गंगा का उफान थमा तो बढ़ी कटान की चिंता, हापुड़ में गंगा किनारे खड़ी फसलों पर मंडराया संकट
गढ़मुक्तेश्वर में गंगा का जलस्तर घटने से बाढ़ प्रभावित गांवों को राहत मिली है, लेकिन नदी के कटान से किनारे ...और पढ़ें

गढ़मुक्तेश्वर में बहती गंगा। जागरण आर्काइव
HighLights
गंगा का जलस्तर घटने से गांवों को बाढ़ से मिली राहत।
नदी के कटान से किनारे खड़ी फसलों पर मंडराया संकट।
पुष्पावती पूठ में मंदिर-मकानों को भी कटान से खतरा।
संवाद सहयोगी, गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। कई दिनों तक येलो अलर्ट के निशान से ऊपर रहने के बाद गंगा अब वापस अपने पुराने स्वरूप की तरफ जा रही है। इससे गंगा किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों को काफी राहत मिली है तो वहीं कटान के कारण गंगा किनारे खड़ी फसल पर संकट मंडरा रहा है।
गंगा में आई बाढ़ के कारण गढ़मुक्तेश्वर के गुलालपुर, फरीदपुर एतमोली, लठीरा, चक लठीरा, काकाठेर की मंढैया, शेरा कृष्णावाली मंढैया, गढ़ावली आदि गांवों के पास जलभराव हो गया था। इसी दौरान गांवों के रास्तों पर पानी भरने के बाद लोगों को अावागमन में भारी दिक्कत हो गई थी।
खड़ी फसल पर मंडरा रहा संकट
सड़कों पर पानी भरने के कारण नाव एवं ट्रैक्टर ट्राली ही सहारा रह गया था। 20 दिन पूर्व गंगा का जलस्तर 198.92 मीटर तक पहुंच गया था जो खतरा निशान से मात्र आठ सेंटी मीटर नीचे रह गया था।
इसके बाद गंगा का जलस्तर कम हुआ तथा पिछले शुक्रवार को गंगा ने एक बार फिर उफान भरा, जिसके बाद गंगा का जलस्तर 198.82 मीटर तक पहुंच गया था। लेकिन शनिवार को गंगा का जलस्तर 198.45 मीटर पर पहुंच गया। इसके बाद लोगों को बाढ़ से राहत मिलनी शुरू हो गई।
गांवों के बाहर एवं जंगलों में भरा पानी वापस गंगा की तरफ जाने लगा है। इसी के साथ गंगा में कटान होना शुरू हो गया है, जिसके कारण गंगा किनारे खड़ी फसल पर संकट मंडराने लगा है।
स्थिति पर प्रशासन की नजर
वहीं जलभराव के कारण पहले ही सैकड़ों बीघा दलहन, चारा एवं सब्जी की फसल खराब हो चुकी है, जिसके कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। पुष्पावती पूठ में गंगा कटान के कारण मंदिर एवं मकानों पर खतरा मंडरा रहा है।
एसडीएम श्रीराम यादव का कहना है कि गंगा का जलस्तर काफी कम हुआ है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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