गोरखपुर-बढ़नी रूट पर 120km/h की रफ्तार से दौड़ी 'वंदे भारत' की रेक, NER के इंजीनियरों ने हासिल की नई उपलब्धि
गोरखपुर के यांत्रिक कारखाने के इंजीनियरों ने 25 दिन में आठ कोच वाली वंदे भारत रेक की ओवरहालिंग कर उसे 120 किमी/घंटा की रफ्तार पर सफलतापूर्वक परखा।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
यांत्रिक कारखाने ने 25 दिन में वंदे भारत रेक की ओवरहालिंग की।
गोरखपुर-बढ़नी रूट पर 120 किमी/घंटा की रफ्तार से सफल परीक्षण।
सौर ऊर्जा संचालित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' एसी अनुरक्षण के लिए विकसित।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। यांत्रिक कारखाने के इंजीनियर व सुपरवाइजरों ने आठ कोच वाली वंदे भारत की रेक की 25 दिन में ओवरहालिंग कर एक और उपलब्धि हासिल कर ली है। कारखाने में ओवरहालिंग के बाद निकली सेमी हाईस्पीड ट्रेन की रेक का परीक्षण सफल रहा है।
ट्रेन की रेक गोरखपुर-बढ़नी रूट पर 110 से अधिकतम 120 की रफ्तार से दौड़ी। इंजीनियरों ने ट्रेन की रेक को फिट घोषित कर दिया है। जल्द ही यह रेक गोरखपुर-पाटलिपुत्र वंदे भारत में लग जाएगी। गोरखपुर-पाटलिपुत्र वंदे भारत, दूसरे जोन की रेक से चल रही है।
इसके पहले इंजीनियरों ने सीमित संसाधनों व उपकरणों के अभाव में 16 कोच वाली गोरखपुर-अयोध्या-लखनऊ-प्रयागराज वंदे भारत की रेक की ओवरहालिंग की थी। रेलवे बोर्ड और रेलवे प्रशासन ने इंजीनियरों और कारखाना प्रबंधन की पीठ थपथपायी है।
गोरखपुर में वंदे भारत ट्रेनों की कोचिंग डिपो में रिपेयरिंग और सफाई-धुलाई तो हो जाती है, लेकिन ओवरहालिंग की कोई अधिकृत व्यवस्था नहीं है। हालांकि, रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर में वंदे भारत के डिपो निर्माण की मंजूरी दे दी है। लेकिन पर्याप्त भूमि नहीं मिलने से डिपो निर्माण नहीं हो पा रहा। ऐसे में वंदे भारत की ओवरहालिंग प्रभावित हो रही है।
वंदे भारत के रखरखाव और ओवहालिंग को लेकर रेलवे प्रशासन की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। रेलवे प्रशासन की परेशानियों को देखते हुए कारखाना प्रबंधन ने अपने इंजीनियरों व सुपरवाइजरों के भरोसे वंदे भारत की ओवरहालिंग का निर्णय लिया है।
आने वाले दिनों में गोरखपुर से वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनें ही चलाई जानी है। सात जुलाई, 2023 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गोरखपुर जंक्शन से पहली वंदे भारत को हरी झंडी दिखाई थी।
कारखाने में भी हो सकेगा 'वंदे भारत' के एसी का अनुरक्षण
यांत्रिक कारखाना में सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों में लगने वाले लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोचों के साथ सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत में लगे रूफ माउंटेड पैकेज यूनिट (आरएमपीयू) के वातानुकूलन (एसी) का भी अनुरक्षण हो सकेगा।
इसके लिए कारखाने के इंजीनियरों ने पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) का पहला अत्याधुनिक ''सेंटर आफ एक्सीलेंस'' विकसित किया है। खास बात यह है कि ''सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'' सौर ऊर्जा (सोलर प्लांट) से संचालित होगा, जिससे तकनीकी उन्नयन के साथ हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।
