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गोरखपुर के रामगढ़ताल में जल्द चलेगी हाईटेक 50 सीटर AC फेरी, जलमार्ग से जुड़ेंगे कई टूरिस्ट स्पॉट

Published: Mon, 02 Nov 2026 08:08 PM (IST)

गोरखपुर के रामगढ़ताल में जल्द ही 50 सीटों वाली वातानुकूलित कैटामरैन फेरी का संचालन शुरू होगा, जिससे प्रमुख पर्यटन स्थलों को जलमार्ग से जोड़ा जाएगा।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

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HighLights

  1. रामगढ़ताल में 50 सीटों वाली AC फेरी का संचालन जल्द।

  2. प्रमुख पर्यटन स्थल जलमार्ग से जुड़ेंगे, नया अनुभव मिलेगा।

  3. पर्यावरण संरक्षण, रोजगार वृद्धि पर भी विशेष ध्यान।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। रामगढ़ताल में अब सिर्फ नौकायन और वाटर स्पोर्ट्स ही नहीं, बल्कि जलमार्ग से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की सुविधा भी मिलेगी। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ताल में 50 यात्रियों की क्षमता वाली आधुनिक कैटामरैन फेरी बोट का संचालन शुरू कराने जा रहा है। इसके लिए मेगावर्स एसोसिएट्स का चयन कर कार्यादेश जारी कर दिया गया है।

फेरी के जरिए नौका विहार फेज-1, कन्वेंशन सेंटर, आरकेबीके पुल, सहारा स्टेट और चिड़ियाघर समेत प्रमुख पर्यटन स्थलों को जलमार्ग से जोड़ने की योजना है। इससे पर्यटकों को आवागमन का नया विकल्प मिलेगा और रामगढ़ताल में पर्यटन गतिविधियों का दायरा भी बढ़ेगा।

जीडीए के मुख्य अभियंता किशन सिंह ने बताया कि परियोजना के लिए परिवहन विभाग की ओर से जीएसटी सहित 3.06 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिली है। इसके तहत एक फेरी बोट और दो फ्लोटिंग जेटी का निर्माण कराया जाएगा।

फेरी का निर्माण गोरखपुर में ही तकनीकी विशेषज्ञों और कुशल कारीगरों की मदद से किया जाएगा। फर्म का लक्ष्य करीब तीन माह में इसका संचालन शुरू करने का है, जबकि कार्ययोजना के अनुसार छह माह में निर्माण और संचालन की प्रक्रिया पूरी की जानी है।

एसी केबिन में सफर, खाने-पीने की भी सुविधा

फेरी की खासियत यह होगी कि यह पूरी तरह वातानुकूलित होगी। कैटामरैन डिजाइन पर बनने वाली इस बोट में एक साथ 50 यात्री सफर कर सकेंगे। यात्रियों के लिए आरामदायक बैठने की व्यवस्था के साथ फूड और बेवरेजेज की सुविधा भी होगी। फेरी का संचालन सुबह से शाम तक निर्धारित रूट पर किया जाएगा। शाम को इसका इस्तेमाल निजी आयोजनों के लिए भी किया जा सकेगा। इससे परिवारों और पर्यटकों को ताल के बीच अलग तरह का अनुभव मिलेगा।

फेरी के संचालन के लिए कन्वेंशन सेंटर के सामने और आरकेबीके पुल के पास फ्लोटिंग जेटी बनाई जाएंगी। इन पर प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, किचन, फूड प्रिपरेशन एरिया और शौचालय जैसी सुविधाएं विकसित होंगी।

फेरी नौका विहार फेज-1, कन्वेंशन सेंटर, आरकेबीके, सहारा एस्टेट, चिड़ियाघर और नौका विहार फेज-2 होते हुए वापस अपने शुरुआती स्थान पर पहुंचेगी। इससे पर्यटकों को सड़क मार्ग से घूमने के बजाय ताल के रास्ते प्रमुख स्थलों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा।

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ताल की स्वच्छता और रोजगार पर भी जोर

मुख्य अभियंता के अनुसार, फेरी और जेटी के संचालन में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाएगा। जीरो वेस्ट डिस्पोजल व्यवस्था लागू होगी। फेरी से निकलने वाले कचरे का संग्रह, पृथक्करण और अधिकृत माध्यम से निस्तारण कराया जाएगा। ताल में कोई गंदगी नहीं जाएगी।

चयनित फर्म को 10 वर्ष तक संचालन की अनुमति दी जाएगी। निर्धारित मानकों का पालन करने पर इसे पांच वर्ष और बढ़ाया जा सकेगा। परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और तकनीकी कौशल को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

रामगढ़ताल को पर्यटन के साथ-साथ जल परिवहन के एक नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। फेरी शुरू होने से पर्यटकों और शहरवासियों को प्रमुख स्थलों के बीच आवागमन का नया विकल्प मिलेगा। आधुनिक सुविधाओं के साथ ताल की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। हमारा प्रयास है कि रामगढ़ताल की पर्यटन क्षमता का बेहतर उपयोग हो और गोरखपुर को नई पहचान मिले।- अभिनव गोपाल, उपाध्यक्ष, जीडीए

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