गोरखपुर में राप्ती ने किया खतरे का निशान पार, बहरामपुर में घुसा पानी
गोरखपुर में राप्ती नदी खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे बहरामपुर सहित कई इलाकों में ...और पढ़ें

राप्ती नदी में आयी बाढ़ के पानी से घिरे नौसढ़ के पास स्थित बहरामपुर उत्तरी के ग्रामवासी नाव का सहारा लेकर घर को जाते हुए। पंकज श्रीवास्तव
HighLights
राप्ती नदी गोरखपुर में खतरे के निशान से पांच सेमी ऊपर।
बहरामपुर में पानी घुसने से नावों का संचालन शुरू हुआ।
बड़हलगंज में तीसरी बार बाढ़ का संकट, कई गांव प्रभावित।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। राप्ती नदी ने बर्डघाट में खतरे का निशान पार कर लिया है। मंगलवार शाम चार बजे राप्ती नदी खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई। नदी के जलस्तर में बढ़त जारी है। नदी बढ़ने के बहरामपुर में पानी घुस गया है। यहां नाव चलने लगी है। इससे कई घरों के नागरिक जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थान की ओर जा रहे हैं। घरों में ताला लटकने लगा है।
राजघाट पर राप्ती नदी के किनारे स्थित महायोगी गुरु गोरक्षनाथ और रामघाट तक पानी पहुंच गया है। लकड़ी मंडी में भी पानी पहुंच गया है। इधर, बड़हलगंज के कछार में इस मौसम में तीसरी बार बाढ़ का पानी परेशानी का सबब बन गया है। फिर नाव चलाई जाने लगी है। रोहिन नदी खतरे के निशान से दो सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। राहत की बात यह है कि नदी का पानी स्थिर हो गया है।
मंगलवार सुबह आठ बजे बर्डघाट में राप्ती नदी खतरे के निशान से सिर्फ छह सेंटीमीटर नीचे थी। 24 घंटे में नदी का जलस्तर 44 सेंटीमीटर बढ़ा था। शाम चार बजे नदी ने खतरने का निशान पार कर लिया। सरयू नदी कतरनिया घाट पर खतरे के निशान से तकरीबन दो मीटर नीचे है।
सरयू नदी का जलस्तर लगातार कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। इधर, कुशीनगर में एपी तटबंध के टूटने के बाद सिंचाई विभाग ने अपने अभियंताओं को अलर्ट कर दिया है। सभी अभियंताओं को बांधों का निरीक्षण कर व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

74.98 मीटर है खतरे का बिंदु
राप्ती नदी का बर्डघाट में खतरे का बिंदु 74.98 मीटर है। अब तक सिर्फ वर्ष 1998 में राप्ती नदी इस बिंदु से ऊपर 77.54 मीटर तक पहुंच गई थी। इसके बाद लहसड़ी बांध के साथ ही कई बांध टूटे थे। इससे जिले के कई स्थानों पर बाढ़ आ गई थी। महानगर का तारामंडल क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गया था। लोगों को बाढ़ से उबरने में महीनों लगे थे। इसके बाद कभी भी राप्ती नदी इस बिंदु पर नहीं पहुंची है। सरयू नदी का कतरनिया घाट में खतरने का बिंदु 136.78 मीटर पर है। वर्ष 1975 में सरयू इस बिंदु को पारकर 137.12 मीटर तक पहुंच गई थीं।
बाढ़ में डूबा रास्ता, जान जोखिम में डाल सफर
सहजनवा -पीपीगंज मार्ग पर तिलौरा चड़राव के पास चोरमा नाले पर बना वैकल्पिक रास्ता बाढ़ के पानी में डूब गया है। सड़क पर पानी भरने और तेज बहाव के बावजूद लोग जरूरी काम से जोखिम उठाकर निकल रहे हैं। पाली ब्लाक के चोरमा नाले पर पुराने पुल को तोड़कर नए पुल का निर्माण कराया जा रहा है।
निर्माण के दौरान आवागमन जारी रखने के लिए सीमेंट के पाइप डालकर अस्थायी मार्ग तैयार किया गया था। आस पास के क्षेत्रों में वर्षा से जलस्तर बढ़ने के बाद पानी रास्ते के ऊपर से बहने लगा। अब सतह भी दिखाई नहीं देने से वाहन चालकों के लिए स्थिति और खतरनाक हो गई है। भगवान दास, आकाश सिंह, मुन्ना निषाद, आदेश पांडेय आदि ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में और वृद्धि हुई तो यह संपर्क पूरी तरह टूट सकता है।

पाली ब्लाक के सिसई, सुरगहना और मकरहट के साथ ही कालेसर से मोक्षधाम के बीच कई स्थानों पर राप्ती किनारा काट रही है। नदी का दबाव बढ़ने से बोक्टा-बरवार और सहजनवा -डुमरिया बाबू बांध भी प्रभावित हो रहे हैं। आमी का पानी निचले क्षेत्रों में पहुंचकर चारे के खेतों में भरने लगा है। इससे पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट खड़ा होने लगा है। राष्ट्रीय राजमार्ग से भुआ शहीद मार्ग और हरदी-मगहर मार्ग पर पानी भरने के कारण रास्ता बंद हो गया है।
एसडीएम ने तटबंधों का लिया जायजा
कैंपियरगंज क्षेत्र के राप्ती और रोहिन नदी के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए एसडीएम आलोक रंजन सिंह ने रविवार को बढ़या, नेतवर, करमैनी-पनघटिया और ककटही क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों से बाढ़ को लेकर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। साथ ही आपदा की स्थिति में तत्काल तहसील प्रशासन को सूचना देने को कहा। इस दौरान नायब तहसीलदार हंसराज सहित अन्य राजस्व कर्मी मौजूद रहे।

बड़हलगंज में बाढ़ का गहराया संकट
बड़हलगंज के कछाराचंल में सरयू व राप्ती नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण मंगलवार को बाढ़ का संकट गहरा गया। बाढ़ से दो दर्जन गांव प्रभावित हो गए। जिसमें से दर्जन भर गांवों का संपर्क मार्ग डूब जाने के कारण लोग नावों के सहारे आवामगन कर रहे हैं। इस वर्ष तीसरी बार कछार के लोग बाढ़ झेलने को विवश हैं। सरयू नदी की बाढ़ से कोलखास, ज्ञानकोल, गोनघट, बगहा देवार, मुसाडोही, कोटियानिरंजन, खैराटी, अजयपुरा, गायघाट, गोनहा, बल्थर, जैतपुर, बरडीहा, भयपुरा, गोरखपुरा, बेलवा तुरंत सिंह तथा राप्ती नदी से लखनौरी, लखनौरा, हिगुंहार, सुबेदारनगर माझा, खोहियापट्टी, मच्छरगांवा, बिहुआ उर्फ अगलगौआ, नेतवारपट्टी, रामनगर, जगदीशपुर, मैभरा गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
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जैतपुर, बगहा देवार, मुसाडोही, कोटिया निरंजन, गोनाह, ज्ञानकोल, कोलखास, बल्थर, बेलवा तुरंत सिंह और राप्ती नदी के बाढ़ से प्रभावित लखनौरी, लखनौरा, मैभरा व हिंगुहार का संपर्क मार्ग डूब जाने के कारण लोग नाव से आवागमन को मजबूर हैं। अचानक तीसरी बार आई बाढ़ से ग्रामीण भौंचक हैं। बेमौसम बाढ़ से वे अचानक घिर गए हैं। अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से आई बाढ़ से वे लोग जरूरी सामान भी नहीं निकाल सके।
