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गोरखपुर शिक्षक चुनाव: सपा के वोट बैंक पर राजीव यादव की सेंध, PDA फार्मूला भी हुआ फेल

Published: Thu, 29 Oct 2026 09:29 AM (IST)

गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी तीसरे स्थान पर रहे, जबकि निर्दलीय राजीव यादव ने मजबूत ...और पढ़ें

राजीव यादव, निर्दल प्रत्याशी

राजीव यादव, निर्दल प्रत्याशी

HighLights

  1. सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी चारों राउंड में तीसरे स्थान पर।

  2. निर्दलीय राजीव यादव ने सपा के संभावित वोट बैंक में सेंध लगाई।

  3. शिक्षक चुनाव में सपा का पीडीए फार्मूला विफल साबित हुआ।

अरुण चन्द, गोरखपुर। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डा. संजयन त्रिपाठी को मिले वोटों की स्थिति पार्टी के लिए कई राजनीतिक सवाल छोड़ गई है। भाजपा से सपा में आए संजयन न तो पहले वरीयता के मतों में अपनी बढ़त बना सके और न ही चारों राउंड में तीसरे पायदान से ऊपर उठ पाए।

दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव ने शुरुआत से ही उन्हें पीछे रखा और भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को कड़ी चुनौती दी। यह नतीजा केवल एक प्रत्याशी की हार-जीत का गणित नहीं, बल्कि शिक्षक राजनीति में सपा की पकड़ और उसके वोटों के बिखराव की पड़ताल का अवसर भी माना जा रहा है।

मतगणना के पहले राउंड में भाजपा के ध्रुव कुमार त्रिपाठी को 3813, निर्दलीय राजीव यादव को 3703 और सपा के संजयन त्रिपाठी को 2744 मत मिले। दूसरे राउंड में राजीव के कुल मत बढ़कर 7457 हो गए, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 7424 और संजयन को 5487 मत मिले।

तीसरे राउंड के बाद राजीव 11287 मतों के साथ पहले, ध्रुव 10911 के साथ दूसरे और संजयन 8179 मतों के साथ तीसरे स्थान पर थे। यानी मुकाबले के तीनों प्रमुख चेहरों के बीच अंतर लगातार राजनीतिक संदेश दे रहा था।

राजीव यादव का प्रदर्शन इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि उन्होंने निर्दलीय रहते हुए सपा प्रत्याशी से काफी अधिक मत हासिल किए। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या राजीव ने सपा के संभावित वोट बैंक में सेंध लगाई? और यह भी कि सपा का पीडीए फार्मूला कितना काम आया?

शिक्षक राजनीति में व्यक्तिगत संपर्क, संगठन और प्रत्याशी की अपनी स्वीकार्यता भी अहम होती है। ऐसे में राजीव को मिले मतों को सीधे सपा के खाते से निकला वोट मानना सही नहीं होगा। हालांकि, संजयन से उनका बड़ा अंतर यह संकेत जरूर देता है कि सपा का समर्थन उनके पक्ष में अपेक्षित स्तर तक एकजुट नहीं हो सका।

भाजपा से सपा में आए, लेकिन नहीं बना पाए बढ़त

संजयन त्रिपाठी का प्रदर्शन सपा के लिए इसलिए भी विचारणीय है कि पार्टी में आने के बाद भी वह पहले वरीयता के चारों राउंड में तीसरे स्थान पर रहे। यदि सपा का पूरा वोट उनके पक्ष में एकजुट होता और प्रत्याशी के स्तर पर अतिरिक्त समर्थन भी मिलता, तो कम से कम भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के साथ उनकी टक्कर अधिक करीबी होने की उम्मीद की जा सकती थी। लेकिन मतगणना के आंकड़े ऐसी बढ़त दिखाने में नाकाम रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि सपा का पूरा वोट राजीव यादव के पक्ष में चला गया या पार्टी के मतदाता संजयन से दूर रहे। इसके लिए बूथवार मतदान, शिक्षक संगठनों के समर्थन और मतदाताओं की राजनीतिक प्राथमिकताओं का विश्लेषण जरूरी होगा। फिर भी नतीजे बताते हैं कि पार्टी का नाम और प्रत्याशी का राजनीतिक पाला बदलना अपने आप में जीत की गारंटी नहीं है।

दूसरी वरीयता की गिनती ने मुकाबले को नया मोड़ दिया। इस चरण में राजीव यादव और ध्रुव कुमार त्रिपाठी के बीच मुकाबला आगे बढ़ा, जबकि संजयन की स्थिति पर भी नजर रही। ऐसे में सपा के सामने सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं है कि उसका प्रत्याशी क्यों हारा, बल्कि यह भी है कि शिक्षक मतदाताओं के बीच पार्टी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत कितनी बचा पाई।

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इस चुनाव का राजनीतिक संदेश साफ है कि सपा के लिए शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनौती सिर्फ भाजपा से मुकाबले की नहीं, बल्कि अपने समर्थक मतों को एक प्रत्याशी के पक्ष में समेटने की भी है। राजीव यादव की चुनौती ने इस कमजोरी को उजागर किया है। अब देखना होगा कि पार्टी इसे महज चुनावी हार मानती है या शिक्षक संगठनों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के संकेत के रूप में लेती है।

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