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यूपी में MLC को हर महीने कितनी मिलती है सैलरी? जानिए चुनाव का तरीका, अधिकार और मिलने वाली सुविधाएं

Published: Thu, 29 Oct 2026 10:55 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के वेतन-भत्तों में 1 अप्रैल 2025 से संशोधन किया गया है, जिसमें ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।

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HighLights

  1. एमएलसी का मूल वेतन 1 अप्रैल 2025 से 35,000 रुपये।

  2. एमएलसी का चुनाव अलग-अलग निर्वाचन मंडलों द्वारा होता है।

  3. विधान परिषद सदस्य कानून बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।

डिजिटल डेस्क, जागरण, गोरखपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधायक (एमएलए) और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) दोनों की अहम भूमिका होती है। हालांकि, दोनों सदनों के सदस्यों को चुनने का तरीका और उनके अधिकारों में अंतर है। विधानसभा चुनाव में जनता सीधे अपने क्षेत्र के प्रत्याशी को वोट देकर विधायक चुनती है, जबकि विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव अलग-अलग निर्वाचन मंडलों के जरिए होता है। कुछ सदस्यों को राज्यपाल भी मनोनीत करते हैं।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2025 में वेतन और भत्तों में संशोधन के बाद विधायकों और विधान परिषद सदस्यों का मूल वेतन 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 35 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया। इसके अलावा सदस्यों को विभिन्न मदों में भत्ते और सुविधाएं मिलती हैं। संशोधित व्यवस्था एक अप्रैल 2025 से प्रभावी की गई।

एमएलसी को मिलने वाले प्रमुख वेतन और भत्ते इस प्रकार हैं

  • मूल वेतन: 35,000 रुपये प्रतिमाह।
  • निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: 75,000 रुपये प्रतिमाह।
  • चिकित्सा भत्ता: 45,000 रुपये प्रतिमाह।
  • सचिवीय भत्ता: 30,000 रुपये प्रतिमाह।
  • टेलीफोन भत्ता: 9,000 रुपये प्रतिमाह।
  • जनसेवा भत्ता: 2,000 रुपये प्रतिमाह।
  • सदन और समिति की बैठकों का दैनिक भत्ता: निर्धारित शर्तों के तहत 2,500 रुपये प्रतिदिन।

इनके अतिरिक्त यात्रा और अन्य सुविधाएं भी नियमानुसार मिलती हैं।

एमएलसी को कैसे चुना जाता है
विधान परिषद के सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है। परिषद के लगभग एक-तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं, जिससे सदन में निरंतरता बनी रहती है। एमएलसी बनने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए।

एमएलसी के पास कितनी होती है पावर
विधान परिषद के सदस्य राज्य में कानून बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। वे सदन में विधेयकों पर चर्चा कर सकते हैं, सवाल उठा सकते हैं, सुझाव दे सकते हैं और सरकार के कामकाज पर जवाब मांग सकते हैं। लेकिन उनकी शक्तियां विधानसभा के सदस्यों के समान हर मामले में नहीं होती हैं।

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एमएलए और एमएलसी में क्या है अंतर
एमएलए यानी विधायक विधानसभा का सदस्य होता है, जिसे विधानसभा क्षेत्र के मतदाता सीधे चुनते हैं। वहीं, एमएलसी विधान परिषद का सदस्य होता है, जिसे निर्धारित निर्वाचन मंडल के मतदाता चुनते हैं या राज्यपाल मनोनीत करते हैं।

दोनों सदन कानून बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन वित्तीय मामलों और सरकार के बहुमत के मामले में विधानसभा को अधिक अधिकार प्राप्त हैं। विधान परिषद का प्रमुख उद्देश्य कानूनों की समीक्षा करना, विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को मंच देना और विधायी प्रक्रिया में अतिरिक्त विचार-विमर्श सुनिश्चित करना है।

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