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सऊदी में ड्रोन हमले में गोरखपुर के कमलेश की मौत, घर की चौखट पर आखिरी इंतजार; शव आने की राह देख रहा परिवार

Published: Sun, 25 Oct 2026 01:16 PM (IST)

सऊदी अरब के दम्माम हवाई अड्डे पर हुए हमले में जान गंवाने वाले कमलेश पांडेय का परिवार उनके पार्थिव शरीर ...और पढ़ें

कमलेश की फाइल फोटो। जागरण

 कमलेश की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. दम्माम हमले में कमलेश पांडेय की हुई मौत।

  2. परिवार को शव वापसी का बेसब्री से इंतजार।

  3. प्रशासन और मंत्री ने मदद का दिया भरोसा।

जागरण संवाददाता, बांसगांव (गोरखपुर)। घर की चौखट पर बैठी सुनीता देवी की नजरें बार-बार दरवाजे की ओर उठ जाती हैं। हर आहट पर लगता है कि शायद अब कमलेश का पार्थिव शरीर घर पहुंच जाएगा। लेकिन इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। सऊदी अरब के दम्माम हवाई अड्डे पर मिसाइल और ड्रोन हमले में पति की मौत की खबर ने सुनीता की दुनिया उजाड़ दी है।

पति के अंतिम दर्शन की आस में उनकी आंखें पथरा रही हैं। मां को दहाड़ें मारकर रोते देख 14 वर्षीय तान्वी और 10 वर्षीय तान्या भी बेसुध हो जा रही हैं। बांसगांव क्षेत्र के किशनपुर उर्फ बगही गांव में कमलेश के घर पसरा मातम हर आने-जाने वाले की आंखें नम कर रहा है।

कमलेश के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रतीक्षा में परिवार का हर पल भारी पड़ रहा है। परिजनों के अनुसार, शव लाने की सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। पत्नी सुनीता देवी, पिता हरिश्चन्द्र पांडेय और दोनों बेटियों के नोटरी शपथपत्र बनवाकर भेज दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से परिवार को बताया गया है कि 31 अक्टूबर तक कोई फ्लाइट नहीं है।

शव कब तक गांव पहुंचेगा, इसकी निश्चित समयसीमा भी नहीं बताई गई है। पत्नी का कहना है कि कमलेश पांडेय करीब तीन वर्षों से सऊदी अरब में काम कर रहे थे। दम्माम हवाई अड्डे के भीतर बस चलाकर वह परिवार की जरूरतें पूरी करते थे। पांच महीने पहले ही वह दोबारा सऊदी अरब गए थे।

21 अक्टूबर को हवाई अड्डे पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमले में उनकी मौत हो गई। चार भाइयों में दूसरे नंबर पर रहे कमलेश अपने माता-पिता की जिम्मेदारियों में भी हाथ बंटाते थे। पिता हरिश्चन्द्र खेती के साथ गांवों में कपड़े की फेरी लगाते हैं। कमलेश की कमाई परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा थी। अब पत्नी सुनीता के सामने दोनों बेटियों की पढ़ाई, परवरिश और घर चलाने की चिंता है।

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माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा छिन गया है। परिवार के सामने अपनों को खोने का दुख ही नहीं, आने वाले दिनों की आर्थिक अनिश्चितता भी खड़ी है। परिवार की पीड़ा जानने के लिए शनिवार को नायब तहसीलदार बांसगांव सुधीर मिश्रा घर पहुंचे। उन्होंने पत्नी, माता-पिता और अन्य परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और प्रशासन की ओर से मदद का भरोसा दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, कमलेश मृदुभाषी और मिलनसार थे।

केंद्रीय मंत्री ने विदेश मंत्री को लिखा पत्र
कमलेश का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने भी पहल की है। पत्नी सुनीता देवी के प्रार्थना पत्र पर उन्होंने 23 अक्टूबर को विदेश मंत्री डा. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। परिवार को अब उम्मीद है कि संबंधित अधिकारियों के समन्वय से शव गांव पहुंचाने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

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