पद्म भूषण डॉ. अनिल जोशी के नेतृत्व में गोरखपुर पहुंची 'प्रकृति पथ यात्रा', हुआ जोरदार स्वागत
नेपाल के जनकपुरधाम से शुरू हुई 'प्रकृति पथ यात्रा' पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गोरखपुर पहुंची है। ...और पढ़ें

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेट नंबर दो पर पर्यावरणविद् डा. अनिल प्रकाश जोशी व यात्रा का स्वागत करते बाएं डा. गोविंद पांडेय। जागरण
HighLights
जनकपुरधाम से निकली 'प्रकृति पथ यात्रा' गोरखपुर पहुंची।
पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी कर रहे नेतृत्व।
पर्यावरण संरक्षण, जल स्वच्छता, वृक्षारोपण पर दे रही जोर।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नेपाल के जनकपुरधाम से निकली ‘प्रकृति पथ यात्रा’ रविवार को गोरखपुर पहुंची। देवरिया से होते हुए शहर पहुंची यात्रा का गौरी बाजार और चौरीचौरा में नागरिकों ने स्वागत किया।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेट नंबर दो पर पर्यावरणविद् डा. गोविंद पांडेय और डा. अंकित ने यात्रियों का अभिनंदन किया। इसके बाद यात्रा गोरखनाथ मंदिर पहुंची, जहां यात्री विश्राम कर रहे हैं। सोमवार को यात्रा बस्ती के लिए रवाना होगी।
यात्रा का नेतृत्व पद्म भूषण और पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद् डा. अनिल प्रकाश जोशी कर रहे हैं। महात्मा गांधी की जयंती पर दो अक्टूबर को जनकपुरधाम से शुरू हुई यह साइकिल यात्रा गांधीवादी विचारों, स्वराज और स्वस्थ पारिस्थितिकी की अवधारणा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
लगभग 50 से 55 दिनों में तीन हजार किलोमीटर की दूरी तय करने के लक्ष्य के साथ निकली यात्रा अब तक करीब 1200 किलोमीटर का सफर पूरा कर चुकी है। विभिन्न पड़ावों पर विद्यार्थियों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से संवाद कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है।
‘प्रकृति ही जीवन का आधार’
यात्रा के संयोजक राम बाबू तिवारी ने बताया कि यात्रा का मूल संदेश है कि प्रकृति केवल संसाधनों का भंडार नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। हवा, मिट्टी, जंगल, नदियां और जल के बिना मानव सभ्यता की कल्पना नहीं की जा सकती। इसके बावजूद विकास की दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर जोर दिया गया, जबकि उनके संरक्षण और पुनर्स्थापन को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया।
जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट, वनों की कटाई, जैव विविधता में गिरावट और बढ़ता प्रदूषण आज गंभीर चुनौतियां हैं। प्रकृति पथ यात्रा के माध्यम से लोगों को इन समस्याओं के प्रति जागरूक करने के साथ अपनी जीवनशैली और व्यवहार में बदलाव लाने की प्रेरणा दी जा रही है।
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जनभागीदारी से ही संभव संरक्षण
यात्रा के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छता, वृक्षारोपण, जैव विविधता और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली पर चर्चा की जा रही है। इसका उद्देश्य युवाओं, महिलाओं, किसानों और स्थानीय समुदायों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ना है। यात्रा का संदेश है कि पर्यावरण बचाना केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
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‘प्रकृति पथ यात्रा’ विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की पहल है। इसके जरिए लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रकृति का संरक्षण ही मानवता, संस्कृति और भविष्य की रक्षा का आधार है।
