हमीरपुर में सिस्टम को शर्मसार करती तस्वीर... सड़क न होने से घुटनों तक भरे पानी से गुजरी बुजुर्ग की अर्थी
मौदहा के खंडेह गांव में जल निकासी न होने से एक बुजुर्ग की अर्थी को घुटनों तक भरे गंदे पानी ...और पढ़ें
HighLights
मौदहा के खंडेह गांव में जल निकासी की समस्या
बुजुर्ग की अर्थी घुटनों तक पानी से गुजरी
ग्रामीणों ने तत्काल सड़क व नाली सुधार की मांग की
संवाद सहयोगी, मौदहा(हमीरपुर)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से एक बेहद दर्दनाक और शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर ने न सिर्फ विकास के दावों की पोल खोल दी है बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली को भी उजागर कर दिया। इलाके में जलभराव की समस्या के कारण ग्रामीणों को एक बुजुर्ग की अर्थी को घुटनों तक भरे गंदे पानी से होकर ले जाना पड़ा। पानी के बीच से गुजरती अंतिम यात्रा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
विकासखंड के खंडेह गांव में जल निकासी और पक्के रास्ते के अभाव में ग्रामीणों को एक बुजुर्ग की अर्थी घुटनों तक भरे गंदे पानी और कीचड़ से निकालकर श्मशान घाट ले जानी पड़ी। बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को उजागर करता इस घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया में जमकर प्रचलित हो रहा है। फिलहाल दैनिक जागरण किसी भी प्रचलित वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। वहीं इस अव्यवस्था से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। वहीं इस संबंध में बीडीओ का कहना है कि बससात है तो दलदल रहेगा न, फिर भी व्यवस्था की जाएगी।
रामजानकी मंदिर के पास की गली में भीषण जलभराव
खंडेह गांव निवासी 73 वर्षीय जागेश्वर यादव के निधन के बाद जब स्वजन अंतिम संस्कार के लिए निकले, तो रामजानकी मंदिर के पास वाली गली में भीषण जलभराव मिला। ग्रामीण अनुज कुमार दुबे और मृतक के पुत्र शुभम यादव के ने बताया कि सुशील प्रजापति के मकान से संतोष विश्वकर्मा के मकान तक का लगभग 150 मीटर रास्ता लंबे समय से जलभराव और दलदल की समस्या से ग्रस्त है। वर्षा के बाद स्थिति और विकराल हो गई, जिससे ग्रामीणों को बेहद दुखद और मुश्किल हालात में अर्थी को कंधों पर संभालकर पानी से गुजरना पड़ा।
तत्काल जल निकासी की व्यवस्था की मांग
स्थानीय नागरिक सत्यम और आशाराम सहित अन्य ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से गांव में तत्काल जल निकासी की व्यवस्था कराने और जर्जर रास्ते को दुरुस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उन्हें रोजमर्रा के आवागमन में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस संबंध में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि कामता प्रसाद ने बताया कि संबंधित रास्ता काफी खुला हुआ है और बारिश के दौरान आसपास के खेतों का पानी भी वहीं से बहकर आता है, जिसके कारण वहां अत्यधिक जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
वहीं खंड विकास अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि बरसात है तो दलदल रहेगा न, अभी तक यह सड़क क्यों नही बनी संबंधित सचिव से जानकारी की जाएगी, फिर भी बरसात बाद इस सड़क को कार्ययोजना में डालकर बनवाया जाएगा।
11 अगस्त को सामने आया था एक ऐसा ही मामला
हमीरपुर में बदहाली की कुछ ऐसी ही तस्वीर 11 अगस्त को भी सामने आई थी। विकासखंड कुरारा के चंदूपुर गांव के बच्ची के डेरा से लेकर हमीरपुर तक की करीब डेढ़ किमी. की कच्ची सड़क दलदल बन चुकी थी। करीब 1600 की आबादी को निकलने चलने में दिक्कत होती है। बच्चे कीचड़ वाला रास्ता होने के कारण पढ़ाई को स्कूल नहीं जा पाते हैं और बीमार और गर्भवती महिलाओं को लेने के लिए एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती है। इस समस्या से परेशान ग्रामीणों ने 11 अगस्त को गांव से लेकर कलेक्ट्रेट तक करीब पांच किलोमीटर तक पैदल तिरंगा यात्रा निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस प्रदर्शन के बाद ही आजादी के बाद पहली बार प्रशासन ने इस सड़क को बनवाना शुरू कर दिया।
