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गोरखपुर में जुहू चौपाटी की थी योजना, सुमेर सागर बना कूड़े का ठिकाना

Published: Wed, 14 Oct 2026 12:54 PM (IST)

गोरखपुर का सुमेर सागर ताल, जिसे कभी जुहू चौपाटी की तर्ज पर पर्यटन स्थल बनाने का सपना देखा गया था, ...और पढ़ें

करोड़ों की भूमि अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद भी नहीं बदली तस्वीर। जागरण

करोड़ों की भूमि अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद भी नहीं बदली तस्वीर। जागरण

HighLights

  1. सुमेर सागर को पर्यटन स्थल बनाने का सपना अधूरा।

  2. ऐतिहासिक ताल अब नगर निगम का कूड़ाघर बना।

  3. अतिक्रमण मुक्त भूमि पर फिर अवैध गतिविधियां बढ़ीं।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। कभी सुमेर सागर ताल को मुंबई की जुहू चौपाटी की तर्ज पर विकसित करने का सपना दिखाया गया था। योजना थी कि ऐतिहासिक ताल को नया स्वरूप देकर पर्यटन स्थल बनाया जाएगा, जहां लोग सुकून के पल बिता सकें। शासन की त्वरित आर्थिक विकास योजना और पर्यटन विभाग के माध्यम से इसे संवारने की कवायद भी हुई, लेकिन समय के साथ यह सपना फाइलों में ही दम तोड़ता नजर आया।

आज हालात ऐसे हैं कि जिस ताल को पर्यटन स्थल बनना था, वह नगर निगम के कूड़े का ठिकाना बन गया है। सुबह होते ही ट्रालियों से पहुंचने वाला कचरा आसपास के लोगों और दुकानदारों की परेशानी बढ़ा रहा है। विजय चौराहा-धर्मशाला बाजार मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को भी दुर्गंध झेलनी पड़ रही है।

22 एकड़ का ताल, 20 साल में अतिक्रमण का जाल
सुमेर सागर की बदहाली के पीछे अतिक्रमण भी बड़ी वजह रहा है। करीब 22 एकड़ क्षेत्रफल वाले ताल पर बीते दो दशक में मकान, गोदाम और सड़कें तक बन गईं। इससे सौ से अधिक परिवार बस गए। वर्ष 2020 में प्रशासन ने अभियान चलाकर 10 एकड़ से अधिक भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई। उम्मीद जगी कि अब ताल की सूरत बदलेगी, लेकिन न तो प्रभावी बाड़बंदी हुई और न ही नियमित रखरखाव की व्यवस्था। नतीजा यह कि मुक्त कराई गई भूमि पर फिर अवैध गतिविधियां बढ़ने लगीं। कहीं कूड़ा डाला जा रहा है तो कहीं अवैध पार्किंग ने जगह घेर ली है।

करोड़ों की भूमि मुक्त, लेकिन संरक्षण के इंतजाम गायब
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद भूमि की सुरक्षा और उपयोग की ठोस योजना नहीं बन सकी। बाउंड्री और निगरानी के अभाव में सरकारी भूमि पर दोबारा कब्जे की आशंका बनी हुई है। कूड़े के ढेर से उठती दुर्गंध स्वच्छता के दावों पर भी सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मुक्त कराई गई भूमि का संरक्षण ही नहीं करना था तो अभियान का लाभ क्या हुआ?

स्थानीय निवासी आदित्य पांडे बताते हैं कि सुमेर सागर को पर्यटन स्थल बनाने की बातें हुई थीं, लेकिन अब यहां कचरा फेंका जा रहा है। सुबह ट्रालियों से कचरा गिरने के बाद दुर्गंध फैल जाती है। इससे आसपास रहने वालों का जीवन मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कूड़ा डालने पर तत्काल रोक लगाने और नियमित सफाई की मांग की।
व्यापारी नितिन जायसवाल का कहना है कि इस मार्ग से रोज बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। बदबू के कारण दुकानों पर बैठना और ग्राहकों का आना-जाना मुश्किल हो रहा है। भूमि अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद भी यदि वहां कूड़ा और अवैध पार्किंग बढ़ेगी तो कार्रवाई का उद्देश्य अधूरा ही रहेगा।

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भूजल बचाने वाले ताल की ही अनदेखी
सुमेर सागर की अनदेखी केवल पर्यटन और स्वच्छता तक सीमित नहीं है। ताल-पोखरे वर्षा जल को भूमि में पहुंचाने और भूजल पुनर्भरण में भी अहम भूमिका निभाते हैं। तेजी से बढ़ते निर्माण के बीच प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण और जरूरी हो गया है। इसके लिए ताल में नालियों का गंदा पानी जाने से रोकना और नियमित सफाई भी जरूरी है। ऐसे में कूड़ा डालकर ताल को नुकसान पहुंचाना पर्यावरण के लिहाज से भी चिंताजनक है।

अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने कहा कि सुमेर सागर में कूड़ा डाला जा रहा है तो यह बहुत गलत है। इस पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी।

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सुमेर सागर ताल के मामले की जांच कराई जा रही है। सब कुछ ठीक रहा तो ताल को आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा।

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-अजय जैन, नगर आयुक्त