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ट्रेनों में चूहों और तिलचट्टों का उत्पात, पहुंचा रहे नुकसान; रेलवे से गुहार लगा रहे परेशान यात्री

Published: Thu, 10 Sep 2026 12:40 PM (GMT+05:30)

यात्रियों ने ट्रेनों में चूहों और तिलचट्टों के बढ़ते उत्पात, गंदगी और अनधिकृत यात्रियों की शिकायत की है। दादर एक्सप्रेस ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. दादर एक्सप्रेस में चूहे ने खाने का सामान कुतरा, पानी रिसाव।

  2. अनधिकृत यात्रियों ने कोच में रास्ता रोका, टीटीई भी बेअसर।

  3. गोड्डा-गोमतीनगर एक्सप्रेस में तिलचट्टों से यात्री रात भर परेशान।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। ट्रेनों में सुहाना सफर का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। कोचों व टायलेट में गंदगी से परेशान यात्रियों को अब तिलचट्टे भी डराने लगे हैं। चूहे खाने-पीने के सामान कुतरने लगे हैं। चूहों और तिलचट्टों का उत्पात बढ़ता जा रहा है। जो आम यात्रियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

मंगलवार को 15018 गोरखपुर-एलटीटी दादर एक्सप्रेस के यात्री अनूप सिंह ने एसी थर्ड के बी वन कोच में चूहा देखने का दावा किया। उन्होंने एक्स पर यात्रियों की समस्याओं को पोस्ट किया। एक्स और रेल मदद एप पर खाने के पैकेट की तस्वीरें साझा करते हुए चूहे द्वारा खानपान की सामग्री को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। आनबोर्ड हाउसकीपिंग और पेस्ट कंट्रोल स्टाफ से तुरंत मदद की गुहार लगाई।

कोच बी वन के 70 नंबर बर्थ पर यात्रा कर रहे यात्री अनूप सिंह ने आरोप लगाया कि चूहे खाने की सामग्री को कुतर दिया है। कोच के अंदर पानी का रिसाव हो रहा है। आरक्षित कोच में भी बिना टिकट व अनधिकृत यात्री भरे हुए हैं। गेट और टायलेट का रास्ता ब्लाक हो गया है।

डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से उन्होंने रेलवे से मदद मांगी। उन्होंने कोच के गेट के पास बैठे यात्रियों की एक तस्वीर भी पोस्ट की। आरोप था कि टीटीई के कहने के बाद भी अनधिकृत यात्री गेटाें और रास्ते से हटने का नाम नहीं ले रहे हैं। कोच में ही जमे हुए हैं।

आठ अगस्त को ही गोरखपुर के रास्ते गोड्डा से गोमतीनगर जा रही 15089 नंबर की गोड्डा-गोमतीनगर एक्सप्रेस के वातानुकूलित कोचों में शाम होते ही तिलचट्टे घूमने लगे थे। रात आठ बजे के आसपास ट्रेन के बरौनी पहुंचते ही बर्थों पर बिछी बेडशीट पर भी काकरोचों ने कब्जा जमा लिया। बड़ी संख्या में तिलचट्टे देख यात्री दहशत में आ गए। बच्चे और महिलाओं की परेशानी बढ़ गई। वे डर के मारे बर्थ पर बैठ नहीं पा रहे थे।

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एसी थर्ड के बी फोर कोच में यात्रा कर रहीं यात्री उषा और पूर्णिमा ने त्वरित निस्तारण केंद्र के फोन नंबर 7068241412 पर शिकायत दर्ज कराई। कुछ देर बाद सफाईकर्मी आए और केमिकल का छिड़काव कर चले गए। तिलचट्टों पर केमिकल के छिड़काव का भी कोई असर नहीं पड़ा और वे बिना डर के यात्रियों के शरीर पर चढ़कर घूम रहे थे। हाथ और पैर में काट भी रहे थे। डर के मारे यात्री रात भर सो नहीं पाए। बच्चे जागते रहे। लेकिन, किसी ने संज्ञान नहीं लिया।

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यात्रियों ने कोचों की साफ-सफाई पर भी सवाल उठाए थे। दरअसल, लंबी दूरी की ट्रेनों में कोचों की समुचित सफाई नहीं हो पाती। ट्रेन यार्ड में खड़ी रहती है। गंदगी के चलते चूहे और तिलचट्टे कोचों में अपना घर बना लेते हैं। जबकि, कोचों की सफाई और धुलाई के नाम पर रेलवे का लाखों खर्च हो रहा है।


ट्रेन का प्राथमिक रखरखाव गोरखपुर में होता है, इसलिए रेक के गोरखपुर वापस आने पर चूहे पकड़ने वाले ट्रैप की जांच की जाएगी और उन्हें बदला जाएगा। कीट नियंत्रण के लिए रेक की फागिंग की जाएगी। कीट नियंत्रण करने वाली फर्म पर जुर्माना लगाया गया है। कोच में लीकेज को ठीक किया जाएगा।

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-सुमित कुमार, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी- पूर्वोत्तर रेलवे