गोरखपुर में भोजन सेवा की मिसाल बनीं सुप्रिया, हर दिन 100 लोगों को करा रहीं भोजन
गोरखपुर की रेस्तरां कारोबारी सुप्रिया द्विवेदी ने 2019 में 'भोजन बैंक' की शुरुआत की, जो अब प्रतिदिन 80-100 जरूरतमंदों को ...और पढ़ें

रेस्तरां कारोबारी सुप्रिया द्विवेदी। जागरण
HighLights
सुप्रिया द्विवेदी ने 2019 में 'भोजन बैंक' शुरू किया।
प्रतिदिन 80-100 जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
बचे हुए भोजन का सदुपयोग कर भूख मिटाई जाती है।
सुनील सिंह, गोरखपुर। शहर में जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने की पहल कर रेस्तरां कारोबारी सुप्रिया द्विवेदी सेवा की मिसाल बन गई हैं। रेस्तरां में बचने वाले भोजन को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के उद्देश्य से उन्होंने भोजन बैंक की शुरुआत की। सिविल लाइंस में वर्ष 2019 में शुरू हुई यह पहल अब लगातार विस्तार ले रही है।
वर्तमान में प्रतिदिन 80 से 100 लोग उनके यहां भोजन करते हैं। इनमें ई-रिक्शा चालक, रिक्शा चालक, ठेला वाले, मजदूर बच्चे व अन्य जरूरतमंद लोग शामिल हैं। सुप्रिया की इस पहल का उद्देश्य भोजन की बर्बादी रोकने के साथ ही जरूरतमंदों की भूख मिटाना है।
होटल में तैयार होने वाले भोजन में से बचने वाले खाने को फेंकने के बजाय उन्होंने उसका सदुपयोग करने का रास्ता निकाला। धीरे-धीरे यह प्रयास सेवा के एक ऐसे अभियान में बदल गया, जिससे हर दिन बड़ी संख्या में लोगों को भोजन मिल रहा है।
बचने वाले भोजन से शुरू हुआ सफर
रेस्तरां में कई बार भोजन बच जाता था। ऐसे में सुप्रिया ने सोचा कि इस भोजन को जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाए, ताकि कोई भूखा न रहे और खाने की बर्बादी भी रोकी जा सके। इसी सोच के साथ उन्होंने भोजन बैंक की शुरुआत की। इस पहल के जरिए जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज भी जारी है। समय के साथ इस सेवा का दायरा बढ़ता गया। जरूरतमंदों की संख्या को देखते हुए अब होटल में बचने वाले भोजन के अतिरिक्त अलग से भी खाना तैयार किया जाता है। इससे प्रतिदिन आने वाले लोगों को भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
कोरोना काल में भी जारी रही सेवा
वर्ष 2019 में शुरू हुई इस पहल के सामने कोरोना काल में भी चुनौतियां आईं, लेकिन सुप्रिया ने अपनी सेवा बंद नहीं की। मुश्किल समय में जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने का प्रयास जारी रखा। उनकी इस पहल ने यह संदेश दिया कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए इच्छाशक्ति और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता सबसे जरूरी है। आज भोजन बैंक के माध्यम से प्रतिदिन 80 से 100 लोगों को भोजन मिलना इस पहल की निरंतरता को दर्शाता है।
सुप्रिया द्विवेदी का यह प्रयास बताता है कि होटल में बचने वाला भोजन भी किसी जरूरतमंद के लिए बड़ी राहत बन सकता है। भोजन की बर्बादी रोकने और जरूरतमंदों की मदद करने का उनका यह अभियान समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
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फ्रीज में रखा जाता है भोजन
सुप्रिया ने बचे हुए भोजना को रखने के लिए फ्रीज रखा है। यहां रहने वाले गार्ड इसका वितरण करते हैं। जरूरतमंद स्वयं भी भोजन निकाल लेते हैं। प्रतिदिन सुबह-शाम यह क्रम चलता है। पूरी व्यवस्था वह खुद करती हैं। भोजन कम होने पर होटल से तैयार कराकर रखा जाता है।
