उत्तर प्रदेश का ऐसा शहर जहां दशहरा नहीं, दीपावली पर होता है रावण दहन; KBC में भी पूछा जा चुका है सवाल
यूपी का एक ऐसा शहर भी है जहां दशहरा के बजाय दीपावली की अमावस्या पर रावण दहन की 106 साल पुरानी अनूठी परंपरा है।

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HighLights
राठ में 106 साल से दीपावली पर होता है रावण दहन।
दशहरा पर रामलीला मैदान में जलभराव के कारण बदली परंपरा।
यह अनोखी परंपरा कौन बनेगा करोड़पति में भी चर्चित हुई।
संवाद सूत्र, हमीरपुर। देशभर में विजयादशमी पर रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, लेकिन बुंदेलखंड के राठ में रामलीला की परंपरा कुछ अलग है। यहां दशहरा पर नहीं, बल्कि दीपावली की अमावस्या की शाम रावण दहन होता है।
106 वर्षों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों और कस्बों से हजारों लोग रामलीला मैदान पहुंचते हैं। इस रामलीला की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो गई हैं। जिसकी तैयारी में समिति के लोग जुटे हुए हैं।
श्रीरामलीला मेला समिति के मंत्री सुरेश खेवारिया ने बताया कि वर्ष 1920 में सेठ हीरालाल अग्रवाल, धनीराम खेवारिया, महादेव बुधौलिया, उमाशंकर नगाइच, सकूर बेग, मंजूर बेग और विश्वनाथ नगाइच ने राठ में रामलीला मंचन की शुरुआत की थी। उस समय दशहरा पर्व के दौरान ही रामलीला और रावण दहन होता था।
बाद में रामलीला मैदान में जलभराव के कारण आयोजन दीपावली तक टालना पड़ा। इसके बाद यही व्यवस्था परंपरा बन गई। रामलीला समिति के मंत्री ने बताया कि राठ की भौगोलिक स्थिति ऐसी रही है कि बरसात के दौरान कस्बे और आसपास के क्षेत्रों का पानी रामलीला मैदान की ओर पहुंचता था। दशहरा तक मैदान में काफी जलभराव रहता था।
ऐसे में रावण दहन संभव नहीं हो पाता था। बुजुर्गों के निर्णय के बाद वर्ष 1926 में दीपावली की अमावस्या पर रावण दहन किया गया। इसके बाद से यही परंपरा लगातार चली आ रही है। रामलीला मैदान में जलभराव के कारण ही उनके परदादा स्व. धनीराम खेवारिया ने अपने आवास पर भरत मिलाप का मंचन कराया था। तब से आज तक भरत मिलाप उनके घर पर ही आयोजित होता आ रहा है।
शरद पूर्णिमा से शुरू हो जाता है रामलीला मेला
राठ में रामलीला मेले का आगाज शरद पूर्णिमा पर शंकर जी की छोटी बरात के साथ होता है। इसके पांच दिन बाद भगवान श्रीराम की भव्य बड़ी बरात यानी शोभायात्रा निकाली जाती है। इसमें आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचते हैं।
करीब एक माह तक चलने वाले मेले में समिति की ओर से विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दीपावली की अमावस्या की शाम रामलीला मैदान में दस सिर वाले रावण के पुतले का दहन किया जाता है। इससे पहले मंच पर श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का सजीव मंचन होता है। इसके बाद रावण के पुतले का दहन किया जाता है।
रामलीला में मुस्लिम भी निभाते थे राम-लक्ष्मण का किरदार
राठ की रामलीला सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि कस्बे की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल भी रही है। समिति के मंत्री के अनुसार पुराने समय में स्थानीय लोग ही राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न सहित रामलीला के अन्य पात्रों की भूमिका निभाते थे।
इनमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी विभिन्न किरदार निभाते थे। समय के साथ रामलीला का स्वरूप विस्तृत हुआ और अब श्री गिरिराज आदर्श रामलीला मंडल वृंदावन धाम, मथुरा की ओर से रामलीला का मंचन किया जा रहा है।
केबीसी में भी पहुंचा राठ के रावण दहन का किस्सा
राठ की अनूठी परंपरा की चर्चा देशभर में भी हो चुकी है। वर्ष 2019 में कौन बनेगा करोड़पति के सीजन-11 में सवाल पूछा गया था कि भारत में रावण दहन सबसे बाद में कहां होता है। इसके जवाब में हमीरपुर जनपद के राठ का नाम सामने आया था। इसके बाद राठ की दीपावली पर रावण दहन की परंपरा देशभर में चर्चित हुई।
