़ों में सूजन और अकड़न की शिकायत हो सकती है। सुबह के समय लंबे वक्त तक अकड़न बने रहना, जोड़ों में बार-बार सूजन आना या दर्द के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित होना चिकित्सकीय जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है।
समय पर जांच कराना क्यों जरूरी?
जोड़ों में लगातार दर्द या सूजन होने पर डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए। बिना सलाह लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रित रखना और संतुलित खानपान जोड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हैं।
बढ़ रही मरीजों की संख्या?
दस्तोई रोड स्थित जिला अस्पताल में फिजिशियन डाक्टर मनोज शर्मा की ओपीडी में जोड़ों का दर्द, सूजन, हाथ-पैरों में अकड़न समेत अन्य शिकायत लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में वे बीमारी की स्थिति के अनुसार व्यायाम करने, समय पर जांच और उचित उपचार से की सलाह देते हैं।
कई बार लोग इसे उम्र बढ़ने का सामान्य असर मानकर उपचार में देरी कर देते हैं। समय पर जांच से बीमारी की पहचान कर उचित उपचार शुरू किया जा सकता है। लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए।
-डाक्टर मनोज शर्मा, फिजिशियन, जिला अस्पताल
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