हमीरपुर में खाद संकट! सचिवों की हड़ताल से 46 सहकारी समितियों में ताले, किसानों को डीएपी के लाले
हमीरपुर में सचिवों की हड़ताल के कारण 46 सहकारी समितियों में खाद वितरण ठप है, जिससे किसानों को डीएपी की ...और पढ़ें

कुरारा में किसान का अंगूठा लगवाते खाद केंद्र प्रभारी। जागरण
HighLights
सचिवों की हड़ताल से 46 सहकारी समितियां बंद हैं
किसानों को डीएपी खाद के लिए भटकना पड़ रहा है
निजी दुकानों पर महंगी खाद खरीदने को मजबूर किसान
जागरण टीम, हमीरपुर। हमीरपुर की 46 सहकारी समितियों में सचिवों की हड़ताल के चलते सोमवार को ताले लटके रहे। सुबह डीएपी खाद मिलने की उम्मीद लेकर समितियों पर पहुंचे किसानों को निराश होकर लौटना पड़ा। समितियों में खाद उपलब्ध होने के बावजूद वितरण ठप है। इससे रबी की बोआई के बीच किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से खाद खरीदनी पड़ रही है। जहां उन्हें प्रति बोरी करीब 200 रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। हमीरपुर में तैनात 38 सचिवों की हड़ताल 22 अक्टूबर से जारी है। इसके चलते किसानों को गेहूं और चने की बोआई के लिए डीएपी खाद मिलने में परेशानी हो रही है।
किसानों का कहना है कि सरकारी समितियों से उचित दर पर खाद मिल जाती थी। लेकिन हड़ताल के कारण उन्हें निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। समितियों में खाद होने के बावजूद वितरण नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सुमेरपुर कस्बे की सहकारी समिति में भी कर्मचारियों की हड़ताल का असर दिखाई दे रहा है। यहां पिछले पांच दिनों से ताला लटका है।
रबी सीजन की बोआई के लिए किसान डीएपी और यूरिया की तलाश में भटक रहे हैं। खाद नहीं मिलने के कारण उन्हें खुले बाजार से अधिक दाम पर खरीदारी करनी पड़ रही है। डीएपी की बोरी जो समिति में 1350 रुपये में मिलती थी। वही अब बाजार में 1800 से 2000 रुपये तक बेची जा रही है।
यूरिया की बोरी भी सरकारी रेट 266.50 रुपये के बजाए 400 रुपये में मिल रही है। फिलहाल समिति के बाहर रोजाना तमाम किसान पहुंचकर जानकारी ले रहे हैं। लेकिन निराश होकर लौट जा रहे हैं। अक्टूबर का अंतिम सप्ताह और नवंबर का पहला पखवाड़ा रबी की बोआई के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
ऐसे में समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से बोआई में देरी होने की आशंका है। जिसका असर गेहूं और चने की पैदावार पर पड़ सकता है। इसी प्रकार कुरारा कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी डीएपी खाद की किल्लत बनी हुई है। साधन सहकारी समितियों से खाद का वितरण नहीं होने के कारण किसानों को एकमात्र पीसीएफ कृषक सेवा केंद्र पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
यहां टोकन के माध्यम से खाद वितरित की जा रही है। लेकिन सीमित मात्रा में खाद मिलने से किसानों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। किसानों की भीड़ केंद्र पर जुट रही है। खाद की कमी और वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों में नाराजगी भी देखी जा रही है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सहकारी समितियों में खाद वितरण जल्द शुरू कराया जाए। जिससे उन्हें उचित दर पर खाद मिल सके और रबी की बोआई प्रभावित न हो।
