चितला मछली के संरक्षण से चमकेगी मछुआरों की किस्मत, खुलेंगे कमाई के नए रास्ते
उत्तर प्रदेश में राज्य मछली चितला के संरक्षण और संवर्धन के लिए गोरखपुर मंडल की नदियों में 2.75 लाख मत्स्य ...और पढ़ें

कोलकाता से मंगाकर डाली जाएंगी 2.75 लाख मछलियां। फोटो- इंटरनेट मीडिया
HighLights
गोरखपुर मंडल की नदियों में 2.75 लाख चितला अंगुलिकाएं छोड़ी जाएंगी।
चितला मछली के संरक्षण से नदी की जैव विविधता बढ़ेगी।
मछुआरों को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। प्रदेश की राज्य मछली चितला के संरक्षण और संवर्धन की कवायद शुरू हुृई है। मत्स्य विभाग की ओर से मंडल की प्रमुख नदियों में 2.75 लाख चितला के छोटे बच्चे (मत्स्य अंगुलिकाएं) डाली जाएंगी। इसके लिए लगभग तीन इंच आकार के बच्चे कोलकाता से मंगाए जा रहे हैं। बड़े आकार के बच्चे नदी में छोड़ने से उनके दूसरी मछलियों का आहार बनने की आशंका कम होगी और उनके जीवित रहने की संभावना बढ़ेगी। इसको लेकर विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार, चितला मछलियों की संख्या लगातार कम हो रही है। मत्स्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इनकी संख्या बढ़ाने की जरूरत है। इन मछलियों को स्थानीय लोग मोय कहते हैं। उपनिदेशक मत्स्य बृजेश कुमार ने बताया कि चितला मीठे पानी की देसी मछली है।
इसका शरीर लंबा और चपटा होता है। शरीर पर बने गोलाकार धब्बे और लंबा पृष्ठीय पंख इसकी प्रमुख पहचान हैं। यह बड़ी नदियों में पाई जाती है और खाद्य मछली के रूप में भी इसका विशेष महत्व है। नदी की जैव विविधता में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। नदियों में अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवास में बदलाव से चितला की संख्या प्रभावित हुई है।
ऐसे में नदी में बच्चे डालकर इसकी प्राकृतिक आबादी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे देशी मछली प्रजाति के संरक्षण के साथ नदी में मछली उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। गोरखपुर की राप्ती नदी में 75 हजार, सरयू में 50 हजार, कुशीनगर की गंडक में 50 हजार, महराजगंज और देवरिया की नदियों में 50-50 हजार चितला के बच्चे डाले जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश में चितला के संरक्षण के लिए अन्य नदियों में रीवर रैंचिंग की जाएगी।
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निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश के मत्स्य विभाग मंत्री डा. संजय निषाद ने बताया कि चितला (चीतल)के संरक्षण के साथ मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की योजना है। नदियों में मत्स्य शिकारमाही करने वाले मछुआरा समुदाय के लोगों को इससे रोजगार और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
