विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हमीरपुर बेतवा पर निर्माणाधील पुल गिरने की पूरी हुई जांच, 6 श्रमिकों की मौत का जिम्मेदार 'मौसम', ठेकेदार ब्लैकलिस्ट

Published: Wed, 19 Aug 2026 10:08 PM (IST)

हमीरपुर में निर्माणाधीन बेतवा पुल का पांचवां पिलर गिरने से 6 लोगों की मौत का जिम्मेदार मौसम को माना गया ...और पढ़ें

28 मई की रात आए तूफान और बारिश के बीच धराशाई हुआ निर्माणाधीन बेतवा पुल। जागरण आर्काइव

28 मई की रात आए तूफान और बारिश के बीच धराशाई हुआ निर्माणाधीन बेतवा पुल। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. 28 मई की आधी रात पुल का एक पिलर और स्लैब ढह गई थी, छह श्रमिकों की गई थी जान

  2. भाजपा नेता के भाई की कंपनी करा रही थी निर्माण, जांच रिपोर्ट में निर्माण सामग्री को क्लीनचिट

  3. आईआईटी बीएचयू से आई जांच रिपोर्ट के बाद आंधी और पानी को बनाया गया घटना का जिम्मेदार

जागरण संवाददाता, हमीरपुर। आखिर वही हुआ, जिसकी आशंका थी। बेतवा नदी के निर्माणाधीन पुल का पिलर और स्लैब गिरने के लिए खराब मौसम को जिम्मेदार माना गया है। आईआईटी बीएचयू और शासन की टीमों ने जुलाई के पहले सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंप दी थी, इसमें कार्रवाई के नाम पर निर्माण एजेंसी द शेल्टर को सिर्फ ब्लैकलिस्ट किया गया है। 28 मई की आधी रात हुए हादसे में छह श्रमिकों की मौत हुई थी। कंपनी द शेल्टर कानपुर-बुंदेलखंड भाजपा के क्षेत्रीय मंत्री पवन प्रताप सिंह के छोटे भाई विजय प्रताप सिंह की है। घटना वाली रात करीब 60 किमी रफ्तार से हवा चल रही थी और तेज बारिश हुई थी।

सुमेरपुर क्षेत्र में बेतवा नदी पर मोराकांदर परसनी से कंडौर के बीच सेतु निगम 92 करोड़ रुपये से 700 मीटर लंबा पुल बनवा रहा था। निर्माण मई 2024 में शुरू हुआ था और इसे मार्च 2026 में पूरा होना था। बाद में समय सीमा बढ़ाकर दिसंबर 2026 कर दी गई थी। तय समय पर काम पूरा करने के लिए निर्माण एजेंसी जल्दबाजी में रात-दिन काम करवा रही थी। 28 मई की आधी रात तेज आंधी और बारिश के दौरान हादसा हो गया। कुल 13 पिलर बने थे, जिनमें मोराकंदर परसनी की ओर का पांचवां पिलर टूटकर गिरा और तीन टुकड़ों में बंट गया। उसके ऊपर ढाली गई स्लैब भी जमीन पर आ गिरी थी। हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों में चार बांदा और दो हमीरपुर के थे।

हादसे के बाद से मौसम को बताने लगे थे जिम्मेदार

अफसरों ने तभी मौसम को हादसे का जिम्मेदार बताना शुरू कर दिया था। हालांकि निर्माण एजेंसी के संचालक विजय प्रताप सिंह और सुपरवाइजर नितीश सचान के खिलाफ लापरवाही से कार्य और दूसरों के जीवन को खतरे में डालने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। सेतु निगम ने सहायक अभियंता जीते चौधरी को निलंबित कर उप परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश दिए थे।

सामग्री के सैंपल में कोई खामी नहीं मिली जांच टीम को

निर्माण में प्रयुक्त सरिया, सीमेंट, गिट्टी और मौरंग को जांच के लिए आईआईटी बीएचयू भेजा गया था। शासन ने सेतु निगम के संयुक्त महाप्रबंधक मिथिलेश कुमार की अगुआई में एक टीम जांच को भेजी थी। मिथिलेश कुमार ने बताया कि पुल में लगी सामग्री के सैंपल की रिपोर्ट जुलाई के प्रथम सप्ताह में आ गई थी। इसमें कोई खामी नहीं मिली।

hamirpur betwa bridge collapse

तूफान और बारिश के बीच धराशाई हुआ निर्माणाधीन बेतवा पुल। जागरण आर्काइव

ठेकेदार को नहीं कराना चाहिए था काम, सेतू निगम जांच में इस वजह से दोषी

सेतु निगम की जांच में तेज आंधी और वर्षा से पुल ढहने की पुष्टि हुई है। ठेकेदार को खराब मौसम में काम नहीं कराना चाहिए था। उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। पुल की स्टेबिलटी जांच कराने के बाद आगे के काम कराया जाएगा। आईआईटी बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. केके पाठक ने रिपोर्ट के संबंध में जानकारी देने से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शासन ही निर्णय लेगा।

मौसम अलर्ट के बावजूद मजदूरों को काम पर लगाया, रात में निर्माण की नहीं ली थी प्रशासन से अनुमति

छह लोगों की मौत मामले में सिर्फ मौसम को दोषी मानते हुए ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। जबकि मौसम खराब होने का अलर्ट, 40 से 60 किमी तक की रफ्तार से तेज हवा चलने की बात कही गई पर इसके बावजूद वहां मजदूरों को कार्य पर लगाया गया व अंधड़ चलने पर भी सभी नीचे नहीं उतारे गए। इसके साथ सुरक्षा कर्मी भी वहीं डटे रहे। रात में निर्माण स्थलों पर काम कराने से पहले किसी तरह की अनुमति प्रशासन से नहीं ली गई और न ही कोई सुरक्षा इंतजाम ही किए गए। पुलिस ने भी कई बार चक्कर लगाकर माइक से अनाउंस कर मौसम खराब होने की चेतावनी दी थी। ऐसे में जांच टीम ने ठेकेदार पर सिर्फ ब्लैक लिस्ट की कार्रवाई की संस्तुति की।

hamirpur betwa bridge collapse

कुछ सदस्यों ने निर्माण सामग्री को घटिया बताया था

बेतवा पर निर्माणाधीन पुल के गिरने से उम्मीदें तो चकनाचूर हुई हीं, छह परिवारों के कमाने वाले भी चले गए। इतनी बड़ी घटना में निर्माण एजेंसी को लापरवाह मानकर सिर्फ ब्लैकलिस्ट किया गया। जांच रिपोर्ट में आंधी और पानी को ही पुल ढहने की घटना का जिम्मेदार बताया गया है। जबकि जांच करने आई टीमों के कुछ सदस्यों ने निर्माण सामग्री को घटिया बताया था।

मौसम की आड़ में घटनाक्रम पर मिट्टी

दैनिक जागरण की पड़ताल में भी जंग लगी सरिया और खुले में सीमेंट रखी मिली थी। कुल मिलाकर मौसम की आड़ में पूरे घटनाक्रम पर मिट्टी डाल दी गई। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सेवानिवृत्त सहायक अभियंता एके शुक्ल कहते हैं कि सरकार, शासन और प्रशासन को अपनी छवि की चिंता होती है। जिस हालात में पुल गिरा था, उसमें केवल मौसम को दोष देना उचित नहीं होगा। फिलहाल मै इस रिपोर्ट पर यकीन नहीं कर सकता हूं, लेकिन इससे ज्यादा कुछ कह भी नहीं सकता।

hamirpur betwa bridge collapse

80 किमी.की हवा के अलर्ट के बाद भी आंधी में करवाया गया था मजदूरों से काम

28 मई की रात जब घटना हुई थी, तब मौसम विभाग ने अलर्ट भी जारी किया था। मौसम विभाग के अनुसार 80 किमी.प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने का संकेत दिया गया था। इसके बाद भी ठेकेदार के द्वारा मजदूरों से कड़कड़ाती बिजली और आंधी पानी के बीच काम कराया जा रहा था और इस लापरवाही के चलते छह लोगों की जान चली गई। लेकिन अभी तक घटना के मुख्य दोषियों के बारे में भी कुछ भी नहीं पता लग सका है।

बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के 55 फीट ऊपर काम कर रहे थे मजदूर

पुल निर्माण में लगे मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के 55 फीट ऊपर काम करवाया जा रहा था। घटना के बाद जब मजदूरों ने सारी बात बताई तो अधिकारी भी बात सुनकर दंग रह गए थे। इस लापरवाही ने छह परिवारों की जान ले ली। लेकिन हादसों की वजह का मुख्य कारण हवा और पानी को बताया जा रहा है जो लोगों के गले नहीं उतर रहा है।

सीमेंट सहीं थी न सरिया, पिलर की दरार में की गई थी लीपापोती

ग्रामीणों के अनुसार पुल के निर्माण में घटिया सीमेंट और जंग लगी सरिया का प्रयोग किया जा रहा था। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने घटना के समय बताया था कि घटना से तीन माह पूर्व पांचवां पिलर को धराशायी हुआ है, उसने दरार दे दी थी लेकिन उस पर लीपापोती करते उसे खड़ा कर दिया गया और यह घटना हो गई। कहीं न कहीं ठेकेदार की लापरवाही के कारण यह घटना हुई थी।

सपा, कांग्रेस समेत अन्य दलों ने सरकार पर बोला था हमला

इस घटना के बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि पुलिया बनती नहीं, पुल निर्माण की जिद क्यों ठाने है भाजपा। उन्होंने कहा था कि बेईमानी की चाशनी में डूबी भाजपा के भ्रष्टाचार की कड़वी जलेबी अब और नहीं सही जा सकती है। भाजपा सरकार में हो रहा हर निर्माण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। इसकी मूल वजजह हर काम में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा की कमीशनखोरी है। इसके अलावा कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोला था। भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी व कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य मनीष शर्मा ने मजदूरों की मौत संस्थागत हत्या बताई थी और उसका जिम्मेदार सरकार को ठहराया था।

राजेश की मौत से चार बेटियों के सिर से उठ गया पिता का साया

इस घटना में ललपुरा थानाक्षेत्र के अछपुरा बहदीना गांव निवासी 42 वर्षीय राजेश पाल पुत्र सभाजीत पाल की भी मौत हो गई थी। जो करीब एक वर्ष से गार्ड की नौकरी कर रहा था। राजेश अपने घर का इकलौता कमाने वाला था और उस पर चार बेटियों की जिम्मेदारी थी। इस घटना के बाद राजेश की बेटियों के सिर से पिता का हाथ उठ गया और वह आज भी पिता की याद में गुमशुम रहती है। बेटियों को हर समय पिता के निधन का गम सताता रहता है।

तबाही का मंजर देख सेतु निगम के जेएमडी बोले थे कि पहली बार देखा ऐसा हादसा

शासन स्तर से गठित की गई टीम का नेतृत्व कर रहे सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथिलेश कुमार भी इस मंजर को देखकर दंग रह गए थे और उन्होंने कहा था कि अभी तक की नौकरी में पहली बार उन्होंने ऐसा हादसा देखा है। हर किसी की रूंह को इस तबाही के मंजर ने कंपा दिया था। तीन घंटे तक टीम ने तीन बार घटना स्थल का घूम-घूम कर जायजा लिया था और जांच पड़ताल की थी।

यह भी पढ़ें- Gen Z के बाद Gen Alpha ने की आवाज बुलंद...स्कूल की सड़क के लिए हमीरपुर-महोबा और उन्नाव में सड़कों पर उतरे, कलेक्ट्रेट घेरा